जनआस्था और पर्यावरण पर चोट अमकुही पहाड़ी पर निर्माण से नागरिकों में आक्रोश, काम रोकने की मांग
जनआस्था और पर्यावरण पर चोट अमकुही पहाड़ी पर निर्माण से नागरिकों में आक्रोश, काम रोकने की मांग
कटनी।। नगर की पहचान और जीवनरेखा मानी जाने वाली अमकुही पहाड़ी पर चल रहे निर्माण कार्यों ने अब जनभावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है। जिस पहाड़ी से शहर की जलस्रोत व्यवस्था, पर्यावरण संतुलन और धार्मिक आस्था जुड़ी है, वहीं आज भारी मशीनों की गूंज और कटाई-खुदाई ने नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर प्रकृति और जनजीवन को जो नुकसान पहुंच रहा है, उसकी भरपाई संभव नहीं होगी।
जिला योजना समिति के सदस्य एवं पार्षद शशिकांत तिवारी ने इस गंभीर स्थिति को लेकर नगर निगम अध्यक्ष मनीष पाठक को पत्र सौंपते हुए द्वितीय चरण में किए जा रहे निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अमकुही पहाड़ी केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि नगर की प्राकृतिक धरोहर है। यहां की हरियाली और भू-संरचना शहर के जलस्तर, कृषि और नागरिकों के स्वास्थ्य से सीधे जुड़ी हुई है।
नागरिकों का आरोप है कि निर्माण गतिविधियों के कारण जलस्रोत प्रभावित हो रहे हैं, हरियाली नष्ट हो रही है और भविष्य में पेयजल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। कटाये घाट जैसे धार्मिक और सामाजिक आस्था के केंद्र के आसपास हो रहे कार्यों से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण नहीं रोका गया तो आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
नगर निगम अध्यक्ष मनीष पाठक ने कहा कि नगरहित, पर्यावरण संरक्षण और जनभावनाएं सर्वोपरि हैं। प्राप्त पत्र के तथ्यों का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा और किसी भी कीमत पर जनता के हितों की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने इस संबंध में कलेक्टर आशीष तिवारी एवं नगर निगम आयुक्त को भी पत्र भेजकर मामले में त्वरित संज्ञान लेने का आग्रह किया है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक नहीं लगी, तो जनआंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। लोगों का कहना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन ऐसा विकास जो प्रकृति, आस्था और जनजीवन को नुकसान पहुंचाए, उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।