बवासीर के ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंचे युवक की मौत, डॉक्टर पर लापरवाही के गंभीर आरोप एनेस्थीसिया की कथित ओवरडोज से हालत बिगड़ने का परिजनों का दावा, कोतवाली में शिकायत; अस्पताल के सामने शव रखकर प्रदर्शन करने पर अड़े परिजन, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार

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बवासीर के ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंचे युवक की मौत, डॉक्टर पर लापरवाही के गंभीर आरोप
एनेस्थीसिया की कथित ओवरडोज से हालत बिगड़ने का परिजनों का दावा, कोतवाली में शिकायत; अस्पताल के सामने शव रखकर प्रदर्शन करने पर अड़े परिजन, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार
कटनी। शहर के सिविल लाइन स्थित एक निजी हॉस्पिटल में उपचार के दौरान एक युवक की मौत के बाद मामला गरमा गया है। बवासीर के ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंचे अल्फर्ट गंज निवासी अंशुल मिश्रा की मौत को लेकर परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सक पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि ऑपरेशन से पहले बेहोशी की दवा (एनेस्थीसिया) की कथित तौर पर अधिक डोज दिए जाने के बाद अंशुल की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश है। उन्होंने कोतवाली थाने में शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। आक्रोशित परिजन अस्पताल के सामने शव रखकर प्रदर्शन करने पर भी अड़े थे। फिलहाल शव जिला अस्पताल की मर्चुरी में रखवाया गया है और मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तथा चिकित्सकीय जांच के बाद ही चल सकेगा।
ऑपरेशन से पहले बिगड़ी हालत, एनेस्थीसिया की डोज पर उठे सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंशुल मिश्रा को मंगलवार शाम करीब सात बजे बवासीर की समस्या के उपचार के लिए गुरु कृपा हॉस्पिटल ले जाया गया था। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन से पहले एनेस्थीसिया देने के दौरान लापरवाही बरती गई। उनका दावा है कि बेहोशी की दवा की अधिक मात्रा दिए जाने के बाद अंशुल की हालत बिगड़ गई और बाद में उसकी मौत हो गई। इस घटनाक्रम के बाद परिजन यह सवाल उठा रहे हैं कि ऑपरेशन से पहले मरीज की स्थिति का आकलन किस तरह किया गया और एनेस्थीसिया देने के दौरान निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं। हालांकि, दवा की मात्रा और मौत के बीच संबंध की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इन सवालों का जवाब मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार के विवरण और विशेषज्ञ चिकित्सकीय जांच से ही सामने आ सकेगा।
संबंधित डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
मृतक के परिजनों ने संबंधित चिकित्सक और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि अंशुल उपचार और ऑपरेशन की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचा था, लेकिन उसकी मौत हो गई। परिवार इस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहा है। परिजनों की मांग है कि ऑपरेशन से पहले की गई जांच, एनेस्थीसिया की मात्रा, मरीज की निगरानी, उपचार के दौरान की गई चिकित्सकीय कार्रवाई और अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल डॉक्टर या अस्पताल प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
कोतवाली में शिकायत, एफआईआर दर्ज होने को लेकर भी सवाल
घटना के बाद परिजनों ने कोतवाली थाने में शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। इस संबंध में पुलिस की आधिकारिक स्थिति और शिकायत पर की गई कार्रवाई की पुष्टि होना बाकी है।
परिजनों का कहना है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की जानी चाहिए, ताकि मौत की वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकें। परिवार की मांग है कि शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और यदि चिकित्सकीय लापरवाही प्रमाणित होती है, तो दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाए।
अस्पताल के सामने शव रखकर प्रदर्शन करने पर अड़े थे परिजन
युवक की मौत के बाद परिजनों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। न्याय और कार्रवाई की मांग को लेकर परिजन अस्पताल के सामने शव रखकर धरना-प्रदर्शन करने पर अड़े थे। हालांकि, प्रशासन द्वारा समझाइस दिए जाने परिजनों द्वारा प्रदर्शन किए जाने की पुष्टि नहीं है। उनका कहना है कि मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। परिजनों का आक्रोश इस बात को लेकर है कि उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई। वे चाहते हैं कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हो और परिवार को न्याय मिले। फिलहाल उनकी प्रमुख मांग मौत के कारणों का खुलासा और कथित लापरवाही की जांच है।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मिलेगी अहम जानकारी
अंशुल मिश्रा के शव को जिला अस्पताल स्थित मर्चुरी में रखवाया गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मौत के संभावित कारणों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। वहीं, एनेस्थीसिया की कथित ओवरडोज या किसी अन्य चिकित्सकीय चूक की पुष्टि के लिए उपचार संबंधी दस्तावेजों और विशेषज्ञों की राय का परीक्षण भी आवश्यक होगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बवासीर के ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंचे अंशुल मिश्रा की मौत किन परिस्थितियों में हुई क्या उपचार के दौरान सभी निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन किया गया था? क्या एनेस्थीसिया देने और मरीज की निगरानी में कोई चूक हुई इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगा।
फिलहाल परिजन निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं। मामले में पुलिस की जांच, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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