बैठक में अभद्रता पड़ी भारी, उपयंत्री शैलेन्द्र प्यासी निलंबित एक पल की गलती ने छीन लिया पद और जिम्मेदारियां जनप्रतिनिधि से उलझना उपयंत्री को पड़ा महंगा, निलंबन से हिला नगर निगम
बैठक में अभद्रता पड़ी भारी, उपयंत्री शैलेन्द्र प्यासी निलंबित
एक पल की गलती ने छीन लिया पद और जिम्मेदारियां
जनप्रतिनिधि से उलझना उपयंत्री को पड़ा महंगा, निलंबन से हिला नगर निगम
कटनी।। कभी-कभी एक पल की ज़ुबान, वर्षों की सेवा पर भारी पड़ जाती है। नगर पालिक निगम कटनी में ऐसा ही एक उदाहरण सामने आया है, जहाँ बैठक के दौरान की गई अभद्रता और अनुशासनहीनता एक उपयंत्री को तत्काल निलंबन तक ले गई। नगर पालिक निगम में अनुशासन और मर्यादा भंग करने का एक मामला अब पूरे महकमे के लिए कड़ी चेतावनी बन गया है। लोक निर्माण एवं उद्यान समिति की बैठक के दौरान वरिष्ठ पार्षद से अभद्र व्यवहार करना नगर निगम के उपयंत्री शैलेन्द्र प्यासी को महंगा पड़ गया। निगम आयुक्त सुश्री तपस्या परिहार (IAS) ने उपयंत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
दिनांक 24 दिसंबर 2025 को नगर निगम कटनी में लोक निर्माण एवं उद्यान समिति की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक के दौरान समिति सदस्य एवं वरिष्ठ पार्षद मिथिलेश जैन द्वारा कुछ बिंदुओं पर सवाल पूछे गए। इसी दौरान उपयंत्री शैलेन्द्र प्यासी ने तेज आवाज में बहस करते हुए सार्वजनिक रूप से अभद्रता और अनुशासनहीनता का प्रदर्शन किया। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम प्रशासन ने उपयंत्री को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
जवाब आया, पर संतोषजनक नहीं
नोटिस के जवाब में उपयंत्री शैलेन्द्र प्यासी ने 31 दिसंबर 2025 को अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया, लेकिन निगम आयुक्त को यह जवाब असंतोषजनक लगा। दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकला कि उपयंत्री का आचरण शासकीय सेवा नियमों के विपरीत है।
नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
निगम आयुक्त ने उपयंत्री को म.प्र. सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3(1) एवं 3(2) तथा म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9(2)(क) का उल्लंघन करने का दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी किए। निलंबन अवधि में शैलेन्द्र प्यासी को सुरम्य पार्क, नगर पालिक निगम कटनी में संबद्ध किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। वहीं, प्रशासनिक कार्यों में व्यवधान न हो, इसके लिए उपयंत्री प्यासी को सौंपे गए सभी दायित्व अन्य उपयंत्रियों में पुनः आवंटित कर दिए गए हैं, जिसके आदेश भी पृथक से जारी किए गए हैं। इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि,सरकारी सेवा में पद से बड़ा अनुशासन होता है। जनप्रतिनिधियों के साथ अमर्यादित व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। नगर निगम का यह फैसला यह दर्शाता है कि एक गलत व्यवहार, एक अनुचित शब्द और एक क्षण का आवेग वर्षों की सेवा और प्रतिष्ठा पर भारी पड़ सकता है। यह मामला अब सिर्फ एक निलंबन नहीं, बल्कि हर कर्मचारी के लिए सबक और चेतावनी बन गया है एक गलती कितनी महंगी पड़ सकती है।
यह मामला बताता है कि एक क्षण का गुस्सा,एक गलत शब्द और एक बैठक की मर्यादा भंग करना पूरे सेवा जीवन पर प्रश्नचिह्न लगा सकता है।