साइबर ठगी का मामला:- खाते से 99 हजार गायब, न बैंक का SMS आया, न कोई अलर्ट,सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
साइबर ठगी का मामला:- खाते से 99 हजार गायब, न बैंक का SMS आया, न कोई अलर्ट,सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
कटनी। बैंक में जमा मेहनत की कमाई अगर बिना जानकारी के खाते से निकल जाए और ग्राहक के मोबाइल पर न कोई SMS आए, न ईमेल और न ही बैंक की ओर से किसी प्रकार का अलर्ट मिले, तो बैंकिंग सुरक्षा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कटनी में एक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े कथित साइबर फ्रॉड के मामले ने एक बार फिर ग्राहकों की जमा पूंजी की सुरक्षा और बैंकिंग अलर्ट व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित अमित तिवारी के अनुसार, उनके बैंक खाते से एक ही यूपीआई ट्रांजैक्शन में 99,000 ट्रांसफर हो गए, लेकिन उन्हें न बैंक का मैसेज मिला, न कोई अन्य अलर्ट और न ही फोन कॉल के जरिए लेनदेन की सूचना दी गई। पीड़ित का कहना है कि इतनी बड़ी रकम खाते से निकलने के बावजूद उन्हें समय रहते इसकी जानकारी नहीं मिल सकी।
एक झटके में खाते से 99 हजार पार, ग्राहक को भनक तक नहीं
पीड़ित द्वारा उपलब्ध कराए गए PhonePe स्क्रीनशॉट में 24 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:01 बजे सितारा खातून के नाम पर 99,000 का भुगतान दर्ज दिखाई देता है। स्क्रीनशॉट में एक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक के खाते से रकम डेबिट होने का विवरण भी मौजूद है।
अमित तिवारी का आरोप है कि यह ट्रांजैक्शन उनकी जानकारी और अनुमति के बिना हुआ। उनका कहना है कि बैंक की ओर से लेनदेन के संबंध में कोई SMS या अन्य अलर्ट प्राप्त नहीं हुआ। यदि पीड़ित का दावा सही पाया जाता है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय है कि इतनी बड़ी रकम के ट्रांसफर के समय अलर्ट जारी हुआ था या नहीं, और यदि जारी हुआ तो वह ग्राहक तक क्यों नहीं पहुंचा।
न SMS, न कॉल, न अलर्ट—आखिर कहां थी बैंकिंग सुरक्षा
आज डिजिटल बैंकिंग और यूपीआई भुगतान के दौर में ग्राहक लेनदेन से जुड़ी सूचना के लिए बैंक के अलर्ट सिस्टम पर भरोसा करते हैं। ऐसे में खाते से बड़ी रकम निकलने के बावजूद सूचना नहीं मिलने का आरोप कई अहम सवाल खड़े करता है।संबंधित खाते में SMS ट्रांजैक्शन अलर्ट की सुविधा सक्रिय थी,99,000 के भुगतान के समय बैंक ने कोई सूचना भेजी थी,यदि अलर्ट भेजा गया, तो वह ग्राहक तक क्यों नहीं पहुंचा,
बैंक के पास ट्रांजैक्शन और अलर्ट डिलीवरी का तकनीकी रिकॉर्ड मौजूद है। शिकायत मिलने के बाद बैंक ने रकम रोकने या वापस दिलाने के लिए क्या कदम उठाए,इन सवालों का जवाब बैंक के तकनीकी रिकॉर्ड और संबंधित एजेंसियों की जांच से ही सामने आ सकेगा।
महाराष्ट्र से बांग्लादेश तक रकम पहुंचने का दावा, जांच की जरूरत
पीड़ित के अनुसार, साइबर सेल में शिकायत के बाद हुई पड़ताल में रकम महाराष्ट्र स्थित फिनो बैंक के खाते में पहुंचने और कुछ ही मिनटों के भीतर बांग्लादेश में कार्ड स्वाइप के जरिए खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई। यदि यह जानकारी जांच में पुष्ट होती है, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि रकम किस माध्यम से स्थानांतरित हुई, संबंधित खातों और कार्ड का इस्तेमाल किसने किया तथा इतनी तेजी से हुए कथित लेनदेन को रोकने के लिए क्या प्रयास किए गए। इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि संबंधित बैंकिंग रिकॉर्ड और साइबर सेल की आधिकारिक जानकारी से होना आवश्यक है।
बैंक बंद होने के कारण तत्काल नहीं पहुंच सके शाखा, साइबर सेल में शिकायत
अमित तिवारी के मुताबिक, घटना के बाद लगातार दो दिन बैंक बंद रहने के कारण वह तत्काल शाखा नहीं पहुंच सके। बैंक खुलने पर उन्होंने कटनी शाखा पहुंचकर मामले की जानकारी लेने का प्रयास किया। पीड़ित ने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराने की बात भी कही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत पर संबंधित एजेंसियां क्या कार्रवाई करती हैं, लेनदेन की वास्तविक स्थिति क्या निकलती है और पीड़ित की रकम वापस दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
ग्राहक के पैसे की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी
यह मामला केवल 99 हजार की कथित साइबर ठगी तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि यदि ग्राहक के खाते से बड़ी रकम निकलती है, तो उसे तत्काल इसकी सूचना क्यों नहीं मिलती—खासकर तब, जब पीड़ित का दावा है कि बैंक की ओर से कोई SMS या अन्य अलर्ट नहीं आया। एक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक को इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। बैंक को बताना चाहिए कि संबंधित ट्रांजैक्शन किस प्रकार हुआ, अलर्ट जारी किया गया था या नहीं, शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई और ग्राहक की रकम वापस दिलाने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल, ट्रांजैक्शन के अनधिकृत होने, अलर्ट में चूक और रकम के आगे इस्तेमाल से जुड़े सभी पहलुओं की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। बैंक का पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।