जानकारी छुपाने सचिव ने गढ़ा RTI का नया ‘फर्जी कानून’: कहा- ‘एक साल में सिर्फ एक ही सवाल पूछ सकते हैं’, गौरेला के पतरकोनी पंचायत का कारनामा

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मोहम्मद शाकिब खान मुख्य संवाददाता गौरेला

 

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM) | 30 अप्रैल 2026

सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम 2005 देश के नागरिकों को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने और सवाल पूछने का मजबूत हथियार देता है।

 

लेकिन गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के जनपद पंचायत गौरेला के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पतरकोनी में जन सूचना अधिकारी/पंचायत सचिव ने इस कानून का सरेआम मजाक बना दिया है।

 

पंचायत के कार्यों की जानकारी और बिलों की पोल खुलने के डर से सचिव ने RTI एक्ट का अपना ही एक ‘नया कानून’ इजाद कर लिया और एक बेहद बेतुका तर्क देकर आवेदन को निरस्त कर दिया है।

 

क्या है पूरा मामला?

 

गोरखपुर निवासी जागरूक नागरिक मोहम्मद शाकिब खान ने ग्राम पंचायत पतरकोनी में वर्ष 2024 से 2026 के बीच हुए विकास कार्यों और आय-व्यय का हिसाब मांगने के लिए RTI लगाई थी। आवेदक ने मुख्य रूप से 5 बिंदुओं पर बिल्कुल स्पष्ट और न्यायसंगत जानकारी मांगी थी:

शासकीय योजनाएं: वर्ष 2024 से 2026 तक स्वीकृत सभी शासकीय योजनाओं की सूची।

 

बिल-वाउचर: निर्माण कार्यों में प्रयुक्त सामग्री और मजदूरी के बिल-वाउचर की प्रतियां।

 

विकास निधि: मध्य क्षेत्र विकास निधि की राशि और खर्च का ब्यौरा।

 

15वां वित्त आयोग: 15वें वित्त आयोग से प्राप्त राशि का वर्षवार विवरण।

 

मापन पुस्तिका (MB): 15वें वित्त की राशि से हुए कार्यों का खर्च विवरण (व्यय पत्रक) और मापन पुस्तिका की प्रमाणित प्रतियां।

 

आवेदक ने यह भी स्पष्ट किया था कि पन्नों की संख्या अधिक होने पर वह अतिरिक्त शुल्क देने को तैयार हैं।

 

जन सूचना अधिकारी का हास्यास्पद और गैर-कानूनी फरमान

जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय, पतरकोनी ग्राम पंचायत की जन सूचना अधिकारी (अंजनी यादव) ने 29 अप्रैल 2026 को आवेदन को सिरे से खारिज कर दिया। ऑनलाइन पोर्टल और आधिकारिक जवाब में जो कारण बताया गया, वह किसी भी कानून के जानकार को हैरत में डाल देगा।

 

सचिव ने लिखित जवाब में कहा: “सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत धारा 6 (1) में एक वर्ष में एक ही बिन्दु पर जानकारी दी जावेगी। आपके आवेदन में एक से अधिक बिंदु होने के कारण आवेदन निरस्त किया जाता है।

 

तथ्य: भारत के सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 में ऐसा कोई भी प्रावधान नहीं है जो यह कहता हो कि नागरिक ‘एक साल में सिर्फ एक ही बिंदु’ पर जानकारी मांग सकता है। धारा 6(1) केवल जानकारी मांगने की प्रक्रिया को परिभाषित करती है।

 

यह नियम स्पष्ट रूप से जानकारी को रोकने के लिए गढ़ा गया एक मनगढ़ंत तर्क है।

 

अनियमितताओं की आशंका और आवेदक की त्वरित कार्रवाई

बिल-वाउचर और MB (मापन पुस्तिका) की जानकारी छुपाने की यह बौखलाहट साबित करती है कि कागजों पर हुए विकास कार्यों और धरातल की वास्तविकता में बड़ा अंतर हो सकता है।

 

इस मनमाने रवैये के आगे न झुकते हुए, आवेदक मोहम्मद शाकिब खान ने 30 अप्रैल 2026 को तत्काल प्रथम अपील दायर कर दी है। यह अपील प्रथम अपीलीय अधिकारी (मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत गौरेला) के समक्ष प्रस्तुत की गई है, जो वर्तमान में प्रक्रियाधीन (Under Process) है।

 

क्या उच्चाधिकारी लेंगे संज्ञान?

अब सवाल यह उठता है कि क्या जिले के कलेक्टर और जिला पंचायत CEO को अपने मातहत काम करने वाले ऐसे पंचायत सचिवों के इस रवैये की जानकारी है? क्या पतरकोनी पंचायत में हुए 2024 से 2026 तक के कार्यों की उच्च स्तरीय जांच नहीं होनी चाहिए?

 

यदि प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो राज्य सूचना आयोग में अपील जाने पर RTI एक्ट की धारा 20(1) और 20(2) के तहत भ्रामक जवाब देने और मनगढ़ंत नियम बताने वाले अधिकारी पर ₹25,000 तक का भारी जुर्माना और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।

 

जिले भर की निगाहें अब जनपद पंचायत गौरेला के CEO के फैसले पर टिकी हैं।

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