…तो भू-माफिया ने दफन कर दिया कढिय़ा नाला

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समाजसेवी का चोला नाले का अस्तित्व किया खत्म

शहडोल। संभाग बनने के बाद शहर के आस-पास की जमीनों पर भू-माफिया की नजर लग गई, भू-माफिया नदी, नालों को भी नहीं बख्सा है। रीवा रोड में छतवई के पहले वर्षाे से बहने वाला कढिय़ा नाला पर्ल सिटी की भेंट चढ़ चुका है, इस नाले को एनएच-43 में बड़ा पुल बना हुआ है, लेकिन जरवाही से बहने वाले इस नाले को पर्ल सिटी के संचालकों ने आधे नाले पर कब्जा कर लिया है। इस नाले पर कब्जा करने वालों में सफेदपोश, समाजसेवी, भू-माफिया सहित अन्य रसूखदार लोग शामिल है, जो अपने रसूख और पहुंच के बल पर नदी, नालों को भी निगल रहे हैं।
प्रशासन ने नहीं दिया ध्यान
इस नाले पर वर्षाे पूर्व शासकीय एजेंसी द्वारा स्टॉप डैम बनाया गया था, जिसका अब कोई मतलब नहीं रह गया है, पर्ल सिटी ने करीब आधा किलोमीटर नाले में बाऊड्रीवाल का निर्माण कर लिया है। जिससे 50 फिट चौड़ा नाला 10 फिट में सिमट गया है। पर्ल सिटी के संचालकों ने नाले को आधा पटकर कब्जा कर लिया है। जिससे इस नाले से आस-पास के खेतों में सिंचाई होती थी, वह बंद हो गई है। इसके बाद भी प्रशासन का ध्यान नाले के अतिक्रमण पर ध्यान नहीं जा रहा है।
कब होगी अतिक्रमण पर कार्यवाही
अतिक्रमण के खिलाफ इस वर्ष चली मुहीम में प्रशासन का कई भू-माफिया के खिलाफ बुलडोजर चला है, जिसमें दर्जनों सफेदपोश, भू-माफिया व नकाबपोश समाजसेवियों के मकान ढहाये गये हैं, लोगों को उम्मीद थी कि पर्ल सिटी द्वारा किये गये अतिक्रमण पर भी कार्यवाही होगी, लेकिन अब तक पर्ल सिटी की ओर प्रशासन का बुलडोजर नहीं घूमा है। जिसके कारण भू-माफियाओं के हौसले बुलंद है।
यह कहते हैं ग्रामीण
पर्ल सिटी के आस-पास निवासरत ग्रामीणों ने पर्ल सिटी के पीछे छुपे अतिक्रमणकारियों के इरादे को निर्भीक होकर बयां किया है, ग्रामीणों ने बताया कि यह कढिय़ा नाला 20 किलोमीटर दूर जरवाही से निकलता है, जो आगे चलकर मेढ़की में मुडऩा नदी में मिल जाता है, लेकिन पर्ल सिटी के संचालकों ने इस नाले को 10 फिट में सिमटा दिया है। जिससे नाले की धार बंद हो जाती है और आस-पास खेतो में सिंचाई नहीं हो पाती है, इस नाले को खत्म करने वालों में बड़े पैसे वाले हैं, जिनके खिलाफ प्रशासन भी कार्यवाही की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। इस संबंध में जब नगर निवेश के अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया तो, उन्होंने फोन व्यस्त रहा।

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