आरोप: संजय देवनाथ ने धोखाधड़ी कर ठगे 7 लाख

पुलिस महानिरीक्षक तक पहुंची शिकायत

(Amit Dubey-8818814739)
शहडोल। हर नौकरी पेशा व्यक्ति का एक सपना होता है कि वह अपनी जमा पूंजी और मेहनत से कमाई हुई दौलत से एक आशियाना बनाये, ताकि नौकरी के बाद और अपने परिवार को सुनहरा भविष्य दे सके, संभाग बनने के बाद और फिर एक-एक करके शैक्षणिक संस्थानों की सौगात मिलने के बाद जमीन के भाव मुख्यालय में आसमान छू रहे हैं, वहीं शासन के मापदण्डों को पूरा न करते हुए कई रियल एस्टेट कंपनियों ने भी शहडोल को अपना ठिकाना बनाया है, लोगों को सावधान रहने की जरूरत है, की कहीं वह जिस दलाल के माध्यम से अपनी गाढ़ी कमाई रियल एस्टेट बाजार में लगा रहे हैं, उसमें कोई लफड़ा तो नहीं है। संभाग बनने के बाद से ही जमीनों के फर्जीवाड़ों के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। राजस्व अमले के निचले स्तर के कर्मचारियों का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है, डीजीआर रियल एस्टेट कंपनी ने गोरतरा में पहले लोगों को जमीन बेच दी, लेकिन अभी तक उन्हें उसका न तो कब्जा मिल पाया और न ही मालिकाना हक मिला है, पूंजी जरूर उनसे कई साल पहले ली जा चुकी है, कंपनी के कारिंदों ने डीजीआर पार्ट-टू की नई लूट की दुकान गीतांजलि डेवलपर्स के नाम से खोलकर फिर से उसी जमीन को बेचने की तैयारी में जुटी है।
लोन लेकर दिया चेक
धनपुरी के बंगवार कालोनी निवासी रघुवीर अहिरवार पिता बिहारी लाल अहिरवार ने पुलिस महानिरीक्षक को शिकायत देते हुए कहा कि संजय देवनाथ पुत्र स्व. सुनील नाथ द्वारा मुख्यालय से सटे ग्राम गोरतरा में एक बड़ी जमीन खरीदी है, तथा कहा गया कि आप उस जमीन में 2500 वर्गफिट जमीन क्रय कर लीजिये, क्योंकि मेरा भरोसा संजय देवनाथ पर था, जिस पर मैं उसके विश्वास में आकर 05 जनवरी 2015 को एसबीआई धनपुरी से फिक्स डिपाजिट से लोन लेकर चेक क्रमांक 750986 राशि 7 लाख रूपये संजय देवनाथ को पैसा भरकर दिया, जिस पर मेरे द्वारा नाम नहीं लिखा था।
जमीन नहीं दे पायेंगे
शिकायतकर्ता ने बताया कि जमीन की रजिस्ट्री की बात लगातार 2 वर्षाे तक की गई, उसके द्वारा कहा जाता रहा कि जमीन के पेपर पूरे हो जाने दीजिए मैं आपकी रजिस्ट्री करवा दूंगा। चूंकि उनके मेरे पारिवारिक संबंध है, इसलिए मैं उनकी बातों पर लगातार विश्वास करता चला गया। संजय देवनाथ ने मार्च 2017 में मेरे घर आये और कहा कि जमीन आपको नहीं दे पाएंगे, क्योंकि वहां मैं अब कालोनी डेवलप कर रहा हंू, जिसकी अनुमति मुझे मिल गई है, आप मकान ले लीजिये तथा आपको मकान 28 लाख में फोर बीएचके दे दूंगा। मैंने 19 नंबर प्लाट को मजबूरी में पसंद भी कर लिया, चूंकि मेरा पैसा 2 वर्षाे से अधिक समय से इनके पास जमा था, मैंने मकान लेने की हामी मजबूरी में भरी। किन्तु 1 महीने बाद जब मैं शहडोल आकर इनसे मिला तो इनके द्वारा मकान 28 लाख की जगह 35 लाख में देने को कहा। तब मैंने मना कर दिया कि मुझे मकान नहीं चाहिए, आप मेरा पैसा वापस करो और जो भी मेरा नुकसान हुआ है, आप दीजिये। इन्होंने मुझसे 30 जून 2017 तक समय मांगा, मैनें इनको समय दे दिया।
पैसा बार-बार मत बोलो
30 जून गुजरने के बाद मैंने संजय देवनाथ से फोन पर बात किया, तो उन्होंने बताया कि सरकार ने रेरा लागू कर दिया है, मैं उसमें परेशान हंू, आपको और इंतजार करना पड़ेगा। शिकायतकर्ता ने बताया कि मुझे पैसों की जरूरत थी, इस कारण मैंने बजाज फाइनेंस से लगभग 7 लाख रूपये का लोन लिया, लेकिन मेरे खाते में लगभग 6 लाख 77 हजार रूपये आये और लगभग 54 हजार रूपये बीमा एवं प्रोसेसिंग के रूप में काट लिये, लेकिन संजय देवनाथ कोई न कोई बहाना बनाकर हर महीने पैसा देने की तारीख बढ़ाते रहे। बजाज फाइनेंस को 9760 रूपये हर महीने ब्याज लगने लगा, ब्याज ज्यादा होने से मैं बहुत परेशान था और मैंने संजय देवनाथ को हर महीने में पैसा देने को बोला तो उसने साफ इनकार कर दिया तथा मुझे बोला मेरे पास जब पैसा होगा तब दूंगा। आप पैसा के लिए बार-बार मत बोलो।
क्या है डीजीआर और गीतांजलि का रहस्य
डीजीआर में लाखों रूपये का इनवेस्टमेंट कर चुके संजय गुप्ता, अंकित गुप्ता और पूर्णिमा तिवारी के अलावा न जाने ऐसे कितने लोग हैं, जिनका पैसा भी ले लिया गया, लेकिन उन्हें कब्जा और मालिकाना हक नहीं दिया गया, अचरज की बात है कि शासकीय कार्यवाहियां पूरी कराने में राजस्व अमले ने शासन को मिलने वाले शुल्क के साथ-साथ अपना नजराना भी लिया, इसमें पटवारी से लेकर आरआई, नायब तहसीलदार, तहसीलदार और अनुविभाग स्तर के अधिकारी, फिर उसके बाद कलेक्ट्रेट में रजिस्ट्री के लिए अनुमति प्रदान करने वाले अधिकारी तक की कार्यप्रणाली संदेह के दायरे में हैं, इसके साथ ही रजिस्ट्रार कार्यालय में पदस्थ अधिकारी और कर्मचारी की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है, जिस भूमि को डीजीआर अपना बताकर बेंच चुकी है, बाद में उसी भूमि को दिखाकर गीतांजलि डेवलपर्स ने शासकीय अनुमतियां कैसे प्राप्त कर ली, यह भी कटघरे में नजर आ रहा है।
हो सख्त कार्यवाही
शहर से बुढ़ार मार्ग पर ग्राम गोरतरा में महज कुछ ही दूरी पर प्राईम लोकेशन पर गीतांजलि डेवलपर्स के द्वारा डीजीआर ने जिस भूमि को बेच दिया था और शेष भूमि को नये तरीके और ग्राहकों को डुपलैक्स के अलावा अन्य सपने दिखाकर भू-खण्ड बेचे जाने की तैयारी है, डीजीआर में जो कारिंदे थे, वह गीतांजलि में भी हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि कंपनी का नाम बदल गया है। शिकायतकर्ता रघुवीर अहिरवार ने पुलिस महानिरीक्षक को दी गई शिकायत में मांग की है कि संजय देवनाथ द्वारा मुझे लगातार प्रताडि़त किया गया, साथ ही मेरे साथ धोखाधड़ी की गई, उक्त मामले में आरोपी के विरूद्ध सख्त कार्यवाही करते हुए मुझे न्याय दिलाया जाये।
इनका कहना है…
शिकायत पिछले महीने हुई थी, जिसने शिकायत की है, उसकी शिकायत निराधार है।
संजय देवनाथ
डायरेक्टर
गीतांजलि डेवलपर्स
गोरतरा, शहडोल

You may have missed