रेत के कारोबार पर फिर उठे सवाल, ट्रैक्टर हादसे में चालक की मौत; भाजपा नेता के रिश्तेदार पर अवैध उत्खनन कराने के आरोप
(अमित दुबे)
शहडोल। जिले में रेत के कथित अवैध कारोबार और उससे जुड़े हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अवैध उत्खनन और परिवहन रोकने की कार्रवाई के दौरान पटवारी और एएसआई की मौत के बाद भी यह मुद्दा लगातार सवालों के घेरे में है। हाल ही में ब्यौहारी में रेत उत्खनन रोकने पहुंचे नायब तहसीलदार की गाड़ी को टक्कर मारने की घटना सामने आई थी। अब जयसिंहनगर में ट्रैक्टर हादसे में चालक की मौत ने एक बार फिर रेत कारोबार की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजनों और मजदूरों ने एक कथित भाजपा नेता के दामाद पर अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

रेत लेने निकला था आकाश, रास्ते में पेड़ से टकराया ट्रैक्टर
हादसा जयसिंहनगर थाना क्षेत्र के कौआसराई में सोनू ढाबा के पास होना बताया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक-9 निवासी आकाश बैगा ट्रैक्टर लेकर रेत लेने जा रहे थे। इसी दौरान ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े पेड़ से जा टकराया। टक्कर इतनी गंभीर रही कि चालक आकाश की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में शोक व्याप्त है। वहीं, हादसे की परिस्थितियों और इसके पीछे की वजहों को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
परिजनों और मजदूरों का आरोप, रेत कारोबार से जुड़ा था घटनाक्रम
मृतक के पिता, रिश्तेदारों और रेत की लोडिंग-अनलोडिंग में लगे मजदूरों ने एक कथित भाजपा नेता के दामाद पर क्षेत्र में अवैध रूप से रेत का उत्खनन और परिवहन कराने के आरोप लगाए हैं। आरोप लगाने वालों का दावा है कि आकाश इसी सिलसिले में रेत लेने जा रहे थे, तभी रास्ते में यह हादसा हो गया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल यह स्पष्ट होना बाकी है कि हादसे का कथित अवैध रेत कारोबार से कोई प्रत्यक्ष संबंध था या नहीं। इसकी वास्तविक स्थिति पुलिस और संबंधित विभागों की जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। आरोपों से जुड़े व्यक्ति का पक्ष भी सामने आना बाकी है।
पुलिस ने दर्ज किया मर्ग, जांच के बाद स्पष्ट होंगी परिस्थितियां
मामले में जयसिंहनगर थाना प्रभारी अजय कुमार बैगा ने बताया कि ट्रैक्टर चालक की मौत पेड़ से टकराने के कारण हुई है। पुलिस ने मर्ग कायम कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। हादसे की परिस्थितियों के साथ-साथ परिजनों और मजदूरों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर तक पहुंचती है, इस पर भी क्षेत्र की निगाहें टिकी हैं।
हादसों के बाद कार्रवाई, लेकिन रेत कारोबार पर नियंत्रण कब?
शहडोल जिले में रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर पहले भी गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कार्रवाई के दौरान सरकारी कर्मचारियों की मौत और अधिकारियों की गाड़ियों को टक्कर मारने के कथित मामलों ने व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में जयसिंहनगर की घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि आखिर रेत के कारोबार की निगरानी और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग कितने प्रभावी ढंग से काम कर रहे हैं।

अब देखना होगा कि पुलिस और खनिज विभाग मृतक के परिजनों एवं मजदूरों के आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या कथित अवैध उत्खनन और परिवहन के नेटवर्क की निष्पक्ष जांच होगी? क्या आरोपों की पुष्टि होने पर जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय कर कार्रवाई की जाएगी? और सबसे अहम सवाल—क्या शहडोल में रेत के अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो सकेगा, या हर हादसे के बाद जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया ही सुर्खियों में रह जाएगी?