अंक गणित के खेल में उलझा जिला मुख्यालय
शहडोल। कभी चोरी-छिपे चलने वाला सट्टा बाजार आजकल कानून की ढीली पकड़ की वजह से खाईवाल के संरक्षण में खुलेआम संचालित हो रहा है। जिला मुख्यालय में सट्टे के खिलाफ पुलिस सिर्फ दिखावे की कार्रवाई करती है। सौ से डेढ सौ रुपए मात्र के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर खाना पूर्ति करती है। लेकिन बड़े खाईवालों तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच रहें हैं, जबकि बड़े रसूखदार सट्टे व दलालो पर पुलिस की नजर नही पड़ती है या पुलिस सब जान कर भी अंजान बनती है, जिसके कारण चारो ओर सट्टे का करोबार बढ रहा है। शहर में किरण टाॅकीज एवं सिंधी बाजार में अमित और शनि लगातार सक्रिय है। ओपन, क्लोज और रनिंग के नाम से चर्चित इस खेल में जिस प्रकार सब कुछ ओपन हो रहा है, उससे यही प्रतीत होता है कि प्रमुख खाईवाल को कानून का कोई खौफ नहीं रह गया है। जिला मुख्यालय में खुलेआम पट्टी काटकर एवं मोबाइल के माध्यम से भी इस अवैध कारोबार को संचालित कर लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे हैं, जिसकी जानकारी शायद पुलिस को छोड़कर सभी को है। सट्टे के हिसाब-किताब की जगह बार-बार बदल कर प्रमुख खाईवाल अपनी होशियारी का भी परिचय देने की कोशिश करते हैं।
वर्तमान समय में सिंधी बाजार, किरण टाकीज के आस-पास अमित और शनि नामक युवकों द्वारा इस अवैध कारोबार का हिसाब-किताब प्रत्येक शनिवार को किया जा रहा है। चर्चा है कि अमित और शनि साप्ताहिक व मासिक सट्टा चार्ट की भी बिक्री कर रहेे हैं जिसकी मांग सट्टा प्रेमियों में ज्यादा है। गरीब बेरोजगार युवाओं को मोटे कमीशन का लालच देकर इस अवैध कारोबार में उतारने की तैयारी की जा रही है। आगे चलकर यही युवा अपराध की ओर अग्रसर हो जाते हैं। शिकायत होने पर जब पुलिस अभियान चलाती है तो खाईवाल को बक्श कर अक्सर इन्हीं युवाओं के खिलाफ कार्रवाई कर खानापूर्ति कर लेती है।
पुलिस अधिकारियों की अनदेखी से शहर में युवा पीढ़ी भी सट्टा बाजार में खाईवाल द्वारा दिखाएं जाने वाले रंगीन सपनों के जाल में फंसते जा रहे। नतीजा यह होता है कि सट्टे के परिणाम को जानकर भी इस गलत लत में बड़े दलालो के जाल में फस जाते है, जिसके कारण कई घर परिवार बनने से पहले बिगड़ जाते है। चर्चा है कि शहर मे सट्टे के बड़े दलाल क्षेत्र में अपनी नींव जमाकर लंबे समय से सट्टा बाजार में अपना जाल फैलाते जा रहे हैं। किरण टाॅकीज एरिया एवं सिंधी बाजार में बेखौफ होकर सट्टा के खाईवाल ओर दलालो के जमावड़े लगे रहते है। इन इलाकों में बड़े पैमाने पर सट्टे का खेल जोरो पर चलने के कारण कई बड़े बुकी अपना जाल फैला कर धड़ल्ले से काम कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि पुलिस से सांठगांठ के चलते ये अवैध कारोबार को बाकायदा लाइसेंसी कारोबार के रूप में खुलेआम शहर में संचालित हो रहा है, पुलिस और खाईवालों की सेटिंग इतनी तगड़ी है कि ऊपर अधिकारियों को दिखाने ये खाईवाल अपने गुर्गों के नाम हर महीने एक-एक प्रकरण बनवा देते हैं. ऊपर बैठे अफसरों को लगता है पुलिस कार्रवाई कर रही है. जबकि वास्तव में ये सांठ-गांठ का एक पहलू होता है. बड़ा सवाल ये है कि जब पुलिस हर महीने सटोरियों के गुर्गों के खिलाफ कार्रवाई करती है तो, फिर उनसे पूछताछ कर खाईवालों तक क्यों नहीं पहुंच पाती है।