सिर्फ और सिर्फ halehulchal.in पर — पद की जिम्मेदारी और कर्तव्य की मिसाल, अपने ही घर पर मुख्यमंत्री की कुदाल….. कर्तव्य की वेदी पर मुख्यमंत्री का अपना घर, मोहन यादव ने खुद चलाई कुदाल
कर्तव्य की वेदी पर मुख्यमंत्री का अपना घर, मोहन यादव ने खुद चलाई कुदाल
उज्जैन। सिंहस्थ के लिए उज्जैन में चल रहे व्यापक विकास कार्यों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसमें पद से बड़ा कर्तव्य और निजी भावना से बड़ा जनहित नजर आया।
सिंहस्थ की तैयारियों के तहत शहर में सड़क चौड़ीकरण सहित विभिन्न विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव का पैतृक घर भी सड़क चौड़ीकरण की जद में आया। रविवार को मुख्यमंत्री अपने पुश्तैनी घर पहुंचे। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और इसके बाद स्वयं कुदाल चलाकर घर को हटाने की शुरुआत की।
मुख्यमंत्री का यह कदम उस भावना को दर्शाता है कि जब सार्वजनिक हित और व्यक्तिगत हित आमने-सामने हों, तो जनहित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जिस घर से उनकी पारिवारिक स्मृतियां जुड़ी हैं, उसी घर को विकास कार्य के लिए हटाने की शुरुआत उन्होंने अपने हाथों से की।
सिंहस्थ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उज्जैन के लिए व्यापक स्तर पर बुनियादी ढांचे के विकास का अवसर भी है। सड़क, यातायात और अन्य सुविधाओं के विस्तार के लिए किए जा रहे कार्यों में कई लोगों की निजी संपत्तियां भी प्रभावित हो रही हैं। मुख्यमंत्री का अपना पैतृक घर इसकी जद में आना और उनके द्वारा स्वयं आगे बढ़कर इसे हटाने की शुरुआत करना इस पूरे घटनाक्रम को विशेष बना देता है।
मुख्यमंत्री ने अपने आचरण से यह संदेश दिया कि शासन की जिम्मेदारी निभाते समय निजी हित पीछे और सार्वजनिक हित आगे रखा जा सकता है। पैतृक घर से जुड़ी भावनाओं के बावजूद उन्होंने विकास कार्य में स्वयं सहभागी बनकर अपने कर्तव्य को प्राथमिकता दी।