कांग्रेस पर गंभीर आरोप: नाबालिग को आगे कर रचा गया राजनीतिक स्टंट?

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भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री कैलाश विशनानी ने उठाए तीखे सवाल, बोले कानून से ऊपर कोई नहीं
शहडोल। मुख्यमंत्री के हालिया दौरे के दौरान हुए काला झंडा प्रदर्शन और एक नाबालिग की गिरफ्तारी को लेकर जिले की राजनीति गरमा गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री कैलाश विशनानी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह राजनीतिक विरोध के नाम पर नाबालिगों को आगे कर रही है?
कैलाश विशनानी ने बयान जारी कर पूछा कि क्या 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल करना जिम्मेदार राजनीति की श्रेणी में आता है? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके भी नियम और मर्यादाएं होती हैं। यदि कोई दल जानबूझकर नाबालिगों को आगे कर राजनीतिक संदेश देना चाहता है, तो यह नैतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से चिंताजनक है।
सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन
श्री विशनानी ने कहा मुख्यमंत्री राज्य का संवैधानिक पद है। उनके दौरे के दौरान काला झंडा दिखाना केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था में सेंध के रूप में भी देखा जा सकता है।
कांग्रेस कानून से ऊपर नहीं
कैलाश विशनानी ने कहा कि यदि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की है, तो उसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह स्पष्ट करे कि क्या वह स्वयं को कानून से ऊपर मानती है? जब पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा और सुरक्षा उल्लंघन के आधार पर कार्रवाई की, तो उसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताना दोहरा मापदंड है।
भाजपा नेता ने यह भी प्रश्न उठाया कि क्या यह पूरा घटनाक्रम पूर्व नियोजित राजनीतिक स्टंट था? क्या जानबूझकर एक नाबालिग को आगे कर माहौल बिगाड़ने और प्रशासन को कठघरे में खड़ा करने की रणनीति बनाई गई थी? उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं जिले की छवि को धूमिल करती हैं और निवेश व विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।
लोकतांत्रिक विरोध या शासकीय कार्य में बाधा?
विशनानी ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन शासकीय कार्यक्रम में बाधा डालना, सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ना और संवेदनशील पद पर आसीन व्यक्ति को घेरने का प्रयास करना लोकतांत्रिक विरोध की श्रेणी में नहीं आता। यदि यह विरोध था, तो क्या यह निर्धारित स्थान और समय पर, नियमों के तहत किया गया? या फिर यह अचानक किया गया प्रदर्शन था जिसका उद्देश्य केवल सुर्खियां बटोरना था?
प्रदेश अध्यक्ष के दौरे पर भी टिप्पणी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के प्रस्तावित शहडोल दौरे पर भी कैलाश विशनानी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्या शहडोल की कानून व्यवस्था को मुद्दा बनाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है? “यदि वास्तव में कानून व्यवस्था पर चिंता है, तो पहले यह बताएं कि विरोध के नाम पर नाबालिग को आगे करना किस नैतिकता का हिस्सा है ?

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