पहले जेब लूटी, फिर दहशत के धमाके,फरियादी को चुप कराने निकले बदमाश, पुलिस ने 48 घंटे में बिछाया शिकंजा,2800 की लूट से शुरू हुई कहानी
पहले जेब लूटी, फिर दहशत के धमाके,फरियादी को चुप कराने निकले बदमाश, पुलिस ने 48 घंटे में बिछाया शिकंजा,2800 की लूट से शुरू हुई कहानी
कटनी।। पहले रास्ता रोका गया…..फिर शराब के लिए पैसे मांगे गए…..विरोध करने पर जेब से 2,800 रुपये लूट लिए गए। मारपीट के बाद चाकू दिखाकर धमकी दी गई कि अगर पुलिस तक पहुंचे तो अंजाम बुरा होगा। लेकिन आरोपियों को शायद अंदाजा नहीं था कि इसके बाद शुरू होने वाला उनका अगला कदम पुलिस की कार्रवाई को और तेज कर देगा।
कटनी।। 6 सितंबर की शाम गड्डा टोला क्षेत्र में हुई लूट के बाद फरियादी को डराने का सिलसिला यहीं नहीं रुका। पुलिस में शिकायत न हो, इसके लिए आरोपियों ने दहशत फैलाने की नई चाल चली। शाम करीब 7:30 बजे फरियादी जब अपनी बड़ी मम्मी के घर के सामने खड़ा था, तभी अर्जुन उर्फ पुड़ी डुमार, समीर वंशकार और उनके साथी वहां पहुंचे और घर के बाजू की दीवार की ओर सुअर बम फेंक दिए। अचानक हुए धमाके से इलाके में सनसनी फैल गई। जान के डर से फरियादी वहां से भाग निकला। मौके पर बम फूटने से संबंधित सामान भी मिला। यानी आरोपियों की कोशिश साफ थी,डर पैदा करो, फरियादी को खामोश करो और लूट की शिकायत पुलिस तक न पहुंचने दो।
लेकिन इस बार कहानी बदमाशों के हिसाब से नहीं चली। दोनों घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए रंगनाथ नगर पुलिस ने आरोपियों की तलाश में तत्काल टीम लगाई और लगातार दबिश दी। फ़रियादी व्दारा उक्त दोनों घटनाओं की रिपोर्ट थाना रंगनाथ नगर में करने पर दो प्रकरणों में क्रमशः धारा 296(b), 119(1), 309(4), 351(2), 3(5) बीएनएस, 2023 के तहत एवं धारा 326(g) बीएनएस, 2023 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। महज 48 घंटे के भीतर पुलिस ने मुख्य आरोपी अर्जुन उर्फ पुड़ी डुमार और सुमित रैकवार को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के मुताबिक अर्जुन उर्फ पुड़ी डुमार आदतन अपराधी है और उसके खिलाफ कटनी जिले के विभिन्न थानों में एक दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। दोनों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है, जबकि घटनाक्रम में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
लूट के बाद धमकी, धमकी के बाद बमबारी और फिर पुलिस का शिकंजा,रंगनाथ नगर की इस वारदात में अपराधियों ने फरियादी को डराकर चुप कराने की कोशिश तो की, लेकिन 48 घंटे के भीतर पुलिस ने उनकी दहशत की कहानी पर ब्रेक लगा दिया।