रिश्तों की डोर से बुजुर्गों के चेहरों पर लौटी मुस्कान, मुस्कान ड्रीम्स फाउंडेशन ने वृद्धाश्रम में मनाया रक्षाबंधन दादा धाम वृद्धा आश्रम में बुजुर्गों को रक्षा सूत्र बांधकर लिया आशीर्वाद, समाजसेवी मंजूषा गौतम के नेतृत्व में हुआ भावपूर्ण आयोजन
रिश्तों की डोर से बुजुर्गों के चेहरों पर लौटी मुस्कान, मुस्कान ड्रीम्स फाउंडेशन ने वृद्धाश्रम में मनाया रक्षाबंधन
दादा धाम वृद्धा आश्रम में बुजुर्गों को रक्षा सूत्र बांधकर लिया आशीर्वाद, समाजसेवी मंजूषा गौतम के नेतृत्व में हुआ भावपूर्ण आयोजन

कटनी।। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के स्नेह का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने का भी अवसर है। इसी भावना को चरितार्थ करते हुए मुस्कान ड्रीम्स फाउंडेशन ने झिंझरी स्थित दादा धाम वृद्धा आश्रम में बुजुर्गों के साथ रक्षाबंधन महोत्सव मनाकर समाजसेवा की एक अनुकरणीय मिसाल पेश की।
मुस्कान ड्रीम्स फाउंडेशन की संस्थापिका एवं सचिव, अधिवक्ता और समाजसेवी मंजूषा गौतम के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में संस्था के महिला मंडल ने वृद्धाश्रम पहुंचकर बुजुर्गों को अपनेपन और सम्मान का एहसास कराया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज की प्रदेश अध्यक्ष एवं समाजसेवी मंजूषा गौतम रहीं, जबकि कार्यक्रम का संचालन समाजसेवी विराट गौतम ने किया। अध्यक्षता रीता दुबे ने की।
रक्षा सूत्र बांधा, मिठाई खिलाई और लिया आशीर्वाद
कार्यक्रम के दौरान महिला मंडल की सदस्यों ने वृद्धाश्रम में निवासरत बुजुर्गों के सिर पर रुमाल रखकर उनका सम्मान किया। इसके बाद माथे पर रोली, हल्दी एवं कुमकुम का तिलक लगाकर रक्षा सूत्र बांधा और मिठाई खिलाई।
बुजुर्गों ने भी भावुक होकर समाजसेवी बहनों को आशीर्वाद दिया। कुछ क्षणों के लिए वृद्धाश्रम का वातावरण पारिवारिक स्नेह और आत्मीयता से भर उठा। आयोजन ने यह संदेश दिया कि समाजसेवा केवल जरूरत की वस्तुएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी अकेले व्यक्ति को अपनापन, सम्मान और भावनात्मक सहारा देना भी उतनी ही बड़ी सेवा है।
समाजसेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य
समाजसेवी मंजूषा गौतम लंबे समय से जरूरतमंद, असहाय और बेसहारा लोगों की मदद के लिए सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। मुस्कान ड्रीम्स फाउंडेशन के माध्यम से संस्था द्वारा समय-समय पर जरूरतमंदों, बच्चों, बुजुर्गों और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सेवा एवं सहयोग के कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर वृद्धाश्रम में पहुंचकर बुजुर्गों के साथ पर्व मनाना भी इसी सेवा भावना की एक कड़ी रहा। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि बुजुर्ग किसी परिवार या समाज पर बोझ नहीं, बल्कि अनुभव और संस्कारों की अमूल्य धरोहर हैं।
रक्षाबंधन के महत्व पर रखे विचार
समाजसेवी मंजूषा गौतम ने कहा कि सावन का महीना भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है और इसी पवित्र माह में आने वाला रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच स्नेह, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का पर्व है। उन्होंने कहा कि रक्षा सूत्र केवल एक धागा नहीं, बल्कि रिश्तों में विश्वास और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि रक्षाबंधन जैसे पर्वों को सामाजिक सरोकारों से भी जोड़ा जाए और उन लोगों के बीच खुशियां बांटी जाएं, जिन्हें परिवार और अपनों के साथ की सबसे अधिक आवश्यकता है। समाजसेवी संगीता जायसवाल ने भी रक्षाबंधन को भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में सेवा, स्नेह और मानवीय संवेदनाओं की भावना मजबूत होती है।
एक पहल, जिसने पर्व को बना दिया यादगार
दादा धाम वृद्धा आश्रम में आयोजित यह कार्यक्रम इस मायने में खास रहा कि यहां रक्षाबंधन की खुशियां केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन बुजुर्गों तक पहुंचीं, जिन्हें अपनेपन और आत्मीयता की सबसे अधिक जरूरत है।
मुस्कान ड्रीम्स फाउंडेशन की इस पहल ने यह संदेश दिया कि समाजसेवा का सबसे सुंदर रूप वही है, जिसमें किसी के चेहरे पर मुस्कान आए और किसी अकेले दिल को परिवार जैसा अपनापन महसूस हो।
कार्यक्रम के अंत में समाजसेवी मंजूषा गौतम ने सभी सहयोगियों, महिला मंडल की सदस्यों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर समाजसेवी संगीता जायसवाल, रीता दुबे, पूजा लालवानी, काजल पंजवानी, रश्मि राय, क्रांति चौबे, विराट गौतम सहित महिला मंडल की सदस्यों की गरिमामय उपस्थिति रही।