मरवाही थाने के पास कबाड़ का साम्राज्य; पुलिस मौन, सूत्र बताते हैं आयशा उर्फ ‘शमा’ नामक महिला का है यह कारोबार

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मरवाही, गौरेला पेंड्रा मरवाही (GPM): जिले में कानून व्यवस्था का पालन कराने वाले मरवाही थाने के ठीक पास ही कबाड़ का एक बड़ा कारोबार फल-फूल रहा है। सिस्टम की आंखों में धूल झोंककर या फिर शायद उनकी मौन स्वीकृति से संचालित यह कबाड़ का अड्डा कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

 

थाने के पास लगा कबाड़ का अंबार

उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि मरवाही थाना परिसर के बिल्कुल पास कबाड़ का एक विशाल ढेर लगा हुआ है। एक बड़े पेड़ के नीचे प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट पदार्थों का भारी जमावड़ा है।

 

इसमें बड़ी संख्या में नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम, औद्योगिक कंटेनर, और विभिन्न रंगों (लाल, हरे, काले) की टूटी-फूटी प्लास्टिक की कुर्सियाँ शामिल हैं। कबाड़ इतना ज़्यादा है कि यह आस-पास के पेड़ों और झाड़ियों के बीच तक बेतरतीब ढंग से फैल गया है।

 

सूत्रों के अनुसार ‘शमा’ है संचालिका

स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस कबाड़ दुकान का संचालन ‘शमा’ नाम की एक महिला करती है। यह बात और भी हैरान करने वाली है कि एक पुलिस स्टेशन के इतने करीब, बिना किसी रोक-टोक के इतने बड़े पैमाने पर कबाड़ का कारोबार कैसे चल रहा है।

 

उठते गंभीर सवाल:

थाने के इतने पास इस तरह की गतिविधि पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े करती है:

क्या पुलिस अनजान है? क्या मरवाही पुलिस इस बात से पूरी तरह बेखबर है कि उनके थाने के ठीक पास क्या हो रहा है?

 

कार्रवाई क्यों नहीं? अगर उन्हें जानकारी है, तो उन्होंने अब तक इस पर कोई कदम क्यों नहीं उठाया? क्या यह केवल लापरवाही है या फिर कारोबारियों को किसी का संरक्षण प्राप्त है?

 

सुरक्षा को खतरा: इतनी भारी मात्रा में जमा प्लास्टिक और अन्य कबाड़ से आग लगने या अन्य सुरक्षा जोखिमों की आशंका बनी रहती है, जो आस-पास के क्षेत्रों और थाने के लिए भी खतरा हो सकता है।

 

अवैध सामग्री का अंदेशा: क्या इस कबाड़ अड्डे का उपयोग अवैध या चोरी की गई वस्तुओं को खपाने के लिए तो नहीं किया जा रहा है?

 

पुलिस स्टेशन के इतने करीब होने के बावजूद इसकी जांच न होना संदेह को और पुख्ता करता है।

 

यह स्थिति “चिराग तले अंधेरा” वाली कहावत को सच साबित कर रही है। एक तरफ पुलिस अपराध मुक्त समाज का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ उनके थाने के पास ही नियमों को ताक पर रखकर ऐसी गतिविधियां चल रही हैं। आम जनता को उम्मीद है कि जिले के उच्च पुलिस अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेंगे और निष्पक्ष जाँच कर उचित कार्रवाई करेंगे।

*कबाड़ व्यवसाय के लिए वैधानिक नियम क्या कहते हैं?*- गुमाश्ता लाइसेंस (Shop Establishment License): क्या उनके पास नगर पंचायत/नगर पालिक निगम का वैध व्यावसायिक लाइसेंस है?

पर्यावरण NOC (छ.ग. पर्यावरण संरक्षण मंडल): कबाड़ का काम प्रदूषण फैलाने की श्रेणी में आता है। क्या उनके पास इसकी एनओसी है?

चौकी/थाना सूचना: क्या उन्होंने स्थानीय थाने में कबाड़ दुकान संचालन का लिखित ब्योरा दिया है?स्टॉक रजिस्टर: माल किसने बेचा, उसका नाम, मोबाइल नंबर और आधार कार्ड की कॉपी।

CCTV कैमरा: दुकान के एंट्री और एग्जिट पर चालू कैमरा

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