650 क्विंटल गरीबों का राशन आखिर गया कहां विजयराघवगढ़ की तीन पीडीएस दुकानों में बड़ा खेल उजागर, 31 क्विंटल नमक भी स्टॉक से गायब सरकार गरीबों को सस्ता अनाज देकर पेट भरने की कोशिश में, लेकिन राशन व्यवस्था में सेंध ने खड़े किए गंभीर सवाल
650 क्विंटल गरीबों का राशन आखिर गया कहां
विजयराघवगढ़ की तीन पीडीएस दुकानों में बड़ा खेल उजागर, 31 क्विंटल नमक भी स्टॉक से गायब
सरकार गरीबों को सस्ता अनाज देकर पेट भरने की कोशिश में, लेकिन राशन व्यवस्था में सेंध ने खड़े किए गंभीर सवाल
कटनी।। सरकार गरीब परिवारों के लिए सस्ता गेहूं-चावल उपलब्ध कराकर उनके घर का चूल्हा जलाए रखने की कोशिश कर रही है। खाद्य सुरक्षा योजना के तहत जरूरतमंदों को मिलने वाला राशन उनके लिए महज सरकारी सुविधा नहीं, बल्कि जीवन-यापन का महत्वपूर्ण सहारा है। लेकिन जब इसी राशन व्यवस्था में सैकड़ों क्विंटल खाद्यान्न के अपयोजन का मामला सामने आए, तो सवाल केवल अनियमितता का नहीं रह जाता,सवाल उठता है कि गरीबों के हिस्से का राशन आखिर गया कहां। विजयराघवगढ़ अनुविभाग में हुई कार्रवाई ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की जांच में तीन उचित मूल्य दुकानों में मिलाकर करीब 651 क्विंटल गेहूं-चावल और लगभग 31 क्विंटल नमक के अपयोजन का मामला सामने आया है। इसके बाद तीनों दुकानों को निलंबित कर दिया गया।
आंकड़े बता रहे हैं गड़बड़ी की गंभीरता
भटिया मोहल्ला, कैमोर की दुकान क्रमांक 4208004 में गेहूं 73.84 क्विंटल, चावल 48.56 क्विंटल और नमक 6.64 क्विंटल के अपयोजन का मामला सामने आया।
खलवारा बाजार की दुकान क्रमांक 4208003 में गेहूं 175.31 क्विंटल, चावल 118.08 क्विंटल और नमक 13.19 क्विंटल के अपयोजन का प्रकरण पाया गया।
अमरैया पार की दुकान क्रमांक 4208002 में गेहूं 146.08 क्विंटल, चावल 89.58 क्विंटल और नमक 11.11 क्विंटल के अपयोजन का मामला जांच में सामने आया।
तीनों मामलों के आंकड़े जोड़ने पर तस्वीर बेहद गंभीर दिखाई देती है—395.23 क्विंटल गेहूं और 256.22 क्विंटल चावल, यानी कुल 651.45 क्विंटल खाद्यान्न, जबकि नमक की मात्रा 30.94 क्विंटल है।
इतना बड़ा स्टॉक अंतर कैसे हुआ
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राशन दुकानों में इतनी बड़ी मात्रा में खाद्यान्न का अंतर कैसे पैदा हुआ। क्या नियमित स्टॉक सत्यापन केवल कागजों तक सीमित रहा। क्या वितरण रजिस्टर और वास्तविक स्टॉक का समय पर मिलान नहीं हुआ।
क्या ई-पॉस मशीन से दर्ज वितरण और भौतिक स्टॉक की नियमित क्रॉस-चेकिंग नहीं हुई। क्या जिम्मेदार निगरानी अधिकारियों को लंबे समय तक इस अंतर की जानकारी नहीं मिली और यदि जानकारी थी, तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई।
करीब 650 क्विंटल खाद्यान्न कोई मामूली मात्रा नहीं है। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि मामले की गहराई से जांच आवश्यक है।
गरीबों की थाली से गायब हुआ अनाज तो जवाबदेही किसकी
पीडीएस व्यवस्था में सरकार अपने स्तर पर भारी आर्थिक सहायता देकर गरीब परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाती है। इस पूरी व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य यही है कि जरूरतमंद परिवारों को समय पर राशन मिले और कोई परिवार भोजन के संकट में न पड़े। ऐसे में यदि जांच में खाद्यान्न का अपयोजन सामने आता है, तो सबसे ज्यादा प्रभावित वही उपभोक्ता होते हैं जिनके नाम पर राशन जारी किया जाता है।
गरीब की थाली में पहुंचने वाला अनाज यदि वितरण तंत्र में ही कम हो जाए, तो यह केवल स्टॉक रजिस्टर का मामला नहीं यह जनहित और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।
सिर्फ दुकानें निलंबित करने से क्या खत्म हो जाएगा मामला
प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए तीनों उचित मूल्य दुकानों को निलंबित कर दिया है। उपभोक्ताओं को राशन मिलने में परेशानी न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी की गई है और दुकानों को जय माँ वीरासनी प्राथमिक उपभोक्ता सहकारी भंडार, विजयराघवगढ़ द्वारा संचालित उचित मूल्य दुकान से संलग्न किया गया है। यह प्रशासन की सकारात्मक पहल है। लेकिन अब असली परीक्षा आगे की कार्रवाई की है।
जनता जानना चाहती है। 650 क्विंटल से अधिक खाद्यान्न का हिसाब कौन देगा। लगभग 31 क्विंटल नमक का हिसाब कौन देगा। यदि सरकारी राशन का अपयोजन हुआ है तो उसकी भरपाई कौन करेगा। क्या जिम्मेदारों पर केवल निलंबन की कार्रवाई होगी या अन्य वैधानिक कार्रवाई भी होगी।
क्या जिले की बाकी पीडीएस दुकानों का भी इसी तरह भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। कलेक्टर आशीष तिवारी द्वारा पीडीएस में अनियमितताओं के प्रति जीरो टॉलरेंस की बात कही गई है। विजयराघवगढ़ में हुई कार्रवाई इसी सख्ती का परिणाम मानी जा रही है। अब जरूरत है कि इस कार्रवाई को उदाहरण बनाया जाए, अपवाद नहीं। यदि जांच में दोष प्रमाणित होता है तो गरीबों के हक के खाद्यान्न की पूरी वसूली, जिम्मेदारों की जवाबदेही और नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही जिले की अन्य उचित मूल्य दुकानों का भी आकस्मिक भौतिक सत्यापन कर यह देखा जाना चाहिए कि कहीं ऐसी गड़बड़ियां दूसरे क्षेत्रों में तो नहीं चल रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल गरीबों के हक की रखवाली कौन करेगा
सरकार की योजना कितनी भी अच्छी क्यों न हो, यदि उसके क्रियान्वयन में ही सेंध लग जाए तो उसका लाभ वास्तविक हितग्राही तक नहीं पहुंच सकता। विजयराघवगढ़ का यह मामला अब केवल तीन दुकानों की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह पूरे पीडीएस सिस्टम की निगरानी व्यवस्था की अग्निपरीक्षा है। गरीबों के हिस्से का राशन कोई सामान्य माल नहीं है।यह उनके अधिकार का अनाज है। इसलिए अब इंतजार है उस जवाब का 650 क्विंटल से अधिक खाद्यान्न और करीब 31 क्विंटल नमक के अपयोजन का पूरा सच क्या है, और इसके लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।