सक्रिय अंतर्राज्यीय बैंक-टारगेटिंग गैंग का पर्दाफाश तीन राज्यों के 15 से अधिक जिलों में 26 वारदातों को अंजाम देने वाले कथित मास्टरमाइंड गिरफ्तार; 40 लाख रुपये से अधिक की चोरी स्वीकार, 50 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज 

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सक्रिय अंतर्राज्यीय बैंक-टारगेटिंग गैंग का पर्दाफाश
तीन राज्यों के 15 से अधिक जिलों में 26 वारदातों को अंजाम देने वाले कथित मास्टरमाइंड गिरफ्तार; 40 लाख रुपये से अधिक की चोरी स्वीकार, 50 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज 

बैंकों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के बाहर ग्राहकों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखकर चंद सेकंड में लाखों रुपये से भरे बैग, कारों और दोपहिया वाहनों की डिग्गियों से नकदी उड़ाने वाले एक कथित अंतर्राज्यीय संगठित गिरोह का मध्य प्रदेश की कटनी पुलिस ने भंडाफोड़ करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार तीन राज्यों—मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा—के 15 से अधिक जिलों में सक्रिय इस गिरोह के दो कथित मास्टरमाइंड गिरफ्तार किए गए हैं। जांच में सामने आया कि गिरोह बैंक के भीतर ग्राहक बनकर बड़ी नकदी निकालने वालों की रेकी करता था और बाहर पहले से तैनात साथी उनका पीछा कर वारदात को अंजाम देते थे। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने 26 वारदातों में 40 लाख रुपये से अधिक की चोरी स्वीकार की है। पूरे नेटवर्क की परतें उमरियापान में हुई एक वारदात की जांच के दौरान खुलीं।

कटनी।। बैंक ग्राहकों और व्यापारियों को निशाना बनाकर योजनाबद्ध तरीके से चोरी और झपटमारी करने वाले एक कथित अंतर्राज्यीय अपराध गिरोह का कटनी पुलिस ने भंडाफोड़ करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के 15 से अधिक जिलों में सक्रिय था तथा बैंकों के भीतर और बाहर रेकी कर चंद सेकंड में लाखों रुपये से भरे बैग, कारों और दोपहिया वाहनों की डिग्गियों से नकदी उड़ाने की वारदातों को अंजाम देता था। पुलिस की विशेष संयुक्त टीम ने गिरोह के दो कथित मास्टरमाइंड सुमित सिसोदिया उर्फ “बंदर” (30) और संजय सिसोदिया (38) को गिरफ्तार किया है। दोनों मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के ग्राम भोलगढ़ के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने तीन राज्यों में 26 वारदातों में अपनी संलिप्तता स्वीकार करते हुए 40 लाख रुपये से अधिक की चोरी करना कबूल किया है।
पूरे मामले की शुरुआत 19 मई 2026 को कटनी जिले के थाना उमरियापान क्षेत्र में हुई एक वारदात से हुई। जिला सहकारी बैंक उमरियापान से सेल्समैन रघुवीर सिंह बागरी ने नकद राशि निकालने के बाद अपना बैग वाहन में रखा था। कुछ ही मिनटों में अज्ञात बदमाश बैग लेकर फरार हो गए। बैग में 50 हजार रुपये नकद के साथ महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज भी थे।
घटना के बाद थाना उमरियापान में अपराध क्रमांक 162/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में जांच शुरू की गई। शुरुआत में यह सामान्य चोरी प्रतीत हो रही थी, लेकिन जब पुलिस ने बैंक और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले तो एक बेहद संगठित गिरोह के सक्रिय होने के संकेत मिले।
एसपी ने गठित की विशेष जांच टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर बहुस्तरीय विशेष टीम गठित की गई। इसमें—
थाना माधवनगर प्रभारी संजय दुबे,थाना उमरियापान प्रभारी महेंद्र जायसवाल,थाना एनकेजे प्रभारी रूपेंद्र राजपूत,थाना रंगनाथ प्रभारी अरुणपाल,साइबर सेल
,सीसीटीवी विश्लेषण टीम को शामिल किया गया।
टीम ने बैंक परिसर, बाजार, हाईवे तथा आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले। तकनीकी विश्लेषण, मोबाइल लोकेशन और लगातार निगरानी के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरोह का तरीका बेहद पेशेवर
जांच के दौरान सामने आया कि यह गिरोह किसी सामान्य चोरी की तरह काम नहीं करता था, बल्कि पूरी वारदात पूर्व नियोजित होती थी। गिरोह का एक सदस्य बैंक के अंदर ग्राहक बनकर बैठ जाता था। वह यह देखता था कि कौन व्यक्ति बड़ी रकम निकाल रहा है।
बैंक के बाहर अन्य सदस्य मोटरसाइकिल स्टार्ट कर पहले से खड़े रहते थे। जैसे ही ग्राहक बैंक से निकलता, गिरोह उसका पीछा शुरू कर देता।,यदि व्यक्ति वाहन में नकदी रखकर किसी दुकान या कार्यालय में गया, तो कुछ ही सेकंड में स्कूटी की डिग्गी तोड़ दी जाती,
कार का शीशा तोड़ दिया जाता अथवा बैग झपटकर आरोपी फरार हो जाते। पूरी वारदात इतनी तेजी से होती थी कि अधिकांश मामलों में पीड़ित को घटना का पता कई मिनट बाद चलता था।
तीन राज्यों में फैला अपराध नेटवर्क
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों ने अपने अन्य साथियों
पिंटू यादव (कटिहार, बिहार)
पुष्पेंद्र यादव (कटिहार, बिहार)
मखाड़ उर्फ लखन (अनूपपुर, मध्य प्रदेश)
के साथ मिलकर कई राज्यों में वारदातों को अंजाम दिया।
आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने—
उमरियापान – ₹50,000
बड़वारा – ₹2.50 लाख
स्लीमनाबाद – ₹80,000
सतना – ₹3 लाख
नरसिंहपुर (गोटेगांव) – ₹6.45 लाख
डिंडोरी – ₹1.50 लाख
उमरिया – ₹1.55 लाख
देवास – ₹6 लाख
शहडोल – ₹4 लाख
के अतिरिक्त जबलपुर, पन्ना, खंडवा, होशंगाबाद, इटारसी सहित अन्य जिलों में भी लाखों रुपये की चोरी की।
छत्तीसगढ़
मनेंद्रगढ़ – ₹4.47 लाख
जशपुर – ₹3.40 लाख
कटघोरा (कोरबा) – दो घटनाओं में ₹4 लाख
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही – ₹20 हजार
ओडिशा
संभलपुर में लगातार दो दिनों में
₹70 हजार
₹40 हजार
की चोरी करना स्वीकार किया।
50 से अधिक आपराधिक प्रकरण दर्ज
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार गिरफ्तार आरोपी संजय सिसोदिया वर्ष 2016 के सतना जिले के एक मामले में लंबे समय से फरार था। दोनों आरोपियों के विरुद्ध मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों के विभिन्न थानों में 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि इनके विरुद्ध कई स्थायी वारंट भी लंबित हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की शेष नकदी
वारदात में प्रयुक्त काले रंग की यूनिकॉर्न मोटरसाइकिल
बरामद की है। बरामद संपत्ति का कुल मूल्य लगभग ₹72 हजार बताया गया है। पुलिस फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। फरार आरोपी पिंटू यादव, पुष्पेंद्र यादव तथा मखाड़ उर्फ लखन की तलाश में संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। साथ ही मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और अन्य राज्यों की पुलिस से संपर्क कर वारदातों का मिलान किया जा रहा है। इस पूरे ऑपरेशन में पारंपरिक पुलिसिंग के साथ— डिजिटल सर्विलांस,सीसीटीवी विश्लेषण,साइबर ट्रैकिंग,तकनीकी साक्ष्यों,अंतर्राज्यीय समन्वय
का प्रभावी उपयोग किया गया। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर पुलिस कथित मास्टरमाइंड तक पहुंचने में सफल रही।
कटनी पुलिस का मानना है कि इस कार्रवाई से केवल एक संगठित गिरोह का खुलासा ही नहीं हुआ, बल्कि अंतर्राज्यीय स्तर पर संचालित संपत्ति अपराधों के एक बड़े नेटवर्क की कार्यप्रणाली भी सामने आई है। पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है तथा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और अन्य राज्यों की पुलिस एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर वारदातों का मिलान कर रही है। वहीं सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक से बड़ी नकदी निकालने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि ऐसे गिरोह पहले रेकी करते हैं और फिर कुछ ही सेकंड में वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं। हालांकि, गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए सभी आरोप पुलिस की जांच और उसके दावों पर आधारित हैं तथा उनका अंतिम सत्यापन न्यायालय में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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