बाघ की लगातार मूवमेंट, गांव कैदखाना बना बफर जोन या खुला शिकारगाह? घर में घुसा बाघ, युवक घायल”मोबाइल में कैद हुई दहशत

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बाघ की लगातार मूवमेंट, गांव कैदखाना बना

बफर जोन या खुला शिकारगाह? घर में घुसा बाघ, युवक घायल”मोबाइल में कैद हुई दहशत

पनपथा बफर जोन में दहशत, गांव बना खुला शिकारगाह
इस वक्त की सबसे बड़ी और डराने वाली खबर…पनपथा टाइगर रिज़र्व के बफर जोन में बाघ अब जंगल से निकलकर घरों के अंदर पहुंच गया है। बेल्दी गांव में घर के भीतर घुसकर बाघ ने एक आदिवासी युवक पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में युवक का पैर बुरी तरह जख्मी हो गया है और उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि—बाघ के घर के अंदर मौजूद होने की तस्वीरें ग्रामीणों ने अपने मोबाइल फोन में कैद कर ली हैं, जो अब वन विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

कटनी।। पनपथा टाइगर रिज़र्व का बफर जोन अब सुरक्षा नहीं, सीधा खतरा बन चुका है। बेल्दी बीट से सटे ग्राम बेल्दी में सोमवार को जो हुआ, उसने पूरे वन विभाग और प्रशासन की नींद उड़ा दी। जंगल से भटककर आया बाघ न सिर्फ बस्ती में घुसा, बल्कि घर के अंदर घुसकर आदिवासी युवक पर जानलेवा हमला कर दिया।
इस खौफनाक मंजर को ग्रामीणों ने अपने मोबाइल फोन में कैद कर लिया, जिन तस्वीरों में घर के अंदर मौजूद बाघ साफ दिखाई दे रहा है। ये तस्वीरें अब गांव-गांव में फैल रही हैं और प्रशासन की लापरवाही का जीता-जागता सबूत बन चुकी हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, बाघ जब घर में घुसा, उस समय अफरा-तफरी मच गई। जान जोखिम में डालकर कुछ ग्रामीणों ने दूर से मोबाइल से तस्वीरें खींचीं, जिनमें बाघ घर के भीतर आराम करता नजर आ रहा है।
इन तस्वीरों ने यह साफ कर दिया है कि खतरा सिर्फ जंगल तक सीमित नहीं रहा अब घर की चारदीवारी भी सुरक्षित नहीं। हमले में गोपाल पिता हेतराम कोल 52 वर्ष निवासी पडवार, गंभीर रूप से घायल हो गया।
बाघ ने उसका पैर बुरी तरह चबा लिया, जिससे वह खून से लथपथ हो गया। ग्रामीणों ने किसी तरह जान बचाकर उसे बरही अस्पताल पहुंचाया, जहां से हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रेफर किया गया। फिलहाल उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
बाघ की लगातार मूवमेंट, गांव कैदखाना बना
घटना के बाद से गांव में बाघ की लगातार मूवमेंट देखी जा रही है। महिलाएं और बच्चे घरों से बाहर निकलने में डर रहे खेत, रास्ते और स्कूल वीरान सूर्यास्त के बाद गांव में सन्नाटा ग्रामीणों का कहना है कि अब डर जंगल का नहीं, घर के अंदर घुस आने का है।

सूचना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सावधानी बरतने की अपील कर चली गई। लेकिन सवाल यह है। जब बाघ घर के अंदर तक पहुंच चुका है, तो सिर्फ अपील काफी है? बफर जोन में निगरानी व्यवस्था क्यों नाकाम है? ग्रामीणों का आरोप है कि आदिवासी और गरीब ही हर बार प्रशासनिक लापरवाही की कीमत चुका रहे हैं। तत्काल रेस्क्यू नहीं हुआ तो बढ़ेगी जनहानि विशेषज्ञों और ग्रामीणों की मांग है कि बाघ को तत्काल ट्रेस कर रेस्क्यू या नियंत्रित किया जाए, नहीं तो बेल्दी सहित आसपास के कई गांवों में बड़ा हादसा तय है। मोबाइल में कैद तस्वीरें अब सवाल पूछ रही हैं कि क्या किसी की जान जाने के बाद ही प्रशासन जागेगा?

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