पूर्व कुलपति को केंद्र की बड़ी जिम्मेदारी,कोंकण रेलवे के संचालक मंडल में गैर-सरकारी निदेशक नियुक्त, तीन वर्ष या अगले आदेश तक रहेगा कार्यकाल

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शहडोल। पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति रहे प्रो. डॉ. मुकेश कुमार तिवारी को केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। रेल मंत्रालय के रेलवे बोर्ड ने 6 अक्टूबर को जारी आदेश के तहत उन्हें कोंकण रेलवे निगम लिमिटेड के संचालक मंडल में गैर-सरकारी निदेशक नियुक्त किया है। नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी। उनका कार्यकाल तीन वर्ष अथवा अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, निर्धारित किया गया है।
शहडोल के विश्वविद्यालय के रहे प्रथम कुलपति
डॉ. मुकेश कुमार तिवारी का शहडोल से विशेष जुड़ाव रहा है। वे पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अगस्त 2017 में उन्हें विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया था। उन्होंने 12 अगस्त 2017 को पदभार ग्रहण किया था। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति की ओर से उनकी नियुक्ति पांच वर्ष के लिए की गई थी।
शुरुआती दौर में संभाली विश्वविद्यालय की कमान
विश्वविद्यालय के गठन और शुरुआती संस्थागत विकास के महत्वपूर्ण दौर में डॉ. तिवारी ने करीब पांच वर्षों तक कुलपति के रूप में शैक्षणिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं। अगस्त 2022 में उनका निर्धारित कार्यकाल पूरा हुआ। उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, प्रशासनिक व्यवस्था और संस्थागत ढांचे को आकार देने का दौर रहा।
अब रेलवे के महत्वपूर्ण उपक्रम में भूमिका
रेल मंत्रालय के आदेश के बाद डॉ. तिवारी अब कोंकण रेलवे निगम लिमिटेड के संचालक मंडल का हिस्सा होंगे। गैर-सरकारी निदेशक के रूप में वे संचालक मंडल की बैठकों में भाग लेकर कंपनी से जुड़े महत्वपूर्ण नीतिगत, प्रशासनिक और व्यावसायिक मामलों में अपनी राय रख सकेंगे।
यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कोंकण रेलवे देश के महत्वपूर्ण रेल उपक्रमों में शामिल है और इसका संचालन तथा विकास कई राज्यों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में डॉ. तिवारी को रेल क्षेत्र से जुड़े निर्णयों और कंपनी के उच्चस्तरीय संचालन में योगदान देने का अवसर मिलेगा।
शिक्षा से राष्ट्रीय स्तर की नई भूमिका तक
डॉ. तिवारी की नई जिम्मेदारी को उनके सार्वजनिक एवं प्रशासनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति के रूप में शैक्षणिक प्रशासन की जिम्मेदारी संभालने के बाद अब उन्हें केंद्र सरकार के अधीन रेलवे से जुड़े महत्वपूर्ण उपक्रम के संचालक मंडल में स्थान मिला है।
शहडोल से जुड़े एक शिक्षाविद् को मिली इस राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी से क्षेत्र में भी उत्साह का माहौल है। विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति से लेकर कोंकण रेलवे के संचालक मंडल तक का यह सफर डॉ. तिवारी की सार्वजनिक भूमिका के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है।

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