वार्ड 17, शहडोल में सागौन के पेड़ बने खतरा अरुण मिश्रा ने कमिश्नर कार्यालय में लगाई गुहार, अब तक नहीं हुई कोई सुनवाई
सुधीर यादव (9407070722)
शहडोल – नगर के वार्ड क्रमांक 17, बाणगंगा क्षेत्र में एक आम नागरिक अरुण मिश्रा लगातार खतरे की आशंका के बीच जीवन जीने को मजबूर है। उनके मकान के ठीक बगल में सागौन के बड़े-बड़े पेड़ खतरनाक रूप से झुक चुके हैं, लेकिन जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। अरुण मिश्रा ने पहले नगर पालिका में और अब कमिश्नर कार्यालय में आवेदन दिया है, लेकिन कार्रवाई का इंतजार अब तक जारी है।
झुके हुए पेड़ कभी भी ले सकते हैं जान
अरुण मिश्रा के घर के समीप स्थित “नथमल फिलिंग स्टेशन” के मालिक द्वारा कई वर्ष पहले सागौन के पेड़ लगवाए गए थे। इन पेड़ों की समय पर छंटाई नहीं की गई, जिसके चलते उनकी डालियां अब मकान की छत से टकराने लगी हैं। कुछ पेड़ बुरी तरह घर की ओर झुके हुए हैं और बारिश-तूफान में कभी भी गिर सकते हैं। पूर्व में एक पेड़ उनके घर पर गिर चुका है जिससे संपत्ति को नुकसान भी हो चुका है।
नगर पालिका और पड़ोसी ने नहीं दिया ध्यान
पीड़ित अरुण मिश्रा ने सबसे पहले संबंधित पेट्रोल पंप मालिक से स्वयं बात की, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने दिनांक 07 जुलाई 2025 को नगर पालिका शहडोल में आवेदन देकर वृक्ष कटाई के लिए निवेदन किया। लेकिन उन्हें न तो संतोषजनक जवाब मिला और न ही कोई कार्यवाही हुई। थक-हारकर उन्होंने 08 जुलाई को कमिश्नर कार्यालय में पुनः आवेदन देकर इस गंभीर खतरे से अवगत कराया।
गरीब परिवार, हर दिन डर के साये में जी रहा
अरुण मिश्रा ने बताया कि वह बेहद गरीब हैं और उनके पास घर की मरम्मत तक के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। ऐसे में यदि पेड़ गिरा तो केवल मकान ही नहीं, परिवार की जान को भी खतरा है। उन्होंने अपील की है कि प्रशासन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए तत्काल वृक्ष कटवाने या छंटवाने की कार्रवाई करे।
कहीं देरी न बन जाए बड़ी दुर्घटना का कारण
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी स्थितियों में प्रशासन की निष्क्रियता आने वाले समय में किसी बड़ी दुर्घटना की वजह बन सकती है। सवाल यह है कि एक गरीब नागरिक के आवेदन पर सुनवाई क्यों नहीं हो रही? क्या किसी हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा?
प्रशासन से मांगी तत्काल मदद
अरुण मिश्रा ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि वार्ड 17, बाणगंगा में स्थित उनके घर के पास लगे सागौन के पेड़ जिन्हें उन्होंने खतरे का कारण बताया है, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। उनका कहना है कि उन्होंने नगर पालिका में पूर्व में भी आवेदन दिया है, जिसकी प्रतिलिपि उन्होंने कमिश्नर कार्यालय में भी संलग्न की है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर स्थिति को कब तक नजरअंदाज करता है और एक गरीब की फरियाद को कितनी अहमियत दी जाती है।