रिश्वत की खुलेआम सौदेबाज़ी, मुचलके पर रिहाई के रेट भ्रष्टाचार का वीडियो वायरल,एक ASI निलंबित.सौ सवाल जिंदा,बहोरीबंद मामला और पुलिस व्यवस्था खाकी की साख पर गंभीर प्रश्न क्या सिस्टम आत्ममंथन करेगा?

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रिश्वत की खुलेआम सौदेबाज़ी, मुचलके पर रिहाई के रेट
भ्रष्टाचार का वीडियो वायरल,एक ASI निलंबित.सौ सवाल जिंदा,बहोरीबंद मामला और पुलिस व्यवस्था
खाकी की साख पर गंभीर प्रश्न क्या सिस्टम आत्ममंथन करेगा?
कटनी।। बहोरीबंद थाना से वायरल हुआ वीडियो केवल एक एएसआई के निलंबन की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सड़ांध की गवाही है, जो यदि समय रहते साफ न की गई, तो पूरे पुलिस तंत्र की विश्वसनीयता को निगल जाएगी। रिश्वत की खुलेआम सौदेबाज़ी, मुचलके पर रिहाई के रेट, फरियादियों को जानबूझकर बैठाने की विलंबकारी नीति और फिर कैमरे के सामने बेखौफ स्वीकारोक्ति यह सब किसी एक भटके हुए कर्मचारी की भूल नहीं, बल्कि एक ऐसे सिस्टम का आईना है, जो जवाबदेही से ज्यादा संरक्षण को प्राथमिकता देता दिखता है।
पुलिस अधीक्षक द्वारा एएसआई संतलाल गोटिंया को तत्काल निलंबित कर रक्षित केंद्र भेजना आवश्यक और प्रशंसनीय कदम है। यह संदेश देता है कि भ्रष्टाचार पर कार्रवाई होगी। लेकिन यहीं से असली परीक्षा शुरू होती है। क्योंकि वीडियो में गूंजा वाक्य टीआई पैसा लेता है, मानेगा थोड़ी महज एक संवाद नहीं, बल्कि कमांड लेवल पर उठता गंभीर आरोप है। यदि इस आरोप पर चुप्पी साध ली जाती है, तो निलंबन न्याय नहीं, केवल डैमेज कंट्रोल बनकर रह जाएगा।
आज सवाल जनता पूछ रही है कि क्या न्याय अब कानून से नहीं, नकद से मिलता है? क्या थाने न्यायालय नहीं, सौदेबाज़ी के काउंटर बनते जा रहे हैं? यदि एक एएसआई कैमरे के सामने रेट तय कर सकता है, तो कैमरे के बाहर रोज़ कितने समझौते होते होंगे, इसकी कल्पना ही भयावह है। यह केवल अवैध वसूली नहीं, बल्कि नागरिकों के आत्मसम्मान पर चोट है। फरियादी जब थाने आता है, तो उम्मीद लेकर आता है न कि सौदे की मजबूरी लेकर। यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि निगरानी तंत्र क्यों विफल हुआ? क्या थाना प्रभारी की जिम्मेदारी केवल कागज़ों तक सीमित है? क्या कमांड की कमजोरी है या मौन संरक्षण? पुलिसिंग अनुशासन, आचरण और भरोसे पर टिकी होती है। मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का उल्लंघन केवल एक अधिकारी ने नहीं किया यदि आरोप सही हैं, तो इसे पनपने दिया गया। इसलिए अब आवश्यकता है स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की जिसमें कमांड लेवल तक जवाबदेही तय हो। एसडीओपी स्तर की जांच का निर्देश स्वागतयोग्य है, पर उसकी पारदर्शिता और परिणाम ही तय करेंगे कि यह कार्रवाई सुधार है या सिर्फ दिखावा।
आज कटनी पुलिस के सामने एक स्पष्ट विकल्प है.कानून या सौदा एक को चुनना होगा। यदि जांच निष्पक्ष होती है, दोषी चाहे किसी भी पद पर हो, उस पर कार्रवाई होती है, और व्यवस्था में सुधार के ठोस कदम उठते हैं तो यह घटना पुलिसिंग को मजबूत करेगी। लेकिन यदि चुप्पी, देरी और चयनात्मक कार्रवाई हुई, तो संदेश साफ जाएगा कि भ्रष्टाचार पर प्रहार नहीं, उसका प्रबंधन किया गया। खाकी की ताकत उसकी वर्दी नहीं, जनता का भरोसा है। और भरोसा मुचलके पर नहीं छोड़ा जा सकता।
जिले के बहोरीबंद थाने से सामने आए एक वायरल वीडियो ने कटनी पुलिस की कथित सख्ती और ईमानदारी के दावों की पोल खोल दी है। वीडियो में थाना बहोरीबंद में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक (ASI) संतलाल गोटिया न केवल रिश्वत मांगने की बात स्वीकार करता दिख रहा है, बल्कि मुचलके पर रिहाई के बदले 5000 और 3000 रुपये लेने की सौदेबाज़ी खुलेआम करता नजर आ रहा है।
वीडियो के सोशल मीडिया पर आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ASI संतलाल गोटिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केंद्र कटनी में पदस्थ कर दिया। एसपी कार्यालय के अनुसार, ASI का आचरण मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के प्रतिकूल, असंनिष्ठ, गंभीर कदाचरण एवं आशोभनीय पाया गया।

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