मुसियारी स्कूल में कक्षा 3 की बच्ची से कथित मारपीट, कान पकड़कर उठाने का आरोप

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पालक ने लगाए गंभीर आरोप; मामला जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर बाल संरक्षण आयोग तक पहुंचा | कोटा ब्लॉक में ऐसी घटनाओं को लेकर उठे सवाल*

 

बिलासपुर/कोटा। कोटा विकासखंड के वनांचल क्षेत्र स्थित शासकीय प्राथमिक शाला मुसियारी में कक्षा 3 की एक नाबालिग छात्रा के साथ शिक्षक द्वारा कथित मारपीट और शारीरिक दंड दिए जाने का मामला सामने आया है। बालिका की पहचान गोपनीय रखते हुए उसका नाम समाचार में प्रकाशित नहीं किया जा रहा है।

 

बच्ची के पालक ने पत्रकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को दी जानकारी में शिक्षक गोपाल सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पालक का कहना है कि शिक्षक द्वारा बच्ची को पहले भी मारपीट कर सजा दी गई है और अब दोबारा शारीरिक दंड दिया गया।

 

*कान पकड़कर ऊपर उठाने का आरोप, चोट और खून निकलने की बात*

पालक के अनुसार, हाल ही में शिक्षक ने बच्ची का कान पकड़कर जोर से ऊपर उठाया और ऐंठा, जिससे उसके कान में चोट आई और खून निकल आया। घटना के बाद बच्ची के कान की तस्वीरें भी सामने आई हैं।

 

पालक का आरोप है कि शिक्षक कभी हाथ तो कभी पैर में मारते हैं। परिवार का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है।

 

*“पिछले साल भी पीटा था, विरोध किया तो मांगी थी माफी”*

पालक ने बताया कि बीते वर्ष भी बच्ची के साथ शिक्षक द्वारा मारपीट की गई थी। उस समय परिवार ने शिक्षक के व्यवहार का विरोध किया था। पालक के मुताबिक, विरोध के बाद शिक्षक ने माफी मांगी थी।

अब दोबारा कथित मारपीट की घटना सामने आने के बाद परिवार ने मामले को गंभीरता से उठाया है।

 

*शिक्षक से पूछा गया तो बोले—“पढ़ाई में पीछे रहती है, इसलिए सजा दी”*

 

मामले की जानकारी मिलने के बाद शिक्षक से बातचीत की गई। शिक्षक ने बच्ची को सजा देने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि बच्ची पढ़ने-लिखने में पीछे रहती है, इसलिए उसे सजा दी गई।

 

यही बयान अब पूरे मामले में महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है कि क्या किसी बच्चे के पढ़ाई में कमजोर होने पर उसे शारीरिक दंड दिया जा सकता है?

 

*जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर बाल संरक्षण आयोग तक शिकायत*

 

मामले को लेकर पालक की शिकायत और उपलब्ध जानकारी के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी, बिलासपुर को आवेदन दिया गया है। साथ ही मामले की जानकारी छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग तक भी पहुंचाई गई है।

 

शिकायत में बच्ची की सुरक्षा, घटना की निष्पक्ष जांच और आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

 

*कोटा ब्लॉक में बच्चों की पिटाई की यह दूसरी घटना होने का दावा*

*यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि शिकायतकर्ता के अनुसार, कोटा ब्लॉक में बच्चों के साथ कथित मारपीट का यह दूसरा मामला है।*

इससे पहले कोटा ब्लॉक के ही एक निजी स्कूल में राज्यगीत नहीं गाने को लेकर एक बच्चे की कथित रूप से पिटाई किए जाने का मामला सामने आया था। उस मामले की शिकायत भी जिला शिक्षा अधिकारी, बिलासपुर से की गई थी।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि उस मामले में भी अपेक्षित कार्रवाई के बजाय औपचारिकता पूरी कर प्रकरण बंद कर दिया गया।

 

*अब मुसियारी स्कूल की घटना सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है—*

 

> क्या इस बार भी बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले को केवल जांच की औपचारिकता पूरी कर बंद कर दिया जाएगा, या वास्तव में जिम्मेदारी तय होगी?

 

 

 

*स्कूल के आसपास नशे के सामान की बिक्री का भी आरोप*

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर एक और गंभीर चिंता सामने आई है। पालक एवं शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि स्कूल परिसर के आसपास स्थित कुछ दुकानों और घरों में अवैध शराब, गुटखा पाउच एवं अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री खुले तौर पर होने की शिकायतें पहले भी की गई हैं।

 

आरोप है कि इस संबंध में कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

 

हालांकि, अवैध शराब अथवा अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन शिकायतों की संबंधित प्रशासन एवं पुलिस विभाग द्वारा जांच किया जाना आवश्यक है।

 

*स्कूल में एक महिला शिक्षक भी है पदस्थ-जानकारी के बाद चुप्पी क्यों?*

इस जंगल के स्कूल में एक महिला शिक्षिका भी पदस्थ है-उन्होंने इस घटना को क्यों नही रोका और इसकी शिकायत क्यों नही किया। क्या बच्चों के साथ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना में एक दूसरे का साथ देते हैं।??

 

 

*बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल*

स्कूल बच्चों के लिए सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने की जगह है। ऐसे में यदि किसी बच्चे के साथ शारीरिक दंड दिए जाने से चोट लगने की शिकायत सामने आती है, तो मामले की निष्पक्ष जांच और बच्चे की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

 

मुसियारी की घटना में अब नजर शिक्षा विभाग और बाल संरक्षण आयोग की कार्रवाई पर है।

 

क्या मामले की निष्पक्ष जांच होगी?

क्या पूर्व की शिकायतों की भी समीक्षा होगी?

और सबसे महत्वपूर्ण—क्या दोष सिद्ध होने पर जिम्मेदारी तय होगी या यह मामला भी औपचारिक कार्रवाई के बाद बंद कर दिया जाएगा?

 

शिक्षक का पक्ष

 

*शिक्षक गोपाल सिंह ने बातचीत में बच्ची को सजा देने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि* बच्ची पढ़ने-लिखने में पीछे रहती है, इसलिए उसे सजा दी गई। मारपीट से चोट लगने तथा अन्य आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। शिक्षक का विस्तृत पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।

 

*सामाजिकल कार्यकर्ता प्रदीप शर्मा का बयान-* हमें पालक ने कॉल और व्हाट्सएप से जानकारी भेजी- देखा कि बच्ची के कान से खून आ रहा है। और वीडियो भी सामने आई है कि बच्ची के साथ मारपीट हुआ है। जो अत्यंत गंभीर विषय है। मैंने शिक्षक से बातचीत भी किया। जिसमें उन्होंने बताया कि बच्ची पढ़ती लिखती नही है इसलिए सजा दिए गए। और शिक्षक को इस बात का पछतावा भी नही है। ऐसे में इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की गई है। बाल संरक्षण को लेकर सवाल है ।

 

नोट: नाबालिग बच्ची की पहचान बाल संरक्षण एवं निजता को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक नहीं की गई है।

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