जनहित में जारी: पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर प्रतिबंध, किसान और आमजन रहें सतर्क मानव और पशुओं के लिए अत्यंत विषैला रसायन, बचा हुआ स्टॉक वापस लेकर नष्ट करने के निर्देश; बिना जानकारी किसी भी फसल पर न करें इस्तेमाल
जनहित में जारी: पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर प्रतिबंध, किसान और आमजन रहें सतर्क
मानव और पशुओं के लिए अत्यंत विषैला रसायन, बचा हुआ स्टॉक वापस लेकर नष्ट करने के निर्देश; बिना जानकारी किसी भी फसल पर न करें इस्तेमाल
कटनी। मानव स्वास्थ्य, पशुओं और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पैराक्वेट डाइक्लोराइड कीटनाशक को लेकर जारी प्रतिबंध के संबंध में किसानों और आम नागरिकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। यह अत्यंत विषैला रसायन है, जिसके संपर्क में आने या शरीर में पहुंचने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में किसानों, कृषि सामग्री विक्रेताओं और आमजन को इसके खतरों के प्रति जागरूक रहना जरूरी है।
राज्य शासन के किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने इस रसायन के निर्माण, बिक्री और भंडारण पर रोक से संबंधित निर्देश जारी किए हैं। निर्माताओं को पैराक्वेट डाइक्लोराइड से संबंधित पंजीकरण प्रमाणपत्र केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति को वापस करने तथा बचा हुआ स्टॉक वापस बुलाकर निर्धारित नियमों के अनुसार नष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। भारत सरकार ने कीटनाशी अधिनियम, 1968 के तहत इसके पंजीकरण निरस्त करने और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी की है।
फसल को जल्दी सुखाने के लिए इस्तेमाल से बचें
पैराक्वेट डाइक्लोराइड एक गैर-चयनात्मक खरपतवारनाशक है, जो पौधों के संपर्क में आने पर उनके हरे हिस्सों को तेजी से नुकसान पहुंचाता है। इसे ग्रामोक्सोन जैसे व्यापारिक नामों से भी जाना जाता रहा है। कुछ किसान फसल को जल्दी सुखाने और कटाई आसान बनाने के उद्देश्य से इसका इस्तेमाल करते रहे हैं। लेकिन किसी भी फसल पर इसका उपयोग करने से पहले संबंधित सरकारी अनुमति और कृषि विभाग के निर्देशों की जानकारी लेना आवश्यक है। प्रतिबंधित रसायन का इस्तेमाल करना किसान, खेत में काम करने वाले मजदूरों और उपभोक्ताओं के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
शरीर में पहुंचने पर हो सकता है जानलेवा
पैराक्वेट डाइक्लोराइड की विषाक्तता गंभीर होती है। इसके निगलने से फेफड़ों, गुर्दों और अन्य अंगों को गंभीर क्षति पहुंच सकती है। विषाक्तता के गंभीर मामलों में मृत्यु तक हो सकती है और इसका कोई विश्वसनीय विशिष्ट प्रतिविष उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे सामान्य कृषि रसायन समझकर इस्तेमाल करना या लापरवाही से रखना खतरनाक हो सकता है।
यह भी समझना जरूरी है कि केवल किसी फसल पर रसायन के इस्तेमाल की आशंका से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उससे कैंसर या कोई दूसरी बीमारी निश्चित रूप से होगी। खाद्य पदार्थों में अवशेषों का जोखिम इस्तेमाल की मात्रा, समय, तरीके और वैज्ञानिक जांच पर निर्भर करता है। उपभोक्ताओं को घबराने के बजाय खाद्य सुरक्षा और कृषि विभाग की प्रमाणित सलाह पर भरोसा करना चाहिए।
किसान, दुकानदार और आम नागरिक क्या करें?
किसान: पैराक्वेट डाइक्लोराइड का इस्तेमाल न करें। खरपतवार नियंत्रण और फसल प्रबंधन के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह से वैध एवं सुरक्षित विकल्प अपनाएं।
कृषि सामग्री विक्रेता: प्रतिबंध संबंधी सरकारी निर्देशों का पालन करें। प्रतिबंधित उत्पाद की बिक्री या वितरण न करें और स्टॉक के निपटान के लिए संबंधित विभाग से मार्गदर्शन लें।
आम नागरिक: कृषि रसायनों को बच्चों और पशुओं की पहुंच से दूर रखें। उन्हें खाद्य पदार्थों, पेयजल और रसोई के बर्तनों के पास न रखें।
खेतों में काम करने वाले मजदूर: अज्ञात रसायन के संपर्क में आने से बचें। बिना उचित प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरणों के किसी रसायन का छिड़काव न करें।
उपभोक्ता: मूंग या अन्य खाद्यान्न में रसायन के अवशेष को लेकर संदेह होने पर अफवाह फैलाने के बजाय खाद्य सुरक्षा विभाग से जांच और मार्गदर्शन प्राप्त करें।
गलती से संपर्क या सेवन हो जाए तो क्या करें
यदि यह रसायन गलती से निगल लिया जाए, आंखों या त्वचा पर पड़ जाए अथवा इसके संपर्क के बाद अस्वस्थता महसूस हो, तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें। निगलने की स्थिति में उल्टी कराने का प्रयास न करें और घरेलू नुस्खों से इलाज न करें। आंख या त्वचा पर पड़ने पर दूषित कपड़े हटाकर प्रभावित हिस्से को खूब साफ बहते पानी से धोएं और तत्काल चिकित्सा सहायता प्राप्त करें। संभव हो तो उत्पाद का डिब्बा या लेबल सुरक्षित रखते हुए चिकित्सक को दिखाएं, लेकिन सहायता लेने में देरी न करें।
जनहित में अपील: कृषि उत्पादन बढ़ाने या कटाई का समय बचाने के लिए मानव जीवन और पशुओं के स्वास्थ्य को खतरे में न डालें। प्रतिबंधित कृषि रसायनों से दूरी बनाए रखें, सरकारी निर्देशों का पालन करें और किसी भी संदिग्ध मामले में कृषि विभाग, खाद्य सुरक्षा विभाग या स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करें। जागरूकता और सावधानी ही इस तरह के जहरीले रसायनों से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।