ब्रेकिंग न्यूज़: जिला क्षय औषधालय की छत गिरी, बड़ा हादसा टला — प्रबंधन ने मामले को दबाने की कोशिश !!
शहडोल। जिला अस्पताल परिसर स्थित जिला क्षय औषधालय (टीबी सेंटर) की जर्जर इमारत आज एक बड़े हादसे का कारण बनते-बच गई। कई वर्षों से बिना मरम्मत खड़े इस भवन की छत शुक्रवार सुबह अचानक गिर गई। गनीमत यह रही कि हादसे के समय केंद्र में कोई मौजूद नहीं था। लेकिन घटना ने स्वास्थ्य विभाग और जिला अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है।
आज सुबह टीबी सेंटर को रोजाना की तरह सुबह 9 बजे खोलने का आदेश था, लेकिन संबंधित कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचे और केंद्र नहीं खोला गया। ठीक इसी बीच भवन की छत का हिस्सा भरभरा कर गिर गया। यदि केंद्र खुला होता, तो बड़ा हादसा होना तय था।
छत गिरने की घटना के बाद जिला क्षय अधिकारी द्वारा जारी एक पत्र भी सामने आया है, जिसमें साफ तौर पर उल्लेख है कि 15/11/2025 की बीती रात को टीबी केंद्र की छत की कड़ियां टूटने से भवन क्षतिग्रस्त हो गया, और यह जानकारी सिविल सर्जन को तत्काल भेजी गई है। पत्र में यह उल्लेख भी है कि छत अचानक टूटकर गिर गई जिससे भवन असुरक्षित हो गया है।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, केंद्र की जर्जर स्थिति को लेकर लंबे समय से शिकायतें होती रही हैं। इसके बावजूद किसी भी प्रकार की मरम्मत या मजबूतीकरण का कार्य नहीं कराया गया। जबकि प्रदेश में क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये का बजट जारी होता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सुबह 9 बजे केंद्र खोलने का आदेश था और भवन की स्थिति पहले से खराब थी, तो संबंधित विभाग ने सुरक्षात्मक इंतज़ाम क्यों नहीं किए? कर्मचारी समय पर क्यों नहीं पहुंचे? और अगर भवन असुरक्षित था तो इसे पहले खाली कराकर मरम्मत क्यों नहीं करवाई गई?
हादसे के बाद जिला अस्पताल प्रशासन ने मौके को तुरंत बंद करवा दिया है, और किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इससे यह भी आशंका जताई जा रही है कि प्रबंधन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है ताकि लापरवाही उजागर न हो।
यह घटना न केवल स्वास्थ्य विभाग की उपेक्षा और अनदेखी को सामने लाती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि यदि टीबी जैसी गंभीर बीमारी का केंद्र ही इतनी खराब स्थिति में है, तो मरीजों के इलाज और सुरक्षा का क्या होगा?
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। जिला प्रशासन से भी अपेक्षा है कि जल्द कार्रवाई करते हुए भवन का निरीक्षण और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।