मंत्री से लेकर पार्षद तक नहीं बनवा पाये मुख्यालय की सडक़

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मंत्री से लेकर पार्षद तक नहीं बनवा पाये मुख्यालय की सडक़

हजारों राहगीर दल-दल से होकर गुजर रहे हर दिन

सडक़ों, नालियों तथा वार्डो की साफ-सफाई से नपा की दूरियां

जिस मार्ग पर हजारों गाडिय़ां और राहगीर प्रतिदिन गुजरते हैं, वही सडक़ अगर भाजपा के 18 साल राज करने के बाद दलदल में दिखाई दे, तो ऐसे नेताओं को शर्म से चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिये। जिला मुख्यालय में सडक़ की हालत देखकर लोग निकलना पसंद नहीं करते, लेकिन मजबूरी उन्हें दलदल सडक़ पर निकलने को मजबूर कर देती है। ना तो सडक़, ना तो नाली और ना ही यहां के नेताओं में लोगों की परेशानियों का समझने का गुण है, जिसके कारण खस्ताहाल व्यवस्था देखा जा रहा है।

अनूपपुर। मुख्यालय की सबसे प्रमुख सडक़ अनूपपुर से कई ग्रामो की ओर जाने वाली मात्र बरसात के दिनों में खस्ताहाल हो चुका है, लोगों को आने-जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिला मुख्यालय पहुंचने वाले हजारो लोग इस मार्ग से प्रतिदिन आवागमन करते हैं, उसके बावजूद भी इसे ठीक कराने में नेताओं के पसीने छूट रहे हैं, हर बरसात में गढ्ढो से होकर राहगीरों को गुजरना पड़ता है, इस बरसात तो इतना पानी भर गया कि लोगों का निकलना ही मुश्किल हो गया है। बीते दिनों हुये बारिश के कारण कई लोग दुर्घटना के शिकार भी हो गये।

लगता है जाम

जगह-जगह सडक़ खराब होने के कारण राहगीर किनारे से निकलने का प्रयास करते हैं, जिसके कारण घंटो जाम की स्थिति बनी रहती है, इस मार्ग पर मौजूद दुकानों के कारण बड़े व छोटे वाहनो का प्रवेश प्रतिदिन रहता है, जिसके कारण सडक़ में भरा पानी दलदल के रूप में परिवर्तित हो जाता है और सडक़ अपना विकराल रूप धारण कर लेता है कई बार घंटो जाम होने के कारण विवाद की स्थिति निर्मित हो चुकी है।

किसी काम के नहीं यहां केे नेता

जिले में सफेद पोश नेताओंं की कमी नहीं है, यहां मंत्री से लेकर पार्षद तक आपको सहजता से मिल जायेगें, इनके द्वारा किये गये कार्यो को आप सोशल मीडिया में या चौराहो के पोस्टरों में आसानी से देख सकते है, लेकिन उनके ही वार्ड में चलने के लिये सडक़ नहीं है, पानी निकलने के लिये नाली नही है और तो और आज भी जरूरत मंदो तक प्रधानमंत्री आवास नहीं पहुंच पाया है, लेकिन इनके कुर्ते की ना तो क्रीज की बिगड़ी और ना ही इनके शान शौकत में कमी आई। सडक़ में भले ही गढ्ढे हो चलेगा, पानी भरा हो वह भी चलेगा, कीचड़ में सडक़ तब्दील हो जाये तब भी चलेगा, मगर नेताओं के कुर्ते में दाग नहीं नजर नहीं आयेगा।

बदनामी छुपाने के लिये डाले डस्ट

बरसात के 20 दिन गुजरने के बाद जब लोगों के द्वारा जब नेताओंं को कोसने लगे तो अपने बदनामी को छुपाने के लिये डस्ट डालकर अपने कद को बढ़ाने का प्रयास तो किया गया, लेकिन सडक़ के गढ्ढे डस्ट के भरोसे कहां तक टिकेगें। अगले ही पानी में फिर से यह डस्ट बह कर नालियों में भर जायेगा और बरसात का पानी फिर से गढ्ढो व सडक़ो में नजर आने लगेगा। इसके पूर्व भी भाजपा शासन काल में पहली बार खाद्य मंत्री बने बिसाहूलाल सिंह अनूपपुर से पगना की ओर कार्यक्रम में जाने वाले थे तो गिट्टी डालकर गढ्ढो को छुपाया गया था, उसके बाद नगर पालिका के दर्जन भर नेता रूप रेखा तैयार करते हुये फोटो खिंचावाकर फेसबुक में डाले थे और जनमानस से वादा किया था कि जल्द ही एक शानदार सडक़ की सौगात दी जायेगी, लेकिन इन नेताओं के लच्छेदार भाषण और इनकी नियत इस बरसात में लोगों दिखाकर रख दिया।

जिला प्रशासन भी मौन

जिला मुख्यालय में बरसात के दिनों में वार्डो का हालत खस्ताहाल दिखाई दे रहा है, वर्ष भर बाद भी विकास के ऐसे कोई दृश्य दिखाई नहीं दिये जिससे शिवराज और मोदी के सपनो को साकार करता हो, बल्कि आपको नगर भर में कचड़े और सडक़ पर गढ्ढे अवश्य दिखाई देगें। वहीं जिला प्रशासन भी सडक़ो की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है, जिसके कारण जो भी शासकीय प्रावधान होते हैं, अधूरे रहकर ऐसी परिस्थितियों का निर्माण करते हैं। नगर पालिका के दर्जनो वार्डो में ऐसी बहुत सी खामियां है जिसे जिला प्रशासन नजर अंदाज करते जा रहा है, जिसके कारण जिला मुख्यालय का स्वरूप बिगड़ते जा रहा है।

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