जमीन गिरवी के नाम पर करा ली गई रजिस्ट्री

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सदमें में गई कास्तकार की जान

मामला संभागायुक्त कार्यालय में विचाराधीन

उमरिया। बांधवगढ़ में बेस्कीमती जमीन की रजिस्ट्री पूंजीपति सेठ द्वारा कास्तकार को धोखे में रख करा ली गई, जिस सदमें में कास्तकार की मौत भी हो गई, लेकिन कास्तकार के परिजन दफ्तरों के चक्कर न्याय के उम्मीद बांधे लगा रहे हैं, किन्तु पूंजीपति के आगे नतमस्तक राजस्व अधिकारी द्वारा कार्यवाही के नाम पर मुंह मोड लेने से पीडि़त जमीन के लिए दर-दर भटक रहा है। सूबे में सीएम के निर्देश हैं कि किसानों और गरीबों का शोषण करने वाले सूदखोरों के खिलाफ कार्यवाही करना है , जिससे किसी अन्नदाता की जान सूदखोरी की भेंट न चढ़े बावजूद इसके सूबे के मुखिया के यह सपने मानपुर में दम तोड रहा है। पहले तो धोखे में रख सूदखोरी के फेर में किसान की जमीन का विक्रय पत्र बनवाते हुए भूमि हथिया ली गई, वहीं मामला संभागायुक्त के यहां विचाराधीन होने के बाद भी आय दिन पीडि़त परिवार को रसूख के दम पर दबाव बनाने की हो रही है और पूंजिपति द्वारा जबरन बाउड्रीवॉल बना लेने की धमकी भी दी जा रही है।
यह है मामला
मानपुर जनपद के जमुनारा गांव के आर्थिक रूप से कमजोर शील कुमार सेन के भूमि से है, जो अपने 9 बच्चे व पत्नि के साथ अपने पुस्तैनी जमीन 5 एकड़ में खेती कर अपने परिवार का जीवन व्यापन करता था, लेकिन बच्चों के विवाह वास्ते अबूझ किसान पैसों के लिए क्षेत्र के कुछ दलालों से संपर्क साधा जिसके बाद भूमि के दलालों ने जमीन गहन से पैसे दिलाने के नाम पर जिले के पूंजिपति व्यवसायी जितेश हेमनानी से मिलाते हुए अबूझ किसान को जमीन गिरवी के नाम पर सूद में पैसे दिलाने के एवज में इसके भूमि की रजिस्ट्री जितेश हेमनानी के नामे विक्रय पत्र के आधार पर 2 लाख रूपये में करा दी।
शंका के घेरे में रजिस्ट्री
बांधवगढ टाईगर रिजर्व होने के कारण व्यावसायीकरण का बिंदु बना हुआ है, जिस वजह से वहा के जमीनों का भाव आस-मान छू रहे हैं, ऐसे में विक्रय पत्र के आधार पर महज दो लाख रूपये में भूमि की रजिस्ट्री अबूझ किसान शील कुमार सेन से करा लेना शंका के घेरे में है, जिसे लेकर गांव में भी चर्चाएं यही है कि शील कुमार को धोखे में रख दलालों के मार्फत पूंजिपति सेठ द्वारा रजिस्ट्री करा ली गई, जिस कारण से चिंता में असमय उनकी मृत्यु सदमें में हो गई। आलम यह है कि और भी बहुत से सवाल इस रजिस्ट्री से उठ रहे हैं, जिसके बाद धोखे में रख अबूझ किसान से कराए गए रजिस्ट्री को पीडित परिवार अमान्य कराना चाहता है।

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