पेंट और ड्रायफ्रूट घोटाले ने गरमाई सियासत,सांसद ने दी चेतावनी, ब्यौहारी विधायक बोले विधानसभा में उठेगा मामला

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गरीबों के पैसों की लूट किसी कीमत पर नहीं होगी बर्दाश्त
शहडोल। आदिवासी बाहुल्य जिले में उजागर हुए कथित स्कूल पेंट और ड्रायफू्रट खर्च घोटाले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। मामूली बिलों में हजारों मजदूर और मनमाने व्यय दर्शाकर सरकारी खजाने को चूना लगाने के इस प्रकरण ने शहडोल से लेकर भोपाल और दिल्ली तक की राजनीति को हिला दिया है। इस घोटाले पर शहडोल की सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि, यह जनता के पैसों से किया गया खुला भ्रष्टाचार है, जिसे न तो हम छोड़ेंगे और न ही हमारी सरकार। वहीं ब्यौहारी विधायक शरद कोल ने भी इस मामले में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे विधानसभा में उठाने की बात कही है।
सोशल मीडिया पर सनसनी
ब्यौहारी ब्लॉक के अंतिम छोर पर स्थित सकंदी और निपनिया प्राथमिक शालाओं से जुड़ा हुआ है। स्कूल भवन की पुताई के लिए जहां 24 लीटर ऑयल पेंट का उपयोग दर्शाया गया, वहीं बिलों में 443 मजदूर और 251 राजमिस्त्री को कार्यरत बताया गया। यह सब कुछ तब सामने आया जब पुताई के बिल सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसके बाद इस फर्जीवाड़े को लेकर जनता, जनप्रतिनिधियों और अफसरशाही में हलचल मच गई। वहीं दूसरी ओर गोहपारू जनपद पंचायत के ग्राम भदवाही में जलगंगा संवर्धन कार्यक्रम के नाम पर आयोजित एक घंटे की चौपाल में 14 किलो काजू-बादाम, 30 किलो नमकीन, 6 लीटर दूध, और 5 किलो शक्कर का खर्च दिखाया गया। यही नहीं, भवन निर्माण के नाम पर प्रस्तुत बिलों में फल, सब्जी और किराना सामग्री जोडक़र भारी-भरकम खर्च दर्शाया गया है। इन दोनों मामलों ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि आदिवासी अंचलों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी गंभीर शंका पैदा कर दी है।
सांसद हिमाद्री सिंह का सख्त रुख
सांसद हिमाद्री सिंह ने तीखे शब्दों में कहा कि यह सीधे तौर पर गरीबों के हक पर डाका है। उन्होंने कहा कि ऐसे घोटालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और शासन स्तर पर उच्च स्तरीय जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सांसद ने आगे कहा, जो भी अधिकारी या कर्मचारी इसमें संलिप्त हैं, उन्हें किसी भी सूरत में छोड़ा नहीं जाएगा। यह घोटाले गरीबों के अधिकारों और आदिवासी समुदाय के विश्वास के साथ छल हैं, जिसे हमारी सरकार कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।
विधानसभा में उठेगा मामला
वहीं इस मामले को आड़े हाथों लेते हुए ब्यौहारी विधायक शरद कोल ने भी कहा कि वे इस घोटाले से बेहद आहत हैं और उन्होंने मांग की है कि इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। साथ ही विधायक ने स्पष्ट किया कि यदि जरूरत पड़ी तो, वे इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाएंगे ताकि दोषियों को सार्वजनिक रूप से बेनकाब किया जा सके। उन्होंने कहा हम जनता के प्रतिनिधि हैं, और यह हमारा दायित्व है कि हम उनके पैसों की रक्षा करें। कोई भी कितना भी बड़ा हो, यदि वह दोषी है, तो उसे सजा जरूर मिलेगी।
प्रशासन में मची खलबली
सांसद और विधायक के तीखे रुख के बाद जिला प्रशासन में भी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ द्वारा संबंधित जनपद और पंचायत अधिकारियों से प्रारंभिक रिपोर्ट मांगी गई है। वहीं सोशल मीडिया पर वायरल दस्तावेजों को लेकर अफसरों की बैठकों का दौर भी जारी है। इन घोटालों की खबरें सामने आने के बाद आम जनता और पंचायतों के जागरूक नागरिकों में भी भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि जब स्कूलों में पेंट के नाम पर सैकड़ों मजदूर और ड्रायफ्रूट के नाम पर लाखों खर्च दिखाए जाते हैं, तो यह भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि सांसद और विधायक के हस्तक्षेप के बाद इन मामलों में निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई जरूर होगी।

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