बुढ़ार में खाकी पर गंभीर आरोप: अधिवक्ता को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, सिर फूटा, कान जख्मी; बचाने पहुंचे साथियों पर भी बरसीं लाठियां

शहडोल। कानून की किताबों में दर्ज अधिकार और वर्दी की जिम्मेदारी उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई, जब बुढ़ार में एक अधिवक्ता के साथ कथित पुलिसिया मारपीट का मामला सामने आया। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने अधिवक्ता को इस कदर पीटा कि उनका सिर फट गया, कान में चोट आई और शरीर पर जगह-जगह लाठियों के निशान उभर आए। इतना ही नहीं, जब उनके साथी उन्हें बचाने के लिए आगे आए तो कथित तौर पर उन्हें भी पुलिस की मार झेलनी पड़ी। घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, बुढ़ार थाना क्षेत्र की पुरानी बस्ती के समीप रहने वाले अधिवक्ता अभिनव पाठक अपने कुछ साथियों के साथ दुर्गा पंडाल में हिसाब-किताब का काम पूरा कर वापस लौट रहे थे। इसी दौरान उनका समूह बुढ़ार बस स्टैंड के पास पहुंचा। बताया जा रहा है कि अधिवक्ता अपने साथियों के साथ फोन पर बातचीत कर रहे थे, तभी पुलिस वाहन से पहुंचे बुढ़ार थाने के कुछ कर्मचारियों ने उन्हें रोक लिया।
आरोप है कि पूछताछ या बातचीत के दौरान शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। प्रत्यक्ष आरोपों के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने अधिवक्ता पर डंडे बरसाने शुरू कर दिए। हमले में उनके सिर से खून बहने लगा और कान भी जख्मी हो गया। शरीर पर दिखाई दे रहे लाल और काले निशान कथित मारपीट की गंभीरता को बयां कर रहे हैं। अधिवक्ता को पुलिसकर्मियों के चंगुल से बचाने पहुंचे उनके साथियों के साथ भी मारपीट किए जाने के आरोप हैं।
पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल, बचाव में क्या थी मजबूरी?
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस का पक्ष भी सामने आया है। आरोपों के दूसरे पक्ष के अनुसार, अधिवक्ता पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता कर रहे थे और उनके साथ झूमाझपटी की स्थिति बन गई थी। पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर इसी परिस्थिति में अपने बचाव में कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
हालांकि, सवाल यह है कि यदि मौके पर विवाद हुआ भी था तो क्या स्थिति को नियंत्रित करने का यही तरीका था? क्या किसी व्यक्ति के साथ इतनी गंभीर मारपीट आवश्यक थी? और यदि बीच-बचाव करने वाले लोग भी घायल हुए हैं तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
शिकायत मिलने पर होगी वैधानिक कार्रवाई
मामले में धनपुरी एसडीओपी का कहना है कि यह प्रकरण उनके संज्ञान में मीडिया के माध्यम से आया है। फिलहाल पुलिस के पास इस संबंध में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शिकायत मिलने पर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अधिवक्ता की ओर से औपचारिक शिकायत के बाद पुलिस प्रशासन क्या कदम उठाता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होती है या नहीं। वर्दी पर लगे आरोपों का सच सामने आना जरूरी है, क्योंकि कानून से ऊपर न तो कोई नागरिक है और न ही कानून की रक्षा करने वाली वर्दी।