सांसारिक विषयों से छूटकर ही आत्म कल्याण संभव : सूर्यकांत

शहडोल। आत्मदेव अर्थात आत्मा, धुंधली का अर्थ मन, गोकर्ण का मतलब सतज्ञान है। धुंधकारी का आशय विषय है, यदि जीव सत्मार्ग में चलकर सत्य, सत्संग के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करें तो विषयों से छूटकर आत्म कल्याण कर सकता है, वहीं सम्पूर्ण सृष्टि के आदि, मध्य और अंत के बाद परमात्मा ही परम सत्य है। उक्त बात खैरहा गांव में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के दौरान पंडित सूर्यकांत शुक्ला जी महाराज ने कथा के दूसरे दिवस के दौरान कही। उन्होंने गौकर्ण आत्मदेव संवाद, धुंधकारी मोक्ष, कुंती स्तुति, परीक्षित जन्म, परीक्षित श्राप, सृष्टि वर्णन, मनु सतरूपा वंश वर्णन आदि कथाओं का वर्णन का विस्तार से किया। गौरतलब है कि खैरहा गांव में सुधीर शर्मा के आवास में 04 मार्च से 11 मार्च तक श्रीमद भागवत कथा का आयोजन चल रहा है, जिसमें मुख्य यजमान पंडित रमाकान्त शर्मा व उनकी धर्मपत्नी श्रीमती निर्मला शर्मा कथा श्रवण कर रहे है, कथा के दौरान क्षेत्र भर के सैकड़ो संख्या मौजूद रहे।