सांदीपनि विद्यालय में शिक्षकों की कार्यशाला संपन्न, छात्रों में नैतिकता व अनुशासन पर जोर

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कार्यशाला में राजीव तिवारी और शनद कुमार पांडेय ने शिक्षकों को दिए दिशा-निर्देश, कहा शिष्टाचार हमारी संस्कृति की पहचान।
शहडोल। शासकीय सांदीपनि विद्यालय जयसिंहनगर में सहायक आयुक्त आनंद राय सिन्हा के मार्गदर्शन एवं संकुल प्राचार्य राजीव तिवारी के नेतृत्व में एक दिवसीय शैक्षणिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुई। तत्पश्चात् अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यालयीन गतिविधियों को सशक्त बनाकर उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम प्राप्त करने के लिए शिक्षकों को मार्गदर्शन प्रदान करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत में वंदे मातरम् के 150वें स्मरणोत्सव के अवसर पर सामूहिक गायन किया गया, जिससे पूरा सभागार देशभक्ति की भावना से सराबोर हो उठा।
नैतिक शिक्षा पर दिया जोर
संकुल प्राचार्य राजीव तिवारी ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों की शिक्षा देना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समय पर विद्यालय पहुँचकर विद्यार्थियों की गतिविधियों पर विशेष ध्यान दें, ताकि विद्यालय का परीक्षा परिणाम और बेहतर हो।
उन्होंने यह भी बताया कि अध्यापन के दौरान प्रत्येक छात्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए उन्हें विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में शामिल किया जाए, जिससे उनका समग्र विकास संभव हो सके।
राजीव तिवारी ने अपने हाल ही में हुए आईआईएम रायपुर प्रशिक्षण अनुभव साझा करते हुए बताया कि जिन विद्यालयों के परिणाम 95 प्रतिशत से अधिक रहे, उन विद्यालयों के प्राचार्यों को यह प्रशिक्षण दिया गया था।
शिष्टाचार हमारी संस्कृति की पहचान- शनद
कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सेवानिवृत्त शिक्षक शनद कुमार पांडेय ने कहा कि आज के विद्यार्थियों में शिष्टाचार की कमी चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र का भविष्य वही विद्यार्थी हैं, जो संस्कृति और अनुशासन से संपन्न हों।
ये रहे मौजूद
कार्यशाला में संकुल प्राचार्य राजीव तिवारी, सेवानिवृत्त शिक्षक शनद कुमार पांडेय, नीलेश द्विवेदी, बीआरसीसी रामनारायण विश्वकर्मा, ओमप्रकाश तिवारी, बाबूलाल जायसवाल सहित क्षेत्र के समस्त प्राचार्य, शिक्षक एवं अतिथि शिक्षक उपस्थित रहे।

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