पत्रकारों की पीड़ा पर कब जागेगा शासन, सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक संरक्षण के लिए श्रमजीवी पत्रकार परिषद ने उठाई आवाज मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर आशीष तिवारी को सौंपा 11 सूत्रीय मांग पत्र, पत्रकारों के लिए सुरक्षा कानून, स्वास्थ्य सुविधा, पेंशन और आर्थिक सहायता की मांग

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पत्रकारों की पीड़ा पर कब जागेगा शासन, सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक संरक्षण के लिए श्रमजीवी पत्रकार परिषद ने उठाई आवाज
मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर आशीष तिवारी को सौंपा 11 सूत्रीय मांग पत्र, पत्रकारों के लिए सुरक्षा कानून, स्वास्थ्य सुविधा, पेंशन और आर्थिक सहायता की मांग
कटनी।। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में समाज की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने वाले पत्रकार आज स्वयं अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं। जनहित की आवाज बुलंद करने वाले मीडियाकर्मियों के सामने सुरक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक संकट, रोजगार की अनिश्चितता और सामाजिक संरक्षण जैसे गंभीर सवाल खड़े हैं। विडंबना यह है कि दूसरों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने वाले पत्रकारों की अपनी पीड़ा सुनने और उसका स्थायी समाधान करने की व्यवस्था अब भी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है। इसी मुद्दे को केंद्र में रखते हुए राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद की कटनी जिला इकाई ने पत्रकारों के हितों की आवाज बुलंद की है। परिषद की जिला इकाई ने जिलाध्यक्ष गोपाल सिंघानिया के नेतृत्व में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम कलेक्टर आशीष तिवारी को 11 सूत्रीय मांग पत्र सौंपकर पत्रकारों की लंबित समस्याओं के निराकरण तथा उनके कल्याण के लिए ठोस नीतियां लागू करने की मांग की। परिषद का कहना है कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के साथ ग्रामीण एवं तहसील स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों को भी सुरक्षा, सम्मान और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।

खबरें जनता की, लेकिन पत्रकारों की समस्याएं कौन उठाएगा
पत्रकारिता केवल समाचार संकलन और प्रकाशन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों की समस्याओं, भ्रष्टाचार, जनसुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को सामने लाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके बावजूद अनेक पत्रकार सीमित संसाधनों, अस्थिर आय और सामाजिक सुरक्षा के अभाव में काम करने को मजबूर हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और तहसील स्तर के पत्रकारों के सामने आर्थिक चुनौतियां अधिक कठिन हो सकती हैं।
पत्रकारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि विपरीत परिस्थितियों में काम करते समय उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन सुनिश्चित करेगा, बीमारी अथवा दुर्घटना की स्थिति में उनके परिवार को आर्थिक सहारा कैसे मिलेगा, उम्र बढ़ने पर नियमित आय का साधन क्या होगा, और छोटे समाचार पत्रों तथा सीमित संसाधनों वाले मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकारों को संस्थागत संरक्षण कैसे प्राप्त होगा। इन सवालों का समाधान केवल आश्वासनों से नहीं, बल्कि स्पष्ट नियमों, निर्धारित बजट, जवाबदेह व्यवस्था और समयबद्ध क्रियान्वयन से ही संभव है।

पत्रकारों के हित में परिषद की 11 प्रमुख मांगें
1. अधिमान्यता के नियम सरल हों: ग्रामीण एवं तहसील स्तर के पत्रकारों को अधिमान्यता का अवसर दिया जाए। परिषद ने अनुभव की अनिवार्यता 20 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष करने की मांग उठाई है, ताकि पात्र पत्रकारों को योजनाओं का लाभ मिल सके।
2. पत्रकार श्रद्धा निधि और पेंशन का लाभ मिले: श्रद्धा निधि की पात्रता आयु 62 वर्ष से घटाकर 50 वर्ष करने तथा वरिष्ठ और आर्थिक रूप से कमजोर पत्रकारों के लिए सम्मानजनक पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।
3. पत्रकार सुरक्षा कानून लागू हो: पत्रकारों पर हमले, धमकी, दबाव और उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी पत्रकार सुरक्षा कानून बनाया जाए। शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और पीड़ित पत्रकारों को आवश्यक कानूनी सहायता सुनिश्चित की जाए।
4. आठ लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा: पत्रकारों और उनके आश्रित परिजनों के लिए कम से कम आठ लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि गंभीर बीमारी के समय आर्थिक संकट से राहत मिल सके।
5. दुर्घटना और असामयिक निधन पर सहायता: ड्यूटी के दौरान अथवा अन्य परिस्थितियों में गंभीर दुर्घटना या असामयिक निधन की स्थिति में पात्रता एवं स्पष्ट नियमों के तहत आश्रित परिवार को न्यूनतम 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
6. पत्रकार भवन और आवासीय कॉलोनियां: कटनी सहित जिला मुख्यालयों पर पत्रकार भवनों का निर्माण कराया जाए। पत्रकारों के लिए आवासीय कॉलोनियां विकसित करने की दिशा में भी ठोस पहल हो।
7. छोटे समाचार पत्रों के लिए पारदर्शी विज्ञापन नीति: छोटे और मध्यम समाचार पत्रों को विज्ञापन आवंटन में निष्पक्ष अवसर मिले। स्पष्ट मानदंड, पारदर्शी प्रक्रिया और शिकायतों के निवारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे सीमित संसाधनों वाले समाचार पत्रों का अस्तित्व सुरक्षित रह सके।
8. रियायती दरों पर बैंक ऋण: पत्रकारों और उनके परिवारों को आसान शर्तों तथा कम ब्याज दर पर बैंक ऋण उपलब्ध कराने के लिए संबंधित वित्तीय संस्थानों के साथ योजना तैयार की जाए।
9. रेल, बस और टोल में रियायत: मीडियाकर्मियों के लिए रेल एवं बस यात्रा में विशेष रियायत और टोल टैक्स में छूट देने की मांग की गई है, ताकि समाचार संकलन के दौरान होने वाले खर्च का बोझ कम हो सके।
10. जिला और संभाग स्तर पर शिकायत निवारण समितियां: पत्रकारों की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान कराने के लिए जिला एवं संभाग स्तर पर पत्रकार कल्याण तथा शिकायत निवारण समितियों का गठन हो। प्रशासनिक अधिकारियों और पत्रकार संगठनों के बीच नियमित बैठकें आयोजित की जाएं।
11. सभी माध्यमों के पत्रकारों के लिए समग्र कल्याण नीति: प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के साथ ग्रामीण पत्रकारों को भी शामिल करते हुए एकीकृत नीति बनाई जाए, जिसमें सुरक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण, सम्मान और सामाजिक संरक्षण के स्पष्ट प्रावधान हों।

कटनी के पत्रकारों की समस्याओं पर भी हो ठोस पहल
परिषद द्वारा उठाई गई मांगें केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पत्रकारों के पेशेवर सम्मान और सामाजिक सुरक्षा से भी जुड़ी हैं। जिले में कार्यरत पत्रकारों की समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर नियमित संवाद, शिकायतों की सुनवाई और प्रशासनिक सहयोग की व्यवस्था आवश्यक है। पत्रकार संगठनों और जिला प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित कर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी पत्रकार को अपनी जायज समस्या के समाधान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। पात्र पत्रकारों को उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी देने, आवेदन प्रक्रिया सरल बनाने और शिकायतों की प्रगति की निगरानी करने के लिए भी प्रभावी तंत्र विकसित किया जा सकता है।

अब मांग पत्र पर कार्रवाई का इंतजार
जिलाध्यक्ष गोपाल सिंघानिया ने कहा कि पत्रकार विषम परिस्थितियों में जनहित के मुद्दे उठाते हैं, लेकिन उनके स्वयं के जीवन में सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक संरक्षण से जुड़ी अनेक चुनौतियां बनी हुई हैं। संगठन चाहता है कि शासन पत्रकारों की समस्याओं पर संवेदनशीलता से विचार करे और मांगों के निराकरण के लिए ठोस निर्णय ले। ज्ञापन सौंपते समय उपाध्यक्ष संजीव श्रीवास्तव, कृपानंद तिवारी, सचिव मनीष सेकसरिया, संजय शर्मा, संगठन मंत्री प्रमोद खंपरिया, प्रवक्ता प्रकाश जैन, सह-प्रवक्ता अरविंद गुप्ता, समाज विकास प्रकोष्ठ के मयंक जैन, मनोज प्यासी, बाल्मिक पांडे, विजयराघवगढ़ तहसील अध्यक्ष अजय त्रिपाठी, राकेश चतुर्वेदी, सुनील रावत और नीरज अग्रवाल सहित अनेक मीडियाकर्मी उपस्थित रहे।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि पत्रकारों के हितों से जुड़ी इन मांगों पर शासन कब तक ठोस निर्णय लेगा। पत्रकारों को केवल सम्मान समारोहों में सम्मानित करना पर्याप्त नहीं है। उनके सुरक्षित भविष्य, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, आर्थिक स्थिरता और स्वतंत्रतापूर्वक काम करने के अधिकार के लिए प्रभावी व्यवस्था भी जरूरी है। अब कटनी के पत्रकारों को उम्मीद है कि उनका यह मांग पत्र सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उस पर समयबद्ध कार्रवाई होगी और पत्रकारों की वर्षों से चली आ रही समस्याओं के समाधान की दिशा में सार्थक पहल की जाएगी।

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