कैमोर की गुलाबी तस्वीर के पीछे छिपा प्रदूषण का सवाल: एस्बेस्टस कचरा, बीमारियों का डर और प्रशासन की जवाबदेही…..नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पीड़ितों से की मुलाकात, दशकों पुराने औद्योगिक कचरे की निष्पक्ष जांच, स्वास्थ्य सर्वेक्षण और जिम्मेदारी तय करने की मांग पर उठे सवाल

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कैमोर की गुलाबी तस्वीर के पीछे छिपा प्रदूषण का सवाल: एस्बेस्टस कचरा, बीमारियों का डर और प्रशासन की जवाबदेही

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पीड़ितों से की मुलाकात, दशकों पुराने औद्योगिक कचरे की निष्पक्ष जांच, स्वास्थ्य सर्वेक्षण और जिम्मेदारी तय करने की मांग पर उठे सवाल

कैमोर की चमकती तस्वीर के पीछे आखिर कौन-सी हकीकत छिपी है? क्या दशकों पुराने एस्बेस्टस कचरे और औद्योगिक प्रदूषण की आशंकाओं के बीच यहां के लोगों का स्वास्थ्य खतरे में है? कैंसर और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों को लेकर स्थानीय लोगों की चिंताएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन इन बीमारियों के कारणों और आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अब भी बेहद जरूरी है। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार कैमोर पहुंचे और प्रभावित लोगों से मुलाकात की। अब सवाल यह है कि जनता की सेहत, पर्यावरण की सुरक्षा और जिम्मेदारों की जवाबदेही को लेकर सरकार कब ठोस कदम उठाएगी। क्योंकि शहर की खूबसूरती से ज्यादा जरूरी है उसमें रहने वाले लोगों की जिंदगी—और कैमोर की इस हकीकत को अब अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।

कटनी/कैमोर।। कैमोर की खूबसूरती के पीछे क्या छिपी है एक ऐसी हकीकत, जिसका खामियाजा आम जनता अपनी सेहत और जिंदगी से चुका रही है। दशकों पुराने एस्बेस्टस कचरे को लेकर उठ रहे सवालों ने औद्योगिक नगरी कैमोर के भविष्य, नागरिकों के स्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
कहते हैं कि देखने में तो तुम्हारा शहर गुलाबी नजर आता है, लेकिन हकीकत सारी किताबों में कैद है। कैमोर की मौजूदा स्थिति पर यह पंक्ति एक गंभीर सवाल खड़ा करती है। क्या विकास और उद्योगों की चमक के बीच आम नागरिकों की सेहत से जुड़े सवाल पीछे छूट गए हैं।
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार कैमोर पहुंचकर स्थानीय लोगों से मिले और एस्बेस्टस कचरे से जुड़े मुद्दों का जायजा लिया। इस दौरान दशकों से कथित रूप से पड़े औद्योगिक अपशिष्ट, स्थानीय लोगों की स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों और जिम्मेदार पक्षों की भूमिका को लेकर चिंता सामने आई।


कई टन कचरे का अनुमान, लेकिन वास्तविकता की पुष्टि जरूरी
कैमोर में ब्रिटिशकालीन एस्बेस्टस उद्योग की विरासत आज भी गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय बनी हुई है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और पूर्व पर्यावरणीय आकलनों में क्षेत्र में लगभग कई टन एस्बेस्टस-दूषित मिट्टी और कचरे का अनुमान सामने आया है। कुछ आकलनों में आवासीय इलाकों, खुले मैदानों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के आसपास संदूषण की आशंका भी व्यक्त की गई है। इतनी बड़ी मात्रा में संभावित प्रदूषित सामग्री का सवाल केवल औद्योगिक कचरे के निस्तारण का नहीं है। यह उन परिवारों की सुरक्षा का प्रश्न है, जो ऐसे क्षेत्रों के आसपास रहते हैं, जहां हवा, मिट्टी और पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह बना हुआ है। हालांकि, कचरे की वास्तविक मात्रा, उसमें मौजूद एस्बेस्टस की सांद्रता और वर्तमान में प्रभावित क्षेत्रों की सीमा की पुष्टि वैज्ञानिक जांच से होना आवश्यक है।

कैंसर और फेफड़ों की बीमारियों का डर: कितने लोग प्रभावित, सरकारी रिकॉर्ड कहां
स्थानीय स्तर पर कैंसर, सांस संबंधी परेशानियों और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को लेकर दावे किए जाते रहे हैं। कुछ रिपोर्टों और स्थानीय दावों में हजारों लोगों के बीमार होने तथा एक हजार से अधिक मौतों को एस्बेस्टस से जोड़ने की बात कही गई है। लेकिन इन आंकड़ों और मौतों के कारणों की स्वतंत्र तथा आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। यही इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू है। एस्बेस्टस के रेशों को सांस के माध्यम से अंदर लेना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। इसके संपर्क से एस्बेस्टोसिस, फेफड़ों का कैंसर और मेसोथेलियोमा जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इन बीमारियों के लक्षण लंबे समय बाद भी सामने आ सकते हैं। ऐसे में यदि कैमोर के नागरिक लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें कर रहे हैं, तो उनकी शिकायतों को केवल आरोप मानकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं होगा। जरूरत है कि प्रभावित और संभावित प्रभावित आबादी की व्यवस्थित स्वास्थ्य जांच कराई जाए, बीमारी के मामलों का रिकॉर्ड तैयार हो और विशेषज्ञों की मदद से संभावित पर्यावरणीय संपर्क का आकलन किया जाए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि कैमोर में कितने लोग एस्बेस्टस के संपर्क में आए, कितनों की जांच हुई और कितने मामलों में बीमारी तथा प्रदूषण के बीच संबंध की वैज्ञानिक पुष्टि हुई।

प्रशासन की कार्रवाई: जांच शुरू, अब नतीजों और जवाबदेही की परीक्षा
हालिया मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर राजस्व विभाग, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कैमोर नगर परिषद की संयुक्त टीम ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। भटिया मोहल्ले सहित कुछ स्थानों से मिट्टी और हैंडपंप के पानी के नमूने लिए जाने की भी खबर है। इन नमूनों की जांच के बाद क्षेत्र की पर्यावरणीय स्थिति के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकती है। यह कदम महत्वपूर्ण है, लेकिन जनता के लिए केवल नमूने लेना पर्याप्त नहीं है। जांच के परिणाम सार्वजनिक होना, प्रदूषण की वास्तविक सीमा निर्धारित होना और जरूरत पड़ने पर तत्काल सुरक्षा उपाय लागू होना भी उतना ही आवश्यक है।
प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि जांच किन-किन स्थानों पर की गई, क्या संभावित प्रभावित क्षेत्रों का पूरा सर्वेक्षण होगा, रिपोर्ट कब तक आएगी और रिपोर्ट में प्रदूषण मिलने पर आगे की कार्रवाई की समय-सीमा क्या होगी। साथ ही, कंपनी और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तथ्यों, पर्यावरणीय नियमों और लागू कानूनों के आधार पर तय की जानी चाहिए।

सरकार से सीधे सवाल: जनता को जवाब कब मिलेगा
कैमोर का मामला कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मांगता है:दशकों पुराने एस्बेस्टस कचरे की वास्तविक मात्रा और उसके फैलाव का वैज्ञानिक आकलन कब पूरा होगा। क्या कैमोर के आवासीय क्षेत्रों, स्कूलों, खेल मैदानों और सार्वजनिक स्थानों की व्यवस्थित जांच कराई जाएगी।क्या स्थानीय नागरिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर, फेफड़ों की जांच और दीर्घकालिक स्वास्थ्य निगरानी की व्यवस्था होगी।
क्या कैंसर तथा अन्य गंभीर बीमारियों के मामलों और मौतों का स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा अध्ययन कराया जाएगा।यदि जांच में प्रदूषण और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो कचरा हटाने, सुरक्षित निस्तारण और प्रभावित भूमि के पुनर्वास की जिम्मेदारी किसकी होगी।क्या प्रभावित परिवारों के लिए चिकित्सा सहायता, आर्थिक राहत और पात्रतानुसार मुआवजे की व्यवस्था की जाएगी।क्या सरकार जांच और कार्रवाई की समय-सीमा तय करके उसकी प्रगति जनता के सामने रखेगी। ये सवाल किसी राजनीतिक दल तक सीमित नहीं हैं। इनका संबंध हर उस नागरिक से है, जिसका जीवन स्वच्छ हवा, सुरक्षित पानी और स्वस्थ वातावरण पर निर्भर करता है।

उमंग सिंघार का दौरा और राजनीतिक जवाबदेही
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का कैमोर दौरा इस मुद्दे को राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श में सामने लाने का अवसर है। लेकिन इस मामले का वास्तविक समाधान किसी दौरे, बयान या आश्वासन तक सीमित नहीं रह सकता। विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब सरकार को तथ्यों और कार्रवाई के माध्यम से देना चाहिए। वहीं, प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्ष जांच कराए और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्राथमिकता दे।

कंपनी की जिम्मेदारी भी लागू पर्यावरणीय मानकों और कानूनों के अनुसार जांची जानी चाहिए। यदि किसी पक्ष की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो कानून के अनुसार जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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