पंचायतों में लग रहे सेंगर कंस्ट्रक्शन के निरस्त जीएसटी बिल
आंखों में पट्टी बांधकर जिम्मेदार कर रहे भुगतान
(कमलेश यादव)
उमरिया। सरकार ने जिस मंशा से 4 वर्ष पहले वस्तु एवं सेवा कर (जीसटी) को लागू किया था, उसके सपनों को ठेकेदार चकनाचूर करने में जुटा हैं। शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने में सेंगर कंस्ट्रक्शन निरस्त जीएसटी नंबर के सहारे भारी भरकम बजट के बिल पंचायतों में लगा रहा हैं। वहीं पंचायत मे बैठे नुमाइंदे भी सरकार के आस्था पर गहरी चोंट दे रहे हैं। सरकार भ्रष्टाचार रोकने के सपने बुन रही है और प्रशासनिक नुमाइंदे ठेकेदारों से रिस्तेदारी निभाकर सपनों को कुचलने का्र प्रयास कर रहे हैं।
यह है पूरा मामला
मानपुर जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्य के बिल लगाकर भुगतान किए जा रहे हैं, किन्तु बिल पर लिखे जीएसटी नंबर निरस्त हो चुके हैं। ऐसा ही एक मामला मेसर्स सेंगर कॉस्ट्रेक्शन नामक फर्म का है, जिसके द्वारा निरस्त हुए जीएसटी नंबर का बिल लगाकर लाखों रूपये का भुगतान करा लिया गया है, यही नहीं पंचायत में बैठे जिम्मेदारों ने भी चहेते को लाभान्वित करने कोई कोर कसर नहीं छोड़ा।
जीएसटी हुई निरस्त
ठेकेदार के द्वारा निर्माण कार्य को लेकर जांच की जाए तो और भी कारनामें खुल सकते हैं, लेकिन फिलहाल ठेकेदार द्वारा की जा रही जीएसटी में धांधली का नया कारनामा सामने आया है। सेंगर कंस्ट्रक्शन द्वारा पंचायतों में जीएसटी अंकित बिल लगाया गया है, लेकिन उक्त जीएसटी नंबर निरस्त है। सूत्रों की माने तो इनके द्वारा जब तक जीएसटी एक्टीव रहा, उस समय भी कई माह के लाखों रूपये के निर्माण कार्य सामाग्री का जीएसटी नहीं जमा किया गया।
जांच से उठेगा पर्दा
सेंगर कॉस्ट्रक्शन के प्रोपराईटर के इस कारनामे से शासन को कई लाख का नुकसान हुआ तो, वहीं इनके द्वारा शासन को भी गुमराह करने का प्रयास किया गया है। यदि इनके कारनामों की जांच की जाए तो पूरे मामले से पर्दा उठ सकता है। मामले को लेकर जीएसटी के सीटीओ अधिकारी से संपर्क साधा गया तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।