यूजीसी बिल के विरोध में आंदोलन तेज,10 दिन का अनशन, अब 18 की चेतावनी,17 तक सांसद को आंदोलन स्थल पर बुलाने की मांग
यूजीसी बिल के विरोध में आंदोलन तेज,10 दिन का अनशन, अब 18 की चेतावनी,17 तक सांसद को आंदोलन स्थल पर बुलाने की मांग
कटनी।। यूजीसी बिल सहित विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर 7 सितंबर से जारी अनशन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अखिल भारतीय ब्राह्मण एकीकृत परिषद के राष्ट्रीय महासचिव अवधेश उरमलिया ने 18 सितंबर को अनशन स्थल पर आत्मदाह की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि 17 सितंबर तक क्षेत्रीय सांसद आंदोलन स्थल पर पहुंचकर उनकी मांगें नहीं सुनते और उचित आश्वासन नहीं मिलता है, तो वे यह कदम उठाएंगे।
अखिल भारतीय ब्राह्मण एकीकृत परिषद, श्री राजपूत करणी सेना सहित विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता आरक्षण को आर्थिक आधार पर करने, यूजीसी बिल समाप्त करने तथा एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करने से पहले सक्षम अधिकारी से जांच कराने सहित अन्य मांगों को लेकर अनशन कर रहे हैं। अनशनकारियों ने कहा कि मांगों पर ठोस आश्वासन मिलने पर आंदोलन समाप्त कर दिया जाएगा, लेकिन 17 सितंबर तक पहल नहीं होने पर 18 सितंबर को आत्मदाह की चेतावनी दी गई है।
यूजीसी कानून सहित आरक्षण और एससी/एसटी एक्ट से जुड़ी मांगों को लेकर कटनी कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर चल रहा आंदोलन अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अखिल भारतीय ब्राह्मण एकीकृत परिषद के राष्ट्रीय महासचिव अवधेश उरमलिया ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि यदि 17 सितंबर तक क्षेत्रीय सांसद आंदोलन स्थल पर पहुंचकर उनकी मांगें नहीं सुनते और अपेक्षित आश्वासन नहीं मिलता है, तो वे 18 सितंबर को यह कदम उठाएंगे।
आंदोलन में अखिल भारतीय ब्राह्मण एकीकृत परिषद, श्री राजपूत करणी सेना सहित विभिन्न ब्राह्मण एवं सामान्य वर्ग संगठन शामिल हैं। संगठनों की ओर से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिला कलेक्टर को संबोधित ज्ञापन सौंपकर मांगों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
तीन प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में आरक्षण व्यवस्था को जातिगत आधार के बजाय आर्थिक आधार पर किए जाने, यूजीसी कानून को वापस लेने तथा एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करने से पहले सक्षम अधिकारी से जांच कराए जाने की मांग शामिल है। इन मांगों को लेकर 7 सितंबर से कलेक्ट्रेट के सामने अनशन शुरू किया गया था।
अनशनकारियों राकेश मिश्रा, अवधेश उरमलिया और सुरजीत सिंह सोलंकी का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने मांग रखी है कि 17 सितंबर तक क्षेत्रीय सांसद आंदोलन स्थल पर पहुंचकर उनकी बात सुनें और मांगों को लोकसभा में चर्चा के लिए रखेंआंदोलनकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों को लेकर उचित एवं ठोस आश्वासन मिलता है तो वे अनशन समाप्त करने को तैयार हैं। वहीं, मांगों पर अपेक्षित पहल नहीं होने की स्थिति में 18 सितंबर को आत्मदाह की चेतावनी दी गई है। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार इस चेतावनी के संबंध में प्रशासन की ओर से उस समय तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। इस दौरान नारायण प्रसाद समदड़िया, ब्राह्मण समाज अध्यक्ष राजू शर्मा, विवेक तिवारी, भरत तिवारी, गुरमुख बाघरानी, चेतन सचदेवा, मोहित ठाकुर, मनोज मिश्रा, सचिन रजक, दीपक मिश्रा सहित अन्य लोग मौजूद रहे। अब निगाह प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की पहल पर है। 17 सितंबर की समय-सीमा के बीच आंदोलनकारियों और सांसद के बीच संवाद होता है या नहीं, यह इस आंदोलन की अगली दिशा तय करने वाला प्रमुख घटनाक्रम होगा।