डी डी अस्पताल के खिलाफ लीलावती के मौत की शिकायत दर्ज कराई गई अस्पताल की घोर लापरवाही से प्रसूता की मौत, इलाज के नाम पर वसूले 1.5 लाख रुपये, इंस्पेक्टर ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (जीपीएम):
छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में एक और डी डी अस्पताल की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। सेमरा स्थित ‘डी.डी. हॉस्पिटल’ के खिलाफ एक मृतका के पति ने गौरेला थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत में अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही से पत्नी की जान लेने और इलाज के नाम पर 1,50,000 रुपये ऐंठने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में पुलिस ने जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
घटना का विस्तृत विवरण:
मजबूरी में निजी अस्पताल में कराया था भर्ती: ग्राम जिल्दा (तहसील सकोला) निवासी आवेदक आनंद सिंह (35 वर्ष) ने अपनी शिकायत में बताया कि उनकी 35 वर्षीय पत्नी लीलावती को डिलीवरी के लिए पहले जिला अस्पताल जीपीएम ले जाया गया था, जहां से उन्हें बिलासपुर रेफर कर दिया गया। साधन के अभाव और तेज प्रसव पीड़ा के कारण आनंद ने 5 जून 2026 की रात 12:00 बजे पत्नी को सेमरा के डी.डी. हॉस्पिटल में भर्ती कराया।
ऑपरेशन के बाद बिगड़ी तबीयत: अस्पताल में ऑपरेशन के जरिए पुत्र का जन्म हुआ। सुबह 10 बजे से प्रसूता को झटके आने लगे और पूरे शरीर व पेट में सूजन आ गई। वह दो दिन तक बेहोश रही।
पैसों की अवैध वसूली: पीड़ित पति का आरोप है कि डी.डी. हॉस्पिटल के संचालक अखिलेश तिवारी ने इलाज के नाम पर पहले 1,00,000 रुपये की मांग की, जिसे उन्होंने अदा कर दिया। तबीयत और बिगड़ने पर 60,000 रुपये की और मांग की गई, जिसमें से 50,000 रुपये का भुगतान आनंद ने किया।
जबरन हस्ताक्षर और मौत: 16 जून 2026 तक अस्पताल में भर्ती रखने के बाद भी जब तबीयत में सुधार नहीं हुआ, तो अस्पताल ने मरीज को कहीं और ले जाने को कह दिया। आनंद के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए उनसे एक कागज पर यह हस्ताक्षर भी करवा लिए कि वह अपनी पत्नी को अपनी मर्जी से घर ले जा रहे हैं। दो दिन घर पर रखने के बाद तबीयत ज्यादा खराब होने पर 19 जून 2026 को उन्हें जिला अस्पताल जीपीएम में भर्ती कराया गया, जहां उसी दिन दोपहर 3:00 बजे लीलावती की मृत्यु हो गई।
कागजात और रसीद नहीं दिए गए: शिकायत में यह भी बताया गया है कि डी.डी. हॉस्पिटल ने न तो डिस्चार्ज के कागजात दिए और न ही इलाज व दवाइयों की कोई जानकारी दी। भुगतान किए गए 1.5 लाख रुपयों की कोई पक्की रसीद भी नहीं दी गई, उल्टे बकाया 10,000 रुपये 4 दिन के अंदर जमा करने का दबाव बनाया गया।
पुलिस का आश्वासन:
पति आनंद सिंह द्वारा गौरेला थाने में दी गई इस लिखित शिकायत पर इंस्पेक्टर सनीप रात्रे ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने पीड़ित को आश्वस्त किया है कि इस शिकायत पर गंभीरता से जांच की जाएगी और अस्पताल की लापरवाही या अवैध वसूली की बात सामने आने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।