विषैला होता है जैव चिकित्सा अपशिष्ट : संजीव

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एक दिवसीय पीसीबी ने आयोजित की कार्यशाला

शहडोल। संभाग के क्षेत्रीय कार्यालय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गत दिवस डिंडौरी के प्रतिष्ठित चिकित्सा अस्पताल में जैव चिकित्सा अपशिष्ट विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। उक्त सेमिनार का आयोजन क्षेत्रीय कार्यालय मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शहडोल एवं मदर टेरेसा अस्पताल के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। उक्त सेमिनार में जिले के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में जैव चिकित्सा अपशिष्ट का प्रबंधन करने वाले चिकित्सक अमले द्वारा सक्रियता पूर्वक भाग लिया गया।
दी गई समझाईश
सेमिनार में क्षेत्रीय कार्यालय प्रदूषण विभाग के तरफ से डॉ.ए के दुबे प्रयोगशाला वैज्ञानिक द्वारा बात रखते हुए बताया गया कि अस्पताल में नर्सों एवं वार्ड बॉय को जैव चिकित्सा अपशिष्ट को एकत्र करते समय किन-किन बातों की सावधानियां बरतें एवं हथालन करने में क्या सावधानियां रखनी चाहिए। चूंकि जैव चिकित्सा अपशिष्ट अत्यंत संक्रमित एवं विषैला होता है, अत: इसे सावधानी पूर्वक सुरक्षित ढंग से हैंडल करने की आवश्यकता होती है। कार्यक्रम के आयोजन में क्षेत्रीय कार्यालय मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शहडोल बोर्ड की ओर से मानस साहू एवं राजेश शर्मा द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका अदा की गई, डॉ. आनंद दुबे द्वारा विस्तार से जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन में संबंधित सावधानियों के विषय में वीडियो के माध्यम से जानकारी दी गई।
पर्यावरण को कैसे सुरक्षित करें
मदर टेरेसा अस्पताल में होने वाले सेमिनार में बताया गया कि भारत सरकार के द्वारा जितने भी अस्पताल में वेस्ट जल एवं अन्य प्रकार की गतिविधियों को किस प्रकार नष्ट किया जाता है ,साथ ही उनसे होने वाले खतरे को भांपकर पर्यावरण को कैसे सुरक्षित किया जा सकता है, इस बारे में क्षेत्रीय कार्यालय मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शहडोल द्वारा विस्तारपूर्वक समझाया गया। विभाग द्वारा बताया गया कि 1998 में सर्वप्रथम यह अधिसूचना जारी की गई थी इसके बाद 2016 में इसमें संशोधन करते हुए करते हुए अपशिष्ट पदार्थों की श्रेणी को 10 भागों में बांटा गया था। जिस पर संशोधन करते हुए आज 4 प्रकार के रंगों श्रेणियों में रखा गया है। जिसमें पीला, लाल, नीला, सफेद केबिन में बांटा गया है । चिकित्सा संस्थानों द्वाराअस्पताल प्रबंधन के अपशिष्टओ को श्रेणीबद्ध रखा गया है, एवं होने वाले उपचार के लिए प्रदान किया गया है।
दूषित जल उपचार के निर्देश
अस्पताल विभाग द्वारा निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों की दो बार कोडिंग होना आवश्यक है एवं अस्पताल विभाग की दूषित जल के उपचार पर कार्य करने की जरूरत को महत्वपूर्ण बताया गया है, जिसके लिए क्षेत्र के समस्त अस्पतालों को दूषित जल के उपचार संयंत्र स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। चिकित्सा संस्थानों को प्रेरित करने के उद्देश्य से क्षेत्रीय कार्यालय मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय द्वारा जन -जागृति कार्यक्रम का आयोजन में किया गया, इस सेमिनार में बोर्ड के प्रमुख अधिकारियों द्वारा अस्पताल विभाग के आए हुए प्रतिनिधियों को अपशिष्ट पदार्थों के बारे में विशेष रूप से समझाया गया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के लगभग समस्त अस्पतालों के नर्सेज वार्ड बॉय ने बढ़ चढ़कर भाग लिया विभाग के द्वारा इस प्रकार के कार्यक्रम करने के दौरान क्षेत्र में अवशिष्ट प्रबंधकों में काफी सुधार देखने को मिल रहा है। साथ ही आज के युग की यह प्रमुख समस्याओं में से एक माना जा रहा है, जिस पर लग कर कार्य करने की जरूरत भी है।
एक दिवसीय सेमीनार
क्षेत्रीय कार्यालय मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शहडोल द्वारा क्षेत्रीय कार्यालय प्रमुख संजीव मेहरा की अगुवाई में अपशिष्ट पदार्थों एवं जल संयंत्र स्थापित कराने को लेकर लगातार संभाग के सभी अस्पतालों का बीच-बीच में सेमिनार का आयोजन लगातार किया जा रहा हैै। जिससे क्षेत्र की अस्पतालों में आपको काफी सुधार दिखता हुआ नजर आ रहा होगा इससे पहले भी 25 जनवरी 2020 को देवांता हॉस्पिटल बुढ़ार चौक में 15 जनवरी 2020 को, अमृता हॉस्पिटल पिपरिया , उमरिया में 22 जनवरी 2020 को संभाग स्तरीय सेमिनार का आयोजन कृष्णा गार्डन में आयोजित किया गया था, 27 जनवरी 2020 को मेवाड़ हॉस्पिटल में भी एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया जा चुका है।
इनकी रही मौजूदगी
क्षेत्रीय कार्यालय में पदस्थ क्षेत्रीय अधिकारी संजीव मेहरा के कुशल मार्गदर्शन में जैव चिकित्सा प्रबंधन नियम 2016 के अंतर्गत जैव चिकित्सा संस्थानों से प्रावधानों के तहत उत्पन्न जैव चिकित्सा अपशिष्ट के संग्रहण एवं भंडारण तथा निपटान की विस्तृत जानकारी हेतु आयोजित 1 दिवसीय कार्यशाला डिंडोरी स्थित मदर टेरेसा हॉस्पिटल में गत दिवस किया गया। जिसमें उनके साथ प्रयोगशाला प्रभारी डॉ. ए.के. दुबे, मानस साहू जीके बैगा, श्रेयस पांडे राजेश शर्मा सौरभ मिश्रा,जे ऐ एस, वी पी शर्मा, एवं मदर टेरेसा अस्पताल के प्रबंधक के अलावा अन्य जगहों से भी स्टाफ शामिल थे।
श्रेणीवार बार कोडिंग आवश्यक
क्षेत्रीय कार्यालय के बोर्ड के ओर से मानस साहू ने बताया कि संशोधित नियम 2016 से 2018 द्वारा प्रत्येक अस्पताल के संस्थान से निकलने वाले विषैले पदार्थों के मात्रा को श्रेणीवार बार कोडिंग किया जाना आवश्यक है ।जिससे यह सत्यापित हो सके कि उनके चिकित्सा संस्थान से उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट संयुक्त जैैव चिकित्सा अपशिष्ट, संस्थान तक उपचार हेतु जा रहा है अधिकारी द्वारा यह भी बताया गया कि जैैव चिकित्सा अपशिष्ट का हथालन करने के लिए नान-क्लोरिनेट बैग का इस्तेमाल होना बताया गया।इन सबके बाद अस्पताल की ओर से प्रशासकीय अधिकारी अजय पटेल द्वारा आभार व्यक्त किया गया।

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