रात, दौड़ती ट्रेन और चाकू की चमक… फिर गायब हो गए लुटेरे तमिल संगम एक्सप्रेस में यात्रियों को घेरकर लूट की सनसनीखेज वारदात;9 हिरासत में, पूछताछ में 30 से ज्यादा नामों का सुराग
रात, दौड़ती ट्रेन और चाकू की चमक… फिर गायब हो गए लुटेरे
तमिल संगम एक्सप्रेस में यात्रियों को घेरकर लूट की सनसनीखेज वारदात;9 हिरासत में, पूछताछ में 30 से ज्यादा नामों का सुराग
कटनी। रात का सन्नाटा था… ट्रेन रफ्तार पकड़ चुकी थी… डिब्बों में ज्यादातर यात्री अपने-अपने सफर में मशगूल थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ मिनटों में उनकी नींद और सफर के बीच चाकू की चमक दहशत बनकर उतरने वाली है।
कटनी रेलवे स्टेशन के करीब पहुंचते ही ट्रेन में कथित तौर पर बदमाशों ने यात्रियों को निशाना बनाया। चाकू दिखाकर धमकाया गया….चीख-पुकार के बीच सामान छीना गया….और फिर ट्रेन रुकने से पहले ही वारदात को अंजाम देकर आरोपी फरार हो गए। जब तक यात्रियों को समझ आता कि हुआ क्या है, बदमाश ट्रेन से उतर चुके थे। पीछे रह गए थे सहमे हुए यात्री, बिखरा सामान और एक सवाल। आखिर ट्रेन के भीतर इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देने वाले कौन थे। अब इस सवाल की जांच ने ऐसा मोड़ लिया है, जिसने कटनी के रेलवे क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों को लेकर पुलिस की चिंता बढ़ा दी है।
एक केस… और खुलने लगी अपराध की दूसरी परत
28 सितंबर की इस वारदात में करीब 86 हजार रुपये की संपत्ति लूटे जाने और चोरी होने की जानकारी सामने आई। जीआरपी थाना कटनी में मामला दर्ज हुआ और जांच शुरू हुई। लेकिन पुलिस के लिए यह सिर्फ एक लूट का मामला नहीं था। चार विशेष टीमें बनाई गईं। करीब 50 पुलिस, जीआरपी और आरपीएफ अधिकारी-कर्मचारी जांच में लगाए गए। इसके बाद शुरू हुआ संदिग्धों की तलाश का सिलसिला। खिरहनी फाटक से लेकर आधारकाप,भट्ठा मोहल्ले तक पुलिस ने दबिशें दीं।
और फिर—एक-एक कर 9 संदिग्ध पुलिस के सामने थे।
पूछताछ शुरू हुई तो बदल गई जांच की दिशा
समीर रूपेंद्र, अनुराग निषाद, जय निषाद, अतुल निषाद, शिवा निषाद, दीपक निषाद, करण निषाद, अरुण निषाद और विकास निषाद को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल था। 28 सितंबर की रात ट्रेन में कौन था
किसने यात्रियों की पहचान की,किसने चाकू दिखाया,
किसने सामान छीना,और वारदात के बाद कौन किस रास्ते से फरार हुआ। पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान संदिग्धों ने काशी तमिल संगम एक्सप्रेस की वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार किए जाने की जानकारी सामने आई है।:लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
जांचकर्ताओं ने पूछा—“और कौन-कौन”
इसके बाद पूछताछ का दायरा बढ़ा दिया गया। 21 जुलाई की ट्रेन क्रमांक 18448 में हुई घटना…28 जुलाई की स्पेशल ट्रेन क्रमांक 03252 की घटना…और रेलवे क्षेत्र में हुई दूसरी वारदातें। क्या इन घटनाओं के पीछे भी वही चेहरे थे। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को कथित तौर पर करीब 30 अन्य अपराधियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। अब पुलिस के सामने सिर्फ 9 संदिग्ध नहीं थे।
जांच का दायरा 30 और नामों तक पहुंच चुका था।
इनमें कौन सक्रिय है,कौन फरार है,किसकी भूमिका क्या रही,और क्या इन सभी के बीच कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
ट्रेन में चढ़ने से पहले होती थी निगरानी
जांच में अब पुलिस इस पहलू को भी खंगाल रही है कि क्या यात्रियों को निशाना बनाने से पहले उनकी रेकी की जाती थी। कौन से यात्री अकेले हैं,किसके पास मोबाइल है,किसके पास जेवर हैं,कौन कब सोता है, और ट्रेन किस स्टेशन पर धीमी होगी,इन तमाम संभावित कड़ियों की जांच की जा रही है। इसके पीछे कौन था, किसका नेटवर्क था और लूट का माल कहां पहुंचता था—इन सवालों का जवाब अब जांच की दिशा तय करेगा।
ICJS में खुल रही पुरानी फाइलें
हिरासत में लिए गए संदिग्धों का आपराधिक रिकॉर्ड ICJS के जरिए खंगाला जा रहा है। पुलिस संबंधित आरोपियों की हिस्ट्रीशीट तैयार करने की प्रक्रिया में भी जुटी है। जांच एजेंसियों के लिए अब अगला लक्ष्य उन करीब 30 अन्य नामों तक पहुंचना है, जिनकी जानकारी पूछताछ में सामने आने की बात कही गई है।
और बड़ा खुलासा बाकी
28 सितंबर की रात ट्रेन में शुरू हुई यह कहानी अब कटनी के रेलवे क्षेत्र में संभावित अपराधी नेटवर्क की जांच तक पहुंच चुकी है। नौ संदिग्ध हिरासत में हैं। करीब 30 अन्य नाम पुलिस के रडार पर बताए जा रहे हैं। कई सवाल अभी बाकी हैं। और सबसे बड़ा सवाल क्या 28 सितंबर की रात हुई लूट महज एक वारदात थी… या यह रेलवे में सक्रिय एक बड़े अपराधी नेटवर्क की सिर्फ एक कड़ी थी। इस सवाल का जवाब पुलिस की आगे की जांच और साक्ष्यों से ही सामने आएगा।