नगर की सांस्कृतिक गौरव का दसवां अध्याय 50 फुट के रावण दहन से गूंजेगा चौपाटी, रामलीला और सांस्कृतिक उत्सव में दिखेगी सनातन परंपरा की भव्य छटा नौ वर्षों की सफल यात्रा के बाद दसवें वर्ष में प्रवेश कर रहा श्री बजरंग उत्सव समिति का दशहरा महोत्सव; 20 और 21 अक्टूबर को सजेगा सांस्कृतिक मंच, असत्य पर सत्य की विजय का साक्षी बनेगा बारडोली
नगर की सांस्कृतिक गौरव का दसवां अध्याय 50 फुट के रावण दहन से गूंजेगा चौपाटी, रामलीला और सांस्कृतिक उत्सव में दिखेगी सनातन परंपरा की भव्य छटा
नौ वर्षों की सफल यात्रा के बाद दसवें वर्ष में प्रवेश कर रहा श्री बजरंग उत्सव समिति का दशहरा महोत्सव; 20 और 21 अक्टूबर को सजेगा सांस्कृतिक मंच, असत्य पर सत्य की विजय का साक्षी बनेगा बारडोली
विशेष रिपोर्ट :-गोलू शुक्ला।। कटनी।। दशहरा केवल रावण के पुतले का दहन नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, सनातन संस्कृति, धर्म, मर्यादा और मानवीय मूल्यों की उस शाश्वत परंपरा का उत्सव है, जो प्रत्येक युग में समाज को सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। भगवान श्रीराम के आदर्शों से आलोकित यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अहंकार पर विनम्रता और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है। इसी सांस्कृतिक चेतना को जीवंत करते हुए कटनी में श्री बजरंग उत्सव समिति द्वारा आयोजित दशहरा महोत्सव अपने दसवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस वर्ष 50 फुट ऊंचे विशालकाय रावण का दहन इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगा।
शहर के चौपाटी क्षेत्र में शासकीय अस्पताल के पास 20 एवं 21 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय दशहरा महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों, रामलीला मंचन और विशाल रावण दहन से सजा यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि कटनी की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक सहभागिता और सामूहिक उत्साह का प्रतीक बन चुका है। आयोजन को लेकर धर्मप्रेमी नागरिकों में उत्साह का वातावरण है।
श्री बजरंग उत्सव समिति का यह प्रयास उस परंपरा को आगे बढ़ाने की पहल है, जिसमें धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने, नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराने और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनते हैं।
नौ वर्षों की सफलता, दसवें वर्ष में सांस्कृतिक विरासत का विस्तार
श्री बजरंग उत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव ने नौ वर्षों की सफल यात्रा पूरी कर दसवें वर्ष में प्रवेश किया है। निरंतरता किसी भी सार्वजनिक आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक होती है। इसके पीछे आयोजकों की मेहनत, नागरिकों का सहयोग, धर्मप्रेमियों की सहभागिता और परंपरा को जीवित रखने का संकल्प होता है। कटनी जैसे सांस्कृतिक चेतना से समृद्ध शहर में दशहरा महोत्सव का लगातार आगे बढ़ना इस बात का संकेत है कि आधुनिकता के बदलते दौर में भी धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक आयोजनों के प्रति समाज का लगाव कायम है। इस आयोजन की विशेषता यह है कि यहां रावण दहन को केवल एक दृश्यात्मक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसके साथ रामलीला मंचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी स्थान दिया गया है। इस प्रकार धार्मिक आस्था, लोकसंस्कृति और सामाजिक सहभागिता एक ही मंच पर दिखाई देती है।
50 फुट का रावण बनेगा आकर्षण, रामलीला से जीवंत होंगे मर्यादा पुरुषोत्तम के आदर्श
21 अक्टूबर, बुधवार को शाम 7 बजे से आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम में रामलीला मंचन और 50 फुट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। चौपाटी स्थित आयोजन स्थल पर होने वाला यह कार्यक्रम महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगा। रामायण भारतीय समाज के लिए केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन-मूल्यों का मार्गदर्शक भी है। भगवान श्रीराम का चरित्र कर्तव्य, त्याग, मर्यादा, न्याय और लोककल्याण की प्रेरणा देता है। वहीं रावण का प्रसंग यह स्मरण कराता है कि ज्ञान, शक्ति और वैभव होने के बावजूद अहंकार तथा अधर्म अंततः विनाश की ओर ले जाते हैं।
इसीलिए रावण दहन का वास्तविक संदेश पुतले के जलने तक सीमित नहीं है। यह समाज को अपने भीतर मौजूद अहंकार, अन्याय, द्वेष और बुराइयों पर विजय पाने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। महोत्सव के दौरान 20 अक्टूबर को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे, जबकि 21 अक्टूबर को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ रामलीला मंचन एवं विशाल रावण दहन का कार्यक्रम निर्धारित है।
मुख्य अतिथि विष्णुदत्त शर्मा, महापौर प्रीति संजीव सूरी करेंगी अध्यक्षता
श्री बजरंग उत्सव समिति द्वारा जारी कार्यक्रम विवरण के अनुसार, महोत्सव में खजुराहो सांसद एवं भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमति महापौर श्रीमती प्रीति संजीव सूरी करेंगी। विशिष्ट अतिथियों में मुड़वारा विधायक संदीप जायसवाल, विजयराघवगढ़ विधायक संजय सत्येंद्र पाठक, पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा, कलेक्टर आशीष तिवारी, नगर निगम आयुक्त तपस्या परिहार, नगर निगम अध्यक्ष मनीष पाठक, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक सोनी टंडन, पूर्व महापौर शशांक श्रीवास्तव और कटनी के प्रथम महापौर विजेंद्र मिश्र के नाम शामिल हैं। इसके साथ ही पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष मिथलेश जैन, कांग्रेस शहर अध्यक्ष अमित शुक्ला, कटनी विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष पीतांबर टोपनानी, चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष पवन मित्तल, समाजसेवी मनीष गेई, प्रेम बत्रा, किशन सचदेवा, पंकज आहूजा, प्रदीप मित्तल, सुनील मिश्रा, नवाब खान तथा अन्य गणमान्य नागरिकों को भी आमंत्रित किया गया है। आमंत्रित अतिथियों की सूची में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शहर के प्रतिष्ठित नागरिकों की उपस्थिति इस आयोजन के सामाजिक स्वरूप को रेखांकित करती है। समिति की ओर से अजीत समदड़िया, विजय गुप्ता, प्रवीण बजाज, रमाकांत रजक, आशीष जायसवाल, अनिल देशभंडार, अरुण सोनी, अरविंद गुगालिया, आदिल अहमद, अभिलाष दीक्षित, रौनक खंडेलवाल, मुकेश गुप्ता, गौरव मोहनानी, भविष्य उसरेटे, राजेश गुड्डा जैन, सोनू नागवानी, प्रकाश सिंघानिया, रूपचंद्र चीनी चेलानी, गुल्लू खम्परिया, हरीश मुल्तानी और दिलराज अमर सिंह सहित अन्य गणमान्य नागरिकों को भी आयोजन से जोड़ा गया है।
आयोजन के पीछे समर्पित है पूरी टीम
किसी भी बड़े सार्वजनिक आयोजन की सफलता के पीछे कई लोगों का सामूहिक परिश्रम होता है। श्री बजरंग उत्सव समिति ने भी अलग-अलग दायित्वों के माध्यम से आयोजन की तैयारियों को आगे बढ़ाया है।
समिति के अध्यक्ष आशीष कंदेले और सचिव निखिल सित्रे हैं। कार्यक्रम अध्यक्ष की जिम्मेदारी अशोक विश्वकर्मा तथा कार्यक्रम सचिव का दायित्व राजय रजक संभाल रहे हैं। कार्यक्रम प्रभारी अभिषेक ताम्रकार और कार्यक्रम समन्वयक आशीष गुप्ता हैं। रावण निर्माण प्रभारी वीरेन्द्र ताम्रकार हैं, जबकि कोषाध्यक्ष राहुल सुहाने हैं। सह-प्रभारियों में नितिन सित्रे, सौरभ रैकवार, अजय रैदास, ओम दुबे और संतोष पटेल शामिल हैं। युवा इकाई के अध्यक्ष पारस जैन तथा दुर्गा समिति के अध्यक्ष सुरेश साहू हैं। कार्यक्रम उपाध्यक्षों में आकाश जायसवाल, अनु श्रीवास्तव, ऊषा पाण्डेय, सपना सरावगी, वागीश आनंद, अनुराग त्रिसोलिया, शालिनी सोनी और मंजूषा गौतम शामिल हैं। प्रचार-प्रसार समिति में आशीष सोनी, अमर ताम्रकार, आशीष रैकवार, यश खरे, अमित तिवारी, आयुष पुरवार, रोहित सेन, गोपाल सिंघानिया, प्रियेश गुप्ता और जितेन्द्र द्विवेदी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोजन में श्री शिवाजी सेवा समिति, आजाद चौक, कटनी का विशेष सहयोग भी प्राप्त हो रहा है।
जब धार्मिक आयोजन बनते हैं सामाजिक एकता का मंच
कटनी में दशहरा महोत्सव की महत्ता को केवल भीड़, सजावट और रावण के आकार से नहीं आंका जाना चाहिए। किसी भी सांस्कृतिक आयोजन की वास्तविक सफलता इस बात में निहित होती है कि वह समाज को कितना जोड़ता है, नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से कितना परिचित कराता है और सामूहिक जीवन में सद्भाव के कितने अवसर निर्मित करता है। धार्मिक आयोजन समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ आने का अवसर देते हैं। यहां परिवार, युवा, बुजुर्ग, सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि एक साझा सांस्कृतिक अनुभव का हिस्सा बनते हैं। यही सामूहिकता भारतीय उत्सव परंपरा की विशिष्ट पहचान है। श्री बजरंग उत्सव समिति का दसवें वर्ष का आयोजन इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। रामलीला के माध्यम से धार्मिक आख्यानों को मंच पर प्रस्तुत करना और रावण दहन के माध्यम से विजयादशमी का संदेश जन-जन तक पहुंचाना सांस्कृतिक स्मृति को जीवित रखने का कार्य है। आज जब जीवनशैली तेजी से बदल रही है और नई पीढ़ी का बड़ा हिस्सा डिजिटल दुनिया में समय बिता रहा है, तब ऐसे आयोजन उसे अपनी सांस्कृतिक जड़ों, लोकपरंपराओं और सामूहिक उत्सवों से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।
रावण का पुतला ही नहीं, बुराइयों का अहंकार भी जलना चाहिए
दशहरा हमें हर वर्ष एक महत्वपूर्ण प्रश्न के सामने खड़ा करता है—क्या रावण का दहन केवल एक परंपरा है, या यह हमारे जीवन और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अवसर भी है। यदि रावण दहन के बाद भी समाज में अन्याय, महिलाओं के प्रति असम्मान, छल, भ्रष्ट आचरण, वैमनस्य और अहंकार बने रहते हैं, तो पर्व के संदेश को उसके वास्तविक अर्थ में अपनाने की आवश्यकता बनी रहती है। भगवान श्रीराम के आदर्श हमें सिखाते हैं कि शक्ति का उपयोग लोककल्याण के लिए होना चाहिए, निर्णयों में न्याय होना चाहिए और व्यक्तिगत हितों से ऊपर समाज के व्यापक हित को स्थान मिलना चाहिए। विजयादशमी का पर्व इन्हीं मूल्यों को जीवन में उतारने का अवसर है। कटनी का यह महोत्सव तभी अपनी सांस्कृतिक यात्रा को और अधिक सार्थक बनाएगा, जब उत्सव के उल्लास के साथ सामाजिक सद्भाव, नागरिक जिम्मेदारी, महिलाओं के सम्मान, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और सार्वजनिक जीवन में मर्यादा का संकल्प भी जुड़ सकेगा। 50 फुट का रावण अपनी विशालता के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करेगा, लेकिन आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि वह होगी, जब यहां से लौटने वाला प्रत्येक व्यक्ति सत्य, सदाचार और सामाजिक एकता का कोई न कोई संदेश अपने साथ लेकर जाएगा।
कटनी की पहचान में जुड़ता सांस्कृतिक गौरव का एक और अध्याय
श्री बजरंग उत्सव समिति का दशहरा महोत्सव अपने दसवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। नौ वर्षों की सफल यात्रा के बाद यह आयोजन कटनी की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में अपनी निरंतरता दर्ज करा रहा है। समिति की ओर से समस्त धर्मप्रेमी नागरिकों, परिवारों, इष्टमित्रों और शहरवासियों से सपरिवार कार्यक्रम में शामिल होकर आयोजन की शोभा बढ़ाने की अपील की गई है।
कटनी की धरती पर होने वाला यह आयोजन एक बार फिर धर्म, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक सहभागिता के संगम का अवसर बनेगा। दीपों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, रामलीला और रावण दहन के बीच विजयादशमी का वही शाश्वत संदेश गूंजेगा—सत्य का मार्ग कठिन हो सकता है, लेकिन अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है।