गोरखपुर पंचायत में ‘कागजी’ विकास की खुली पोल: हर वार्ड में गंदगी और बदहाली का आलम, मरम्मत व सफाई के नाम पर लाखों का आहरण!निजी खर्च पर मुरूम डलवाने पर भी पंचायत की ‘लीपापोती’ की कोशिश नाकाम; ‘नो बजट’ का रोना रोने वाले सरपंच पर उठे सवाल
गौरेला (छत्तीसगढ़):
जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के विकासखंड गौरेला अंतर्गत ग्राम पंचायत गोरखपुर में विकास के दावे पूरी तरह कागजी साबित हो रहे हैं। हालात यह हैं कि पूरे गांव के लगभग हर एक वार्ड में गंदगी, बजबजाती नालियां और जर्जर सड़कों की वजह से अव्यवस्था का अंबार लगा हुआ है। शासकीय दस्तावेजों में भले ही नाली सफाई और सड़क मरम्मत के नाम पर लाखों रुपए खर्च दिखाए जा रहे हों, लेकिन धरातल पर ग्रामीणों को सिर्फ बदहाली नसीब हो रही है।
वार्ड 15 में निजी प्रयास पर पंचायत का ‘क्रेडिट’ लेने का खेल
पंचायत की कार्यशैली का ताजा उदाहरण वार्ड क्रमांक 15 (पंडरीपानी मार्ग) में देखने को मिला। मार्ग की बदहाली से परेशान वार्ड वासियों ने जनसहयोग से एक निजी ठेकेदार से निवेदन कर सड़क पर मुरूम डलवाया, ताकि आवागमन बहाल हो सके।
लेकिन आरोप है कि पंचायत द्वारा इस पर जबरन रोलर/सफाई कराकर इसे सरकारी खाते में चढ़ाने और राशि के बंदरबांट की कोशिश की गई। ग्रामीणों ने पंचायत की मंशा को भांपते हुए सख्त ऐतराज जताया और साफ कह दिया कि वे अपने निजी व्यय से ही मुरूम बिछवाएंगे, ताकि किसी भी प्रकार का फर्जी बिल न निकाला जा सके।
हर वार्ड में गंदगी और नालियां की स्थित बदहाल, जिम्मेदार बेपरवाह
ग्राम गोरखपुर के विभिन्न वार्डों का जायजा लेने पर सामने आया कि समस्या केवल एक मार्ग तक सीमित नहीं है। गांव के प्रत्येक वार्ड में नालियां कचरे से पटी पड़ी हैं, गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है और स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से शो-पीस बनी हुई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों में नियमित नाली सफाई और रोड मेंटेनेंस का खेल चलाकर शासकीय राशि का आहरण तो नियमित रूप से किया जा रहा है, मगर जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप है।
सरपंच का ‘नो बजट’ का बहाना, इधर लाखों के आहरण की चर्चा
वार्ड क्रमांक 14 के निवासी हाजी मोहम्मद सलीम ने बताया कि जब इस बुनियादी बदहाली और समस्याओं के निदान के लिए सरपंच राम प्रकाश से बात की गई, तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि वर्तमान में इन कार्यों के लिए कोई मद (बजट) नहीं आया है और फंड आने पर ही काम कराया जाएगा।
वहीं दूसरी ओर, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2026 के माह मार्च से जुलाई के बीच ही ग्राम पंचायत खाते से सामुदायिक भवन, नाली साफ सफाई, स्वच्छता अभियान और रोड मरम्मत इत्यादि के नाम पर लाखों रुपए आहरित किए जा चुके हैं।
जांच की मांग पर अड़े ग्रामीण
जब लाखों रुपए की राशि पहले ही आहरित की जा चुकी है, तो फिर गांव के हर वार्ड में यह बदहाली क्यों पसरी है? ग्रामीण अब इस बात को लेकर लामबंद हो रहे हैं कि पंचायत द्वारा पिछले कुछ महीनों में निकाले गए पैसों और कराए गए कथित कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व संबंधित उच्चाधिकारियों से मांग की है कि पूरे ग्राम पंचायत गोरखपुर के विकास व निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि कागजी विकास की आड़ में हो रहे भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके।