हर-हर महादेव के जयघोष से शिवमय हुआ नगर,200 वर्ष प्राचीन मधई मंदिर से निकली दिव्य शिव बारात बनी आस्था का महासंगम

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हर-हर महादेव के जयघोष से शिवमय हुआ नगर,200 वर्ष प्राचीन मधई मंदिर से निकली दिव्य शिव बारात बनी आस्था का महासंगम
कटनी।। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर नगर में धार्मिक आस्था का शैलाब उस समय उमड़ पड़ा, जब पूरे भक्तिभाव और उल्लास के साथ भगवान भोलेनाथ की पावन बारात नगर मार्गों से निकली। हर-हर महादेव और ॐ नमः शिवाय के जयघोष से संपूर्ण वातावरण शिवमय हो उठा। नगर की धर्मप्रेमी जनता बाराती के रूप में इस दिव्य दृश्य की साक्षी बनी और श्रद्धा से सराबोर होकर शिव बारात में सहभागी हुई।
बारात में भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, नंदी और शिवगणों की आकर्षक झांकियों ने सभी का मन मोह लिया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, शंखनाद और पुष्पवर्षा के बीच निकली यह शिव बारात नगरवासियों के लिए आस्था और भक्ति का अनुपम संगम बन गई।
इस शिव बारात का मुख्य आकर्षण रहे कैलाश पाठक, जिन्होंने भगवान भोलेनाथ की भेस-भूषा धारण कर शिव की जीवंत झांकी प्रस्तुत की। वर्षों से निरंतर शिव बारात में भोलेनाथ के स्वरूप में सहभागी होते आ रहे कैलाश पाठक श्रद्धालुओं के लिए केवल एक पात्र नहीं, बल्कि आस्था का सजीव प्रतीक बन चुके हैं। उनकी वेश-भूषा, भाव-भंगिमा और शिवत्व से ओत-प्रोत प्रस्तुति ने भक्तों को भावविभोर कर दिया।
श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्प अर्पित कर शिव बारात का स्वागत किया। नगर में देर तक भक्ति, उल्लास और धर्ममय वातावरण बना रहा। भगवान भोलेनाथ की पावन यात्रा मधई मंदिर से आरंभ होकर नगर के हृदय स्थल सुभाष चौक तक पहुंची। जैसे-जैसे यात्रा नगर मार्गों से आगे बढ़ती गई, वैसे-वैसे हर हर महादेव के जयघोष से वातावरण गुंजायमान होता चला गया। सुभाष चौक पहुंचने पर नगर के गणमान्य नागरिकों एवं धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं द्वारा भगवान भोलेनाथ की भव्य महाआरती की गई। दीपों की लौ, शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सम्पन्न हुई आरती ने पूरे वातावरण को दिव्यता से भर दिया। श्रद्धालु हाथ जोड़कर भगवान शिव से अपने एवं अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना करते नजर आए। पावन यात्रा में भगवान भोलेनाथ की आकर्षक पालकी विशेष श्रद्धा का केंद्र रही। पालकी के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं की आंखें नम हो उठीं और भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हर कोई भक्तिभाव से भगवान को निहारता रहा, मानो स्वयं कैलाशपति नगरवासियों को दर्शन देने निकले हों। पालकी के साथ निकली शिव यात्रा ने नगर को शिवमय कर दिया और महाशिवरात्रि महोत्सव की यह पावन परंपरा श्रद्धा व आस्था की अमिट छाप छोड़ते हुए मधई मंदिर में संपन्न हुई।

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