पहली बारिश में डूबे दावे, कागजी विकास की खुली पोल बैठकों और दावों तक सीमित रही तैयारी, जलभराव ने उजागर की नगर निगम की हकीकत

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पहली बारिश में डूबे दावे, कागजी विकास की खुली पोल
बैठकों और दावों तक सीमित रही तैयारी, जलभराव ने उजागर की नगर निगम की हकीकत
मानसून की पहली तेज बारिश ने नगर निगम के विकास कार्यों और मानसून पूर्व तैयारियों की वास्तविकता उजागर कर दी। नाले-नालियों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और जलभराव से निपटने के जो दावे लगातार किए जा रहे थे, वे पहली ही बारिश में धराशायी हो गए। शहर की सड़कें पानी में डूब गईं, निचली बस्तियां जलमग्न हो गईं और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। विडंबना यह है कि जिले में अब तक पिछले वर्ष की तुलना में करीब 55.6 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, इसके बावजूद शहर के हालात बदतर हो गए। इससे साफ है कि समस्या बारिश की मात्रा नहीं, बल्कि नगर निगम की लापरवाही और अधूरी तैयारियां हैं। पहली ही बारिश ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब कम बारिश में शहर की यह स्थिति है तो पूरे मानसून के दौरान हालात कितने गंभीर हो सकते हैं।

कटनी।। मानसून की शुरुआती बारिश ने ही नगर निगम की तैयारियों और दावों की हकीकत सामने ला दी है। हर वर्ष की तरह इस बार भी नाले-नालियों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने और जलभराव रोकने के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन पहली तेज बारिश ने इन सभी दावों की पोल खोलकर रख दी। शहर की कई निचली बस्तियां जलमग्न हो गईं, सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं और लोगों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ। नगर निगम द्वारा विकास कार्यों और मानसून पूर्व तैयारियों को लेकर लगातार बैठकें आयोजित की गईं तथा सफाई व्यवस्था को लेकर दावे किए गए, लेकिन धरातल पर इनका असर कहीं दिखाई नहीं दिया। हालात यह हैं कि पहली ही बारिश में कुठला, कुशवाहा नगर, चंडिका नगर, अहमदनगर, कटाएघाट, औद्योगिक क्षेत्र कटाएघाट, माँ मेडिकल के पास के पास सहित कई क्षेत्रों में जलभराव हो गया। सड़कों पर कीचड़, गड्ढों में भरा पानी और जाम नालियों ने लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि समय पर करों का भुगतान करने के बावजूद उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं। कई इलाकों में नालियों की नियमित सफाई नहीं हुई, जबकि कुछ स्थानों पर आज तक नालियों का निर्माण ही नहीं कराया गया। इसका नतीजा यह रहा कि बारिश का पानी और गंदा पानी सड़कों पर बहता रहा और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।


नगर निगम प्रशासन ने मानसून से पहले तैयारियों के बड़े दावे किए थे, लेकिन शुरुआती बारिश ने यह साफ कर दिया कि अधिकांश तैयारियां केवल कागजों तक सीमित रहीं। विकास कार्यों के नाम पर बैठकों और दावों का सिलसिला तो चलता रहा, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्य नहीं होने से शहरवासियों को इसकी कीमत जलभराव, गंदगी और अव्यवस्थित यातायात के रूप में चुकानी पड़ रही है।
हालांकि नगर निगम और प्रशासन की टीम स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कह रही है, लेकिन नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते नाले-नालियों की प्रभावी सफाई और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त की गई होती तो पहली ही बारिश में ऐसे हालात पैदा नहीं होते।


जिले में 1 जून से 3 जुलाई तक 84.1 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में हुई 189.4 मिलीमीटर वर्षा की तुलना में लगभग 55.6 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद शहर में जलभराव की स्थिति यह संकेत देती है कि समस्या बारिश की मात्रा से अधिक नगर निगम की तैयारियों और कार्यों के धरातल पर क्रियान्वयन की है। अब नागरिकों की नजर इस बात पर है कि निगम प्रशासन केवल दावों और बैठकों तक सीमित रहेगा या फिर जल निकासी, सफाई और विकास कार्यों को वास्तव में जमीन पर उतारकर लोगों को राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाएगा।

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