श्याम तेरे वास्ते रोक दिए एंबुलेंस और स्कूल के रास्ते
(अनिल तिवारी)
शहडोल। कहते हैं, जिसकी लाठी उसकी भैंस… और जब सैया कोतवाल हो तो फिर डर किस बात का। प्रदेश में लंबे समय से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा का शक्ति प्रदर्शन सोमवार को शहडोल में ऐसा नजर आया कि आम जनता की परेशानियां चर्चा का विषय बन गईं। मामला भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर के नगर आगमन से जुड़ा है, जहां स्वागत की तैयारियों ने शहर के कई हिस्सों में जाम जैसी स्थिति पैदा कर दी।
संभागीय मुख्यालय शहडोल में जिला संयुक्त कार्यालय के सामने की तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें चार से छह जेसीबी मशीनों को सड़क पर खड़ा कर उनके ऊपर फूलों और गुब्बारों से सजावट की गई। इन जेसीबी पर युवा मोर्चा के पदाधिकारी खड़े होकर स्वागत की तैयारी करते दिखाई दिए। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि स्वागत के लिए सड़क जाम करना कितना जरूरी था, जबकि सामान्य तरीके से फूलमालाओं के साथ भी कार्यक्रम किया जा सकता था।
जिला संयुक्त कार्यालय के सामने इस व्यवस्था के कारण सड़क पर लंबा जाम लग गया। तस्वीरों में एक एंबुलेंस भी इसी जाम में फंसी दिखाई दी, जिससे लोगों में नाराजगी देखी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वागत कार्यक्रम किसी मैदान या खुले स्थान—जैसे गांधी स्टेडियम या बाणगंगा मैदान—में किया जा सकता था, जिससे आम जनता को परेशानी न होती।
दूसरी ओर, रघुराज हायर सेकेंडरी स्कूल के पास भी इसी तरह की तैयारियों के कारण बच्चों को स्कूल पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अभिभावकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राजनीतिक कार्यक्रमों के कारण स्कूली बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होना चिंताजनक है।
मुख्य मार्गों, खासकर बूढ़ी देवी मंदिर मार्ग पर भी जाम की स्थिति बनी रही। कलेक्ट्रेट और अन्य सरकारी दफ्तरों में काम से पहुंचने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग समय पर अपने दफ्तर या कामकाज तक नहीं पहुंच सके।
शहर में चर्चा है कि आखिर ऐसा कैसा स्वागत, जिससे एंबुलेंस तक के रास्ते रुक जाएं और छात्र स्कूल न पहुंच पाएं। राजनीतिक दलों के शक्ति प्रदर्शन का असर सीधे आम जनता पर पड़ता नजर आया।
बताया जा रहा है कि युवा मोर्चा के संभावित जिला अध्यक्ष पद के दावेदार अपने-अपने समर्थकों के साथ भव्य स्वागत की तैयारी में जुटे थे और इसी के चलते जेसीबी के जरिए शक्ति प्रदर्शन किया गया। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोमवार को शहडोल में सामने आई यह तस्वीर अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई है, जहां लोग पूछ रहे हैं कि स्वागत के नाम पर जनता को परेशान करना आखिर कब तक चलता रहेगा।