सेवा भाव से विज्ञान तक: कामता ने हासिल की बायोटेक्नोलॉजी में डॉक्टरेट

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शहडोल। राष्ट्रीय सेवा योजना के पूर्व दलनायक और घरौला मोहल्ला निवासी कामता पाण्डेय ने बायोटेक्नोलॉजी विषय में डॉक्टरेट  की उपाधि प्राप्त कर जिले और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वे प्रेमलाल पाण्डेय एवं श्रीमती गीता पाण्डेय के सुपुत्र हैं।
कामता पाण्डेय ने यह महत्वपूर्ण उपलब्धि स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय, सागर  से अर्जित की। यह शोधकार्य उन्होंने प्रोफेसर डॉ. भरतशरण सिंह पूर्व अध्यक्ष, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग की प्रेरणा से तथा डॉ. मनीष के.अग्रवाल के कुशल मार्गदर्शन में पूर्ण किया। उनका शोध बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में औद्योगिक उपयोगिता को बढ़ाने से जुड़ा है। शोध का विषय सेल्यूलोज से प्राप्त उत्पादों के औद्योगिक महत्व को बढ़ाने के लिए प्रभावी जैव-परिवर्तन तकनीकों का अध्ययन रहा, जो उद्योग और पर्यावरण संरक्षण दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एनएसएस जैसे सेवा भाव से जुड़े संगठन से निकलकर उच्च स्तरीय वैज्ञानिक शोध तक पहुंचने का कामता पाण्डेय का यह सफर आज के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र में गर्व का माहौल है।
डॉक्टरेट की उपाधि मिलने पर श्रीमती विमला-प्रभात पाण्डेय, श्रीमती उषा-दिलीप पाण्डेय, सुषमा-श्रीनिवास शुक्ला, डॉ. परीक्षित सिंह बघेल, देवेंद्र शुक्ला, श्रीमती एकता-कामता पाण्डेय, कुलदीप शुक्ला, प्रवीण पाण्डेय सहित परिजनों और शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त किया।
वहीं एनएसएस से जुड़े पूर्व दलनायक और स्वयंसेवकों में डॉ. सतेंद्र सिंह चौहान, डॉ. प्रीति पाण्डेय, अधिवक्ता वीरेश पाण्डेय, अनूप शर्मा, रावेंद्र सिंह, धीरेंद्र शुक्ला, अतुल तिवारी, गोविंद तिवारी, सूर्यप्रताप सिंह, ओम जी मिश्र, देवब्रत उपाध्याय, मो. शेख इकबाल, अरुणेंद्र पाण्डेय, राकेश सहित सभी साथियों ने शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कामता पाण्डेय की यह उपलब्धि साबित करती है कि सेवा, समर्पण और सतत परिश्रम से किसी भी ऊंचाई को हासिल किया जा सकता है।

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