…तो अपने ही बिगाड़ेंगे सियासी खेल!
टिकट नहीं मिलने से नेता नाराज
शहडोल। नगरीय निकाय चुनाव के बीच अब पार्टियों में बगावत के सुर तेज हो रहे हैं, प्रत्याशियों के नामांकन जमा होने के बाद लोगों का विरोध और तेज हो गया है, बीजेपी हो या कांग्रेस असंतुष्ट नेता जबरदस्त नाराज हैं, उनकी नाराजगी के सुर राजधानी सहित शहर में सुनाई दे रही हैं, इस चुनावी घमासान के बीच टिकट नहीं मिलने से नाराज कई बागी नेताओं ने पहले ही नामांकन दाखिल कर दिए थे, अब ये बागी सियासी खेल बिगाडऩे की तैयारी में हैं, जिन्होंने पार्टी के दबाव में नामांकन फार्म वापस लिया है, वह भितरघात की तैयारी में लगे हैं।
हाल ए वार्ड नंबर 35
वार्ड नंबर 35 में भारतीय जनता पार्टी ने राजेश नामदेव को टिकट दी, कांग्रेस ने दीपक केशरवानी, आम आदमी से सतीश चौबे एवं विकास तिवारी निर्दलीय चुनाव मैदान में है, इसके अलावा जयदीप खटीक भी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। वार्ड नंबर 35 में सबसे ज्यादा अगर किसी की हालत पतली है तो, वह भाजपा प्रत्याशी की, वार्ड नंबर 35 में 1068 मतदाता है, इसी वार्ड से भारतीय जनता पार्टी से नगर पालिका अध्यक्ष रही श्रीमती उर्मिला कटारे के पति राजा कटारे ने भी टिकट की दावेदारी की थी, साथ ही उर्मिला कटारे इस वार्ड से पूर्व में 3 बार पार्षद रह चुकी हैं, लेकिन उनसे सलाह न लेने के चलते वह भी पार्टी से खफा चल रही हैं।
भितरघात सहित परिवार के वोट
भाजपा द्वारा की गई टिकट वितरण में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती उर्मिला कटारे, गोपाल सराफ एवं राजेन्द्र भारती ने वार्ड नंबर 35 से टिकट की मांग की थी, लेकिन टिकट विरतण से असंतुष्ट हुए नेता संभवत: निर्दलीय प्रत्याशी को अंदर खाने जिताने की तैयारी कर रहे हैं, चर्चा है कि यहां से सबसे ज्यादा प्रबल दावेदार पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती उर्मिला कटारे के पति राजा कटारे थे, लेकिन अगर पार्टी यह कहकर उनकी टिकट काटी की, वह नगर पालिका अध्यक्ष रह चुकी है तो, गोपाल सराफ या राजेन्द्र भारती को टिकट दे सकती थी, क्योंकि यह भाजपा के पुराने और समर्पित कार्यकर्ता थे, लेकिन राजेश नामदेव को टिकट देने के चलते इनमें और इनके समर्थकों में असंतोष है, अगर यहां से भाजपा जीतती है तो, यह भी स्पष्ट हो जायेगा कि नगर पालिका अध्यक्ष ने अपने कार्यकाल के दौरान वार्ड के लिए कुछ नहीं किया और अगर पार्टी उन्हें टिकट देती तो, यहां से उसे हार का सामना करना पड़ता। वार्ड में चर्चा है कि राजेश नामदेव को अपने ही परिवार से वोट नहीं मिल पा रहे हैं।