थाने के भीतर पेट्रोल डालकर आया, खुद को आग लगाई….फिर भी किसी को भनक तक नहीं लगी कुठला थाने में 90% झुलसे दलपत पटेल की इलाज के दौरान मौत ; बेटे के चोरी केस में जेल और पत्नी से पूछताछ के बीच हुआ आत्मदाह का प्रयास पुलिस बोली-चोरी का माल बरामद न हो, इसलिए दबाव बनाने की कोशिश, परिजनों के आरोप अलग कहानी कहते हैं
थाने के भीतर पेट्रोल डालकर आया, खुद को आग लगाई….फिर भी किसी को भनक तक नहीं लगी
कुठला थाने में 90% झुलसे दलपत पटेल की इलाज के दौरान मौत ; बेटे के चोरी केस में जेल और पत्नी से पूछताछ के बीच हुआ आत्मदाह का प्रयास
पुलिस बोली-चोरी का माल बरामद न हो, इसलिए दबाव बनाने की कोशिश, परिजनों के आरोप अलग कहानी कहते हैं।
एक पुलिस थाना सामान्य सार्वजनिक स्थान नहीं होता। वहां आरोपी आते हैं, उनके परिजन आते हैं, शिकायतकर्ता आते हैं और संवेदनशील मामलों की पूछताछ होती है। ऐसी जगह पर किसी व्यक्ति का पेट्रोल डालकर पहुंच जाना और कुछ ही क्षण बाद खुद को आग के हवाले कर देना केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि सुरक्षा प्रोटोकॉल की गंभीर परीक्षा भी है।
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इससे पुलिस और आम नागरिक के बीच भरोसे का प्रश्न जुड़ा हुआ है। यदि कोई परिवार पुलिस कार्रवाई से परेशान है, तो उसे अपनी बात रखने के लिए सुरक्षित और कानूनी रास्ता मिलना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति दबाव बनाने के लिए आत्मघाती कदम उठाता है, तो उसकी वजह और जिम्मेदारी भी जांच का विषय होनी चाहिए। और यदि पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई है, तो उसे स्वीकार कर सुधारना भी उतना ही जरूरी है। व्यवस्था की मजबूती इस बात से साबित नहीं होती कि घटना के बाद कितनी तेजी से आग बुझाई गई, असली कसौटी यह है कि आग लगने की नौबत क्यों आई और उसे पहले क्यों नहीं रोका जा सका। अब जरूरत आरोपों की नहीं, सच्चाई की है। जरूरत बचाव की नहीं, जवाबदेही की है। और सबसे बढ़कर—जरूरत ऐसी जांच की है, जो यह बताए कि आखिर उस दिन कुठला थाने में सुरक्षा व्यवस्था की वह कड़ी कौन-सी थी, जो टूट गई।।
कटनी। कुठला थाना परिसर में शुक्रवार को हुई एक घटना ने पुलिस व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करने वाले कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दलपत पटेल नामक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपने शरीर पर पेट्रोल डालकर थाना परिसर में ही आग लगा ली। वह करीब 90 प्रतिशत तक झुलस गया और गंभीर हालत में उसे जबलपुर रेफर किया गया जहाँ उसकी मौत हो गई।
घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू आत्मदाह का प्रयास भर नहीं है, बल्कि यह है कि एक व्यक्ति कथित तौर पर पेट्रोल डालकर पुलिस थाने के भीतर पहुंचा और खुद को आग लगाने तक पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।
चोरी के मामले से जुड़ा था घटनाक्रम
डीएसपी अनिमेष द्विवेदी के अनुसार, 12 सितंबर 2026 को चोरी का अपराध क्रमांक 812/26 दर्ज किया गया था। पुलिस ने विवेचना के दौरान मोहित पटेल और लाला नामक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था तथा चोरी का कुछ सामान बरामद किया गया।
पुलिस के मुताबिक विवेचना के दौरान मोहित की मां गुड्डी बाई पटेल तक चोरी के सामान से जुड़ी जानकारी पहुंची। पुलिस ने सोनी के यहां जाकर सीसीटीवी फुटेज की जांच की और पुलिस का दावा है कि उसमें गुड्डी बाई को कथित रूप से चोरी का सामान बेचते हुए देखा गया। इसी आधार पर गुड्डी बाई को पूछताछ के लिए कुठला थाने लाया गया था। इसी दौरान दलपत पटेल थाना परिसर में पहुंचा और आत्मदाह का प्रयास किया।
परिजनों के आरोप, पुलिस का अपना पक्ष
घटना के बाद अस्पताल में परिजनों और पुलिस के बीच गहमा-गहमी की स्थिति बनी। परिजनों ने पुलिस कार्रवाई और परिवार पर कथित दबाव को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं डीएसपी अनिमेष द्विवेदी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चोरी का माल बरामद न हो, इसके लिए पुलिस पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा था और आत्मदाह का प्रयास इसी दबाव की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। पुलिस का पक्ष जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दूसरी ओर परिजनों के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम सत्य मानने के बजाय घटनाक्रम की स्वतंत्र और तथ्यपरक जांच ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकती है।
अब पुलिस प्रशासन से पूछे जाने चाहिए ये सवाल
01. दलपत शरीर पर पेट्रोल डालकर थाने में दाखिल हुआ तो उसे किसी ने देखा क्यों नहीं।
02. क्या थाना परिसर के प्रवेश द्वार पर उसकी निगरानी हुई थी।
03. क्या उस समय सीसीटीवी कैमरे चालू थे।
04. सीसीटीवी में उसके प्रवेश से लेकर आग लगाने तक की पूरी गतिविधि क्या रिकॉर्ड हुई
05. क्या पेट्रोल की गंध किसी पुलिसकर्मी या वहां मौजूद व्यक्ति को महसूस नहीं हुई।
06. क्या थाने में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा जांच का कोई निर्धारित प्रोटोकॉल है।
07. यदि प्रोटोकॉल है तो उसका पालन हुआ या नहीं।
08. क्या पुलिस को दलपत या उसके परिवार की ओर से किसी तनाव अथवा विरोध की पूर्व जानकारी थी।
09. घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए गए हैं या नहीं।
10. क्या इस घटना के बाद थाना स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई है। यह सिर्फ एक आत्मदाह की घटना नहीं, सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा है
पुलिस का दावा है कि उसने दबाव बनाने के लिए यह कदम उठाया, जबकि परिजनों की ओर से पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। यहीं से कहानी ने अचानक गंभीर मोड़ ले लिया।
थाने में चल रही थी पूछताछ, अचानक उठीं आग की लपटें
पुलिस के अनुसार, गुड्डी बाई ने सोने की अंगूठी होने की बात कही और उसे पुलिस के समक्ष प्रस्तुत किया। इसी दौरान दलपत पटेल थाना परिसर में पहुंचा।
पुलिस का कहना है कि दलपत ने अपने शरीर पर पहले से पेट्रोल डाल रखा था और अचानक खुद को आग लगा ली। थाने में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। पुलिसकर्मियों ने आग बुझाई और उसे जिला अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए जबलपुर रेफर कर दिया गया जहाँ उसकी मौत हो गई। लेकिन घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है, यदि पेट्रोल पहले से शरीर पर डाला था तो उसकी गंध किसे नहीं आई।
घटना के बाद अस्पताल में परिजनों और पुलिस के बीच गहमा-गहमी की स्थिति देखने को मिली। परिजनों की ओर से पुलिस की कार्रवाई और परिवार पर बनाए जा रहे कथित दबाव को लेकर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। लेकिन सवाल यह भी है कि यदि परिवार पुलिस कार्रवाई से इतना परेशान था, तो क्या घटनाक्रम से पहले पुलिस को किसी तनाव या विरोध की आशंका थी।
पुलिस का पलटवार-दबाव बनाने की कोशिश थी
डीएसपी अनिमेष द्विवेदी ने परिजनों के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि चोरी का सामान बरामद न हो, इसके लिए पुलिस पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा था और इसी क्रम में दलपत द्वारा आत्मदाह का प्रयास किया गया। पुलिस के पास चोरी के मामले में पर्याप्त साक्ष्य होने की बात भी डीएसपी ने कही है। पुलिस का यह पक्ष जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन पुलिस की कार्रवाई और आत्मदाह की वजह चाहे जो निकले, थाना परिसर में ज्वलनशील पदार्थ लेकर किसी व्यक्ति का पहुंचना अपने आप में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा का विषय है।
सिर्फ दलपत नहीं, अब हर थाने की सुरक्षा का सवाल
कुठला की घटना को केवल एक व्यक्ति के आत्मघाती कदम के रूप में खत्म कर देना शायद पर्याप्त नहीं होगा। यह घटना प्रदेश के तमाम पुलिस थानों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी चेतावनी है। थाना ऐसी जगह है जहां आरोपी, संदिग्ध, गवाह और उनके परिजन लगातार आते हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति ज्वलनशील पदार्थ लेकर परिसर में प्रवेश कर जाता है और खुद को आग लगाने में सफल हो जाता है, तो सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक हो जाती है।
यहां सवाल पुलिस को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का है। यदि जांच में पुलिस की कोई गलती नहीं मिलती तो तथ्य सामने आने चाहिए। यदि सुरक्षा व्यवस्था में चूक सामने आती है तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
अब जांच बताएगी चूक कहां हुई
एक तरफ पुलिस का कहना है कि आत्मदाह का प्रयास दबाव बनाने के लिए किया गया। दूसरी ओर परिजन पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। सच्चाई इन दोनों दावों के बीच क्या है, यह जांच से स्पष्ट होगा।