छात्रों को अगरियानार में नही मिल रहा मीनू के अनुसार मध्यान्ह भोजन
अजय नामदेव-7610528622
बच्चो का निवाला छीन रहा अगरियानार विद्यालय के जिम्मेदार
अनूपपुर। शासकीय विद्यालयों में नियमित रूप से मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था होनी चाहिये, इसके शासन के द्वारा बकायदे मीनू निर्धारित की है कि विद्यालय में पढऩे वाले छात्रों को सही रूप से भोजन मिल सके लेकिन शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय अगरियानार में बीते कई दिनों से मीनू के अनुरूप मध्यान्ह भोजन नही मिल पा रहा है। स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की जिम्मेदारी समूहों को दी गई, लेकिन समूह द्वारा मध्यान्ह भोजन वितरण किये जाने में अपनी मनमानी की जा रही है।
अधिकारी भी नहीं करते हंै कार्रवाई
मध्यान्ह भोजन व्यवस्था पूरी तरह फैल हो गई है, नाम मात्र को चल रही योजना पर प्रशासनिक निगरानी नहीं होने से शिक्षक एवं ग्रामीण नेता के गठजोड से चलने वाले स्व सहायता समूह मीनू के अनुसार तो बहुत दूर पर्याप्त भोजन बच्चों को देने से परहेज कर रहे हैं। व्यवस्थाओं में किसी प्रकार का सुधार नहीं आया है। 95 प्रतिशत स्व सहायता समूह गांवों में प्रभावशील पार्टी के नेता व शिक्षक के गठजोड से चल रहे हैं। जिसके चलते शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में शासन की ओर से मिलने वाला मध्यान्ह भोजन मीनू के अनुसार वितरित नहीं किया जा रहा है।
स्वार्थ के चक्कर में भूखे बच्चे
काबली चना, मूंग दाल, राजमा गायब है, केवल पतली मसूर की दाल, नाम मात्र को टमाटर व हरी सब्जी, आलू, सब्जी पनीली देकर मध्यान्ह भोजन देने का नाम भर कर रहे हैं। कुछ स्कूलों में तो भोजन ऐसा मिलता है कि बच्चे खाना पसंद नहीं करते घर लाकर मवेशियों को डाल देते है। स्व सहायता समूह गुणवत्ता के नाम पर महंगाई बढऩे का बहाना करते हैं, जबकि बच्चों की संख्या नगण्य रहती है और बजट दर्ज सूची के अनुसार मिलता है। इसका सीधा-सीधा लाभ स्कूल प्रबंधन समिति अध्यक्ष, सचिव और उनके स्वयं के स्व सहायता समूह को मिल रहा है।
समय पर भोजन की जांच नहीं
शासन के निर्देश के अनुसार स्कूलों में दी जाने वाली मध्यान्ह भोजन की विभाग के द्वारा समय-समय पर जांच करवाना है, लेकिन जिले के स्कूल में जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। शिक्षा की गुणवत्ता बढाने के नाम पर सिर्फ दिखावा ही रह गया है, कई माहो से बच्चे भूखे स्कूल से घर जा रहे है, जिम्मेदार सिर्फ सुनकर ही अपने कार्यो को इतिश्री कर देते है।
बहाने अलग-अलग
जिम्मेदार विभाग और अधिकारी महज अपनी खानापूर्ति कर कार्यालयो में बैठे रहते है, कभी खाद्यान उठाव का बहाना तो कभी तकनीकी समस्या बताकर सारे अव्यवस्थाओं में पर्दा डाल देते है। जिस कारण आज विद्यालय में बच्चो को मीनू के अनुसार भोजन प्राप्त नही होता है और यह पहला मौका नही है जब ऐसा हुआ है, ऐसे कितने और विद्यालय है जहां योजनाओं का पलीता बखूबी लगाया जा रहा है।