सफाई कर्मचारी और वार्ड बॉय चला रहे जिला अस्पताल: GPM में 5 बड़े मामलों से खुली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल

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देखें मरीजों की जान से होता खिलवाड़ का वीडियो 👉

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: ‘हाल ए हलचल न्यूज’ की पड़ताल में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की एक और खौफनाक तस्वीर सामने आई है।

 

ताजा वीडियो सामने आने के बाद अब अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के पांच बेहद गंभीर मामले उजागर हो चुके हैं। इन मामलों ने यह साबित कर दिया है कि अस्पताल में मरीजों का इलाज भगवान भरोसे नहीं, बल्कि वार्ड बॉय और सफाई कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है।

 

वायरल वीडियो और जमीनी हकीकत के आधार पर सामने आए 5 प्रमुख मामले इस प्रकार हैं:

मामला 1: वार्ड बॉय लगा रहा गंभीर मरीज के सिर पर टांके

पहले मामले में एक गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के सिर पर एक वार्ड बॉय द्वारा टांके (Stitches) लगाए जा रहे हैं।

 

लापरवाही: इस गंभीर चिकित्सीय प्रक्रिया के दौरान मौके पर न तो कोई ड्यूटी डॉक्टर मौजूद है और न ही कोई प्रशिक्षित ड्रेसर। एक वार्ड बॉय के भरोसे घायल मरीज को छोड़ दिया गया है।

 

मामला 2: महिला मरीज को वार्ड बॉय द्वारा राइस ट्यूब (Ryle’s Tube) लगाना

दूसरे मामले में, वही या अन्य वार्ड बॉय एक महिला मरीज को राइस ट्यूब (Ryle’s Tube) लगाते हुए नजर आ रहा है।

नियमों की अनदेखी: राइस ट्यूब लगाना एक संवेदनशील प्रक्रिया है। डॉक्टर खुद काम करने के बजाय ऐसे संवेदनशील कार्य वार्ड बॉय से करवा रहे हैं, जिससे मरीज को आंतरिक चोट का गंभीर खतरा है।

 

मामला 3: वाटर कूलर में लगा ताला, प्यासे भटक रहे मरीज

तीसरा मामला मरीजों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं की कमी का है। अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों के लिए लगाए गए वाटर कूलर में ताला जड़ दिया गया है।

 

अमानवीयता: भीषण गर्मी में पानी जैसी मूलभूत जरूरत के लिए ताला लगा दिए जाने के कारण मरीज और उनके तीमारदार अस्पताल परिसर में प्यासे भटकने को मजबूर हैं।

 

मामला 4: कैजुअल्टी रूम में बंद पड़े एसी और पंखे, गर्मी से बेहाल मरीज

चौथे मामले ने आपातकालीन सुविधाओं की कलई खोल दी है। अस्पताल के सबसे महत्वपूर्ण कैजुअल्टी रूम (आपातकालीन कक्ष) में न तो एसी (AC) काम कर रहा है और न ही पंखे चल रहे हैं।

 

बदहाली: दर्द से तड़प रहे गंभीर मरीजों को इस भीषण उमस और गर्मी में बिना पंखे और एसी के पसीने से तर-बतर होकर इलाज कराना पड़ रहा है।

 

मामला 5: सफाई कर्मचारी ‘गुरुमूर्ति’ द्वारा बुजुर्ग मरीज को कैथेटर (Catheter) लगाना

पांचवें और सबसे ताजा वायरल वीडियो (जिसका विश्लेषण करने पर सच्चाई और भी भयावह नजर आती है) ने अस्पताल प्रबंधन के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक बुजुर्ग मरीज को कैथेटर (Urinary Catheter) लगाने जैसा बेहद संवेदनशील काम कोई डॉक्टर या नर्स नहीं, बल्कि अस्पताल का सफाई कर्मचारी ‘गुरुमूर्ति’ कर रहा है।

 

मरीज की जान से सीधा खिलवाड़: कैथेटर लगाना एक जटिल और संक्रमण-रहित (Sterile) चिकित्सकीय प्रक्रिया है जिसे केवल प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ द्वारा ही किया जाना चाहिए। एक सफाई कर्मचारी द्वारा यह कार्य किया जाना मरीज को गंभीर और जानलेवा संक्रमण (Infection) के खतरे में धकेलने के समान है। वीडियो में प्रक्रिया के दौरान कोई भी वरिष्ठ डॉक्टर निगरानी करता नजर नहीं आ रहा है।

 

प्रशासनिक कार्रवाई की दरकार

जिला अस्पताल में सफाई कर्मचारियों और वार्ड बॉय द्वारा ऑपरेशन थिएटर और वार्डों के काम करना, और मूलभूत सुविधाओं (पानी, पंखे) का न होना स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ा कलंक है।

 

अब देखना यह है कि इन 5 पुख्ता सबूतों के सामने आने के बाद जिला प्रशासन, कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) अस्पताल प्रबंधन और लापरवाह डॉक्टरों पर क्या संज्ञान लेते हैं। जनता की मांग है कि मरीजों की जान जोखिम में डालने वाले इन कर्मचारियों और उन्हें आदेशित करने वाले डॉक्टरों पर तत्काल और सख्त कार्रवाई हो।

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