सुशासन तिहार के दावों की खुली पोल: जीपीएम जिले में सालों से भटक रहे फरियादी, फाइलों में ही गुम हो रहे आवेदन

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम)।

 

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आम जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए शुरू किए गए ‘सुशासन तिहार’ जैसे महत्वाकांक्षी आयोजनों की जमीनी हकीकत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले में सवालों के घेरे में है।

 

शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का मौके पर ही निराकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लगाए जा रहे इन शिविरों में दिए गए आवेदन महीनों और सालों से फाइलों में धूल फांक रहे हैं।

 

पिछले वर्ष (2025) के आवेदनों पर अब तक कोई कार्रवाई न होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली और इन आयोजनों की सार्थकता पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लग गया है।

 

हाल ही में सुशासन तिहार 2026 और जनदर्शन के ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जो लालफीताशाही और विभागीय लापरवाही की कहानी बयां कर रहे हैं:

 

प्रकरण 1: 7000 रुपए के ई-स्टाम्प वापसी के लिए 2 साल 7 माह से इंतजार, कलेक्ट्रेट से फाइल गायब होने का अंदेशा

मरवाही निवासी श्रवण कुमार हलवाई (पिता अशोक कुमार हलवाई) पिछले 2 वर्ष 7 माह से अपने 7000 रुपये के गैर-न्यायिक ई-स्टाम्प की राशि (नियमानुसार कटौती कर) वापस पाने के लिए कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहे हैं।

 

लापरवाही की हद: आवेदक ने वर्ष 2025 के सुशासन तिहार में आवेदन दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 

इसके बाद कलेक्टर जीपीएम के जनदर्शन में भी गुहार लगाई (टोकन नंबर: 2280125000879), जिसका भी कोई परिणाम नहीं निकला।

 

विभागीय टालमटोल: जन शिकायत शाखा द्वारा उप पंजीयक मरवाही को प्रकरण के निराकरण के निर्देश दिए गए थे। हैरानी की बात यह है कि उप पंजीयक ने लिखित में जवाब दिया कि यह प्रकरण उनके कार्यालय तक पहुंचा ही नहीं है।

 

वर्तमान मांग: श्रवण कुमार ने सुशासन तिहार 2026 में पुनः कलेक्टर के नाम आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्हें अंदेशा है कि कलेक्ट्रेट की आवक-जावक शाखा से ही उनका आवेदन गायब कर दिया गया है। उन्होंने मांग की है कि जांच कर दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि उन्हें न्याय मिल सके।

 

प्रकरण 2: नक्शा बंटाकन के लिए राजस्व पखवाड़े से लेकर सुशासन तिहार तक के चक्कर

 

मरवाही निवासी कमाल खान का मामला राजस्व विभाग की सुस्ती का जीता-जागता प्रमाण है।

 

आवेदक ने खसरा नंबर 535/3 (रकबा 0.04) के नक्शा बंटाकन कर ऑनलाइन दुरुस्त करने के लिए राजस्व पखवाड़ा 2025 और 2026 में आवेदन दिया था।सालों बीत जाने के बाद भी यह प्रकरण लंबित है।

 

हारकर आवेदक ने अब सुशासन तिहार 2026 में फिर से वही आवेदन देकर ऑनलाइन रिकॉर्ड दुरुस्त करने की गुहार लगाई है।

 

प्रकरण 3: जनदर्शन और सुशासन तिहार में दिए गए सीमांकन के आवेदन अटके

 

मरवाही के ही निवासी अभिषेक कुमार हलवाई अपनी जमीन के सीमांकन के लिए प्रशासन की चौखट पर न्याय मांग रहे हैं।

उन्होंने पटवारी हल्का नंबर 5 लोहरी स्थित खसरा नंबर 1151/10 और 1751/8 (रकबा 0.0810 हेक्टेयर और 0.3850 हेक्टेयर, कुल दो रकबा) के सीमांकन के लिए सुशासन तिहार 2025 में आवेदन दिया था।

 

कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने कलेक्टर जनदर्शन में (टोकन नंबर: 2280125000406) के माध्यम से भी निराकरण की मांग की।

विगत वर्ष से लेकर आज दिनांक तक उक्त सीमांकन की प्रक्रिया शुरू तक नहीं की गई है।

 

प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठते सवाल

जिले में सामने आए ये तीनों प्रकरण महज एक बानगी हैं। यदि ‘सुशासन तिहार’ और ‘कलेक्टर जनदर्शन’ जैसे सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों में प्राप्त आवेदनों का यह हाल है, तो आम दिनों में दिए जाने वाले आवेदनों की क्या स्थिति होगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। अब देखना यह होगा कि जीपीएम जिला प्रशासन इन लंबित मामलों पर कब तक संज्ञान लेता है और लापरवाह अधिकारियों-कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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