“सोने से लदा जोशी, कोतमा का जुआ सम्राट” चपानी से कोतमा तक फैला फड़ साम्राज्य, पुलिस बनी मूक दर्शक
कोतमा, अनूपपुर विशेष रिपोर्ट
जब शहर की शामें भगवान की आरती से नहीं, बावन पत्तों की हलचल से गूंजने लगे, तो समझिए कहीं न कहीं सिस्टम में जबरदस्त सेटिंग है। कोतमा में इन दिनों जुए का ऐसा बादशाह उभरा है, जिसे न कानून की चिंता है, न प्रशासन का डर। नाम है जोशी, जिसे अब लोग “गोल्डन फड़ संचालक” कहने लगे हैं — वजह? वह हर वक्त सोने से लदा रहता है।
दिन में चपानी, रात को कोतमा – फड़ ऑन व्हील्स!
जोशी का फड़ अब मोबाइल हो चुका है। सूत्र बताते हैं कि दिन के वक्त वह चपानी गांव में क्लास ट्रेनिंग चलाता है, और जैसे ही शाम ढलती है, सुशील अपने चेले-चपाटों के साथ कोतमा पहुंच जाता है, जहां फड़ की असली परीक्षा होती है। हर रात सैकड़ों की भीड़, लाखों की नाल और जोशी का “सोने सा मुस्कुराता चेहरा” – यही पहचान बन चुकी है कोतमा की।
पुलिस का रोल – “कोतमा दर्शन यात्रा”
पुलिस को लेकर अगर कोई प्रतियोगिता हो कि कौन सबसे अच्छे अभिनेता हैं, तो कोतमा पुलिस निःसंदेह पहले स्थान पर आएगी।
जुआ कहां चल रहा है? कौन संचालित कर रहा है? कौन हार रहा, कौन जीत रहा – ये सब जनता जानती है।
लेकिन पुलिस को कुछ नहीं दिखता। शायद जोशी का सोना उनकी आंखों पर चढ़ गया है।
नामचीनों की भीड़, फिर भी ‘सब चुप’
सूत्रों के मुताबिक, जोशी के फड़ में कई नामचीन चेहरे रात के अंधेरे में गुपचुप तरीके से आते हैं, बड़े नोटों की गड्डियां लहराई जाती हैं, और जीतने वाले की ठहाकों में सब कुछ दब जाता है – प्रशासन भी।
दीपू नहीं, जोशी है असली ‘गोल्डन बॉय’
बदरा का दीपू भले एक रात में 35 लाख जीत गया हो, लेकिन फड़ का असली मालिक जोशी हर रात लाखों की नाल काट रहा है। उसके गले में सोने की मोटी चेन, हाथों में चमकते कड़े और हर समय साथ चलने वाले गार्ड्स – सब कुछ उसे कोतमा का अघोषित किंग बना चुके हैं।
प्रशासन की चुप्पी – क्या अगली मंजूरी ‘कैसीनो लाइसेंस’?
हर रोज हो रही यह जुआबाज़ी अब “व्यवसाय” में बदल चुकी है, और कोतमा का आम आदमी पूछ रहा है –
“क्या अगला कदम ये होगा कि सरकार इसे ‘कोतमा कैसीनो प्रोजेक्ट’ के नाम से मान्यता दे दे?”
क्यों नहीं होती कार्रवाई?
क्यों नहीं पुलिस जोशी के खिलाफ कोई केस दर्ज करती?
क्यों नहीं फड़ पर छापा पड़ता?
या फिर इस सोने के साम्राज्य से कुछ और भी चमक रहा है?
जनता का सवाल – कब टूटेगा ताश का महल?
जब कानून के रखवाले ही आंख मूंद लें और जोशी जैसे लोग खुलेआम सोने में लिपटे पत्तों का खेल खेलें, तो समझिए कोतमा अब कानून से नहीं, फड़ से चलता है।
अब देखना है – प्रशासन ताश के इस महल को गिराएगा, या फिर “फड़ का उद्घाटन मंत्री जी से कराएगा।”