तालाब में ज़हर या कचरे का असर? शहर के बीच हजारों मछलियों की मौत से हड़कंप
(अनिल तिवारी)शहडोल। मुख्यालय में नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत चौपाटी से सटे सिटी टैंक तालाब में बुधवार सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब लोगों ने तालाब की सतह पर हजारों मरी हुई मछलियां तैरती देखीं। झूला पुल क्षेत्र के पास स्थित इस तालाब को लेकर शहर में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कोई इसे शरारती तत्वों द्वारा ज़हर घोलने की आशंका बता रहा है, तो कोई चौपाटी और आसपास की दुकानों से निकलने वाले कचरे और गंदे पानी को इसकी वजह मान रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार मंगलवार रात तक तालाब सामान्य स्थिति में था। लेकिन बुधवार की सुबह जैसे ही आसपास के रहवासी और मॉर्निंग वॉक पर निकले लोग पहुंचे, तो उन्होंने तालाब में बड़ी संख्या में मृत मछलियां देखीं। देखते ही देखते खबर पूरे शहर में फैल गई और मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। दुर्गंध फैलने लगी, जिससे आसपास का वातावरण भी प्रभावित हुआ।
लोगों का कहना है कि यह तालाब लंबे समय से नगर पालिका की अनदेखी का शिकार है। चौपाटी पर लगने वाले ठेलों, विशेषकर बिरयानी और अन्य खाद्य पदार्थ बेचने वालों द्वारा निकलने वाला गंदा पानी और कचरा वर्षों से इसी तालाब की ओर बहाया जा रहा है। कई बार स्थानीय नागरिकों ने इसकी शिकायत भी की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब आशंका जताई जा रही है कि लगातार हो रहे प्रदूषण के कारण तालाब का पानी जहरीला हो गया, जिससे मछलियों की सामूहिक मौत हुई।
वहीं कुछ लोगों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मछलियों का एक साथ मरना सामान्य प्रदूषण से संभव नहीं है। उनका कहना है कि यह किसी बदमाश तत्व द्वारा तालाब में ज़हर घोले जाने का मामला भी हो सकता है। शहर के बीचों-बीच स्थित इस तालाब में अगर जानबूझकर ज़हरीला पदार्थ डाला गया है, तो यह न केवल पर्यावरण बल्कि आम नागरिकों की सेहत के लिए भी गंभीर खतरा है।
इस घटना ने नगर पालिका की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों का आरोप है कि अगर समय रहते चौपाटी के कचरे की उचित व्यवस्था की जाती और तालाब की नियमित सफाई होती, तो शायद यह स्थिति पैदा नहीं होती। मछलियों की मौत से जलीय जीवन को तो नुकसान हुआ ही है, साथ ही तालाब के पानी की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
सूचना मिलने के बाद नगर पालिका और संबंधित विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों का कहना है कि पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे, ताकि मछलियों की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मामला ज़हर का है या लंबे समय से हो रहे प्रदूषण का नतीजा।
फिलहाल, शहर के लोगों में आक्रोश है और वे मांग कर रहे हैं कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, साथ ही सिटी टैंक तालाब को प्रदूषण-मुक्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।