नियमों की धज्जियां उड़ा निकाले लाखों रुपए के बिल

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                                फर्म का रजिस्ट्रेशन कैंसिल हुआ तो खोल लिया फिलिंग स्टेशन

 

शहडोल। जयसिंहनगर जनपद अंतर्गत संचालित पंचायतों में भर्रेशाही परवान चढ़ रही है। लेकिन प्रशासनिक अफसर
उदासीन बने हुए हैं। धंधेबाज नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए मनमानी कारस्तानियां अंजाम दे रहे हैं और जमकर
पैसा पीट रहे हैं। कार्रवाइयों के बिना न केवल इनके हौसले बुलंद हैं बल्कि इनसे प्रेरणा लेकर दूसरे भी स्वेच्छारिता
बरतते हैं। पंचायतों में कहीं भी कानून व्यवस्था खासतैार पर निर्माण कार्यों में दिखाई नहीं पड़ती। वेण्डर संस्था
मेसर्स अंबुज ट्रेडर्स ने भी नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं। संस्था के संचालक बृजेन्द्र कुमार पाण्डेय बताए गए हैं।
वाणिज्य कर विभाग रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर देता है इसके बाद भी इनके बिल लग जाते हैं।
रजिस्ट्रेशन कैंसिल फिर भी बिल
नियमों को पूरा नहीं करने के कारण वाणिज्य कर विभाग द्वारा 1 अक्टूबर 2018 को मेसर्स अम्बुज ट्रेडर्स का
रजिस्ट्रेशन कैंसल कर दिया था। इसके बावजूद वर्ष 2019 में 17 बिल लगाये गये। 11 बिल 2020 में लगे, 2 बिल 2022
में एवं 7 बिल 2023 में लगाये गये। इस तरह लाखों रुपए के भुगतान ले लिए गए। इस दौरान उक्त फर्म का नाम
मेसर्स अंबुज ट्रेडर्स था। इसके बाद बृजेन्द्र कुमार पाण्डेय द्वारा मेसर्स पाण्डेय फिलिंग स्टेशन खोल लिया गया।
वाणिज्य कर विभाग द्वारा 6 अक्टूबर 2020 को पुन: इस फर्म का रजिस्टे्रशन किया गया। फर्म संचालक द्वारा
विभाग के नियमों को पूरा करने की बजाय कमाई के हथकण्डे अख्तियार कर लिया गया।
मार्च में भी लगे बिल
वर्ष 2023 के मार्च माह में सीधी ग्राम पंचायत में बिल लगाये गये हैं, जबकि मेसर्स अंबुज ट्रेडर्स चरहेट पोस्ट
बनसुकली बंद हो चुकी है। उसके बदले फर्म संचालक द्वारा मेसर्स पाण्डेय फिलिंग स्टेशन का संचालन कर रहा है।
सवाल यह है कि जब फर्म बंद हो जाती है तब कैसे बिल लग जाते हैं और कौन मटेरियल सप्लाई करता है। जनपद
कार्यालयों और वाणिज्यकर विभाग द्वारा कभी इन बातों का सत्यापन नहीं किया जाता है। लेाग एक बार फर्म

रजिस्ट्रेशन कराने के बाद माल सप्लाई कर फर्म का भुगतान करने की बजाय उसे बंद कर देते हैं और नई फर्म बना
लेते हैं। कई वेण्डर तो फिलिंग स्टेशन खोलकर बैठ जाते हैं।
कमाई का जरिया बना
जनपद जयसिंहनगर की पंचायतों में यह नियमविरुद्ध मटेरियल सप्लाई का धंधा कमाई का जरिया बना हुआ है।
चूंकि इसमें धरपकड़ नहीं की जा रही है इसलिए लोग वाणिज्यकर विभाग में एक बार पंजीयन करा कर बार बार काम
करते रहते हैं। जबकि शासन के राजस्व की भारी क्षति होती है। यह अपराध कड़ी कानूनी करने योग्य प्रतीत होता है।
हैरानी की बात यह है कि जनपद के अधिकारी सबकुछ जानते हुए वे हस्तक्षेप नहीं करते। इससे उनकी भूमिका भी
संदिग्ध नजर आने लगती है।
किसने लगाए बिल ?
बृजेन्द्र पाण्डेय का कहना था कि मेरे द्वारा बिल अवनीश पयासी सचिव सीधी एवं चितरांव, राकेश उरमलिया कुंदा
टोला, शैलेन्द्र तिवारी पोड़ी को दिया गया था। लेकिन वाणिज्य कर विभाग द्वारा रजिस्ट्रेशन कैंसल होने के बाद कभी
भी मैनें बिल नहीं लगाये और उक्त फर्म के लिए दिया गया खाता भी मैनें बंद करा दिया था। अगर ऐसा है तो फिर
बिल किसने लगाए और रकम कैसे निकली यह जांच का विषय है। यह भी समझ के परे है कि फर्म जब बंद कर दिया
तो फिर उसने सादे बिल किसी और को क्यों दिए गए।

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